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उत्तराखंड में ‘ऑपरेशन कालनेमि’ का प्रहार: विदेशी घुसपैठियों के लिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ बना देवभूमि?

The Hill India News
Last updated: March 30, 2026 1:25 pm
The Hill India News
Published: March 30, 2026
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Photo: Uttarakhand Police
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देहरादून: उत्तराखंड की शांत वादियों में अपनी पहचान छुपाकर रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ राज्य पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुए ‘उत्तराखंड सत्यापन अभियान’ के तहत पुलिस ने न केवल सैकड़ों संदिग्धों को हिरासत में लिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय घुसपैठ के एक गहरे नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है। 10 जुलाई 2025 से मार्च 2026 के बीच चले इस विशेष अभियान ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।

Contents
राजधानी देहरादून: घुसपैठियों का मुख्य गढ़‘ऑपरेशन कालनेमि’ और ‘क्रैकडाउन’: आंकड़ों की जुबानीपहचान बदलकर रहने का खतरनाक ट्रेंडहरिद्वार से पिथौरागढ़ तक पुलिस की पैनी नजरफर्जी दस्तावेज गिरोह और जन सेवा केंद्रों की भूमिकासीएम धामी का सख्त रुख: चारधाम रूट पर हाई अलर्ट

राजधानी देहरादून: घुसपैठियों का मुख्य गढ़

पुलिस के आंकड़ों और हालिया कार्रवाई पर नजर डालें तो राजधानी देहरादून इस अवैध नेटवर्क का केंद्र बनकर उभरा है। ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के तहत अभी हाल ही में 29 मार्च 2026 को रायपुर थाना क्षेत्र से तीन विदेशी महिलाओं की गिरफ्तारी ने सनसनी फैला दी। इनमें दो महिलाएं उज्बेकिस्तान और एक किर्गिस्तान की नागरिक हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये विदेशी महिलाएं फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड के सहारे लंबे समय से स्थानीय निवासी बनकर रह रही थीं।

देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के अनुसार, पुलिस केवल इन्हें डिपोर्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरे सिंडिकेट की जड़ें खोद रही है जो इन्हें फर्जी भारतीय दस्तावेज मुहैया करा रहा है।

‘ऑपरेशन कालनेमि’ और ‘क्रैकडाउन’: आंकड़ों की जुबानी

जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच चले विशेष उत्तराखंड सत्यापन अभियान के आंकड़े राज्य की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं:

  • कुल गिरफ्तारियां/हिरासत: 511 लोग।

  • बांग्लादेशी नागरिक: कम से कम 19 (पुष्टि शुदा)।

  • प्रमुख क्षेत्र: पटेल नगर, नेहरू कॉलोनी, रायपुर और सहसपुर।

  • बरामदगी: फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और स्थानीय निवास प्रमाण पत्र।

पहचान बदलकर रहने का खतरनाक ट्रेंड

जांच में यह बेहद चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि विदेशी घुसपैठिए अपनी धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान छुपाकर हिंदू नामों का सहारा ले रहे हैं। नवंबर 2025 में ‘बाबली बेगम’ नामक बांग्लादेशी महिला को फर्जी हिंदू पहचान के साथ देहरादून से गिरफ्तार किया गया था। वहीं, जुलाई 2025 में सहसपुर से एक बांग्लादेशी घुसपैठिया ‘साधु’ के वेश में पकड़ा गया, जो भोली-भाली जनता को ठगने का काम कर रहा था। यह पैटर्न दर्शाता है कि घुसपैठिए स्थानीय संस्कृति में घुलने-मिलने के लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं।

हरिद्वार से पिथौरागढ़ तक पुलिस की पैनी नजर

सिर्फ देहरादून ही नहीं, बल्कि रुड़की और ऋषिकेश जैसे औद्योगिक और धार्मिक क्षेत्रों में भी पुलिस की सक्रियता बढ़ी है। रुड़की में बाहरी कामगारों की आड़ में छिपे संदिग्धों की पहचान के लिए ‘श्रमिक सत्यापन’ तेज कर दिया गया है।

वहीं, सीमावर्ती जिला पिथौरागढ़ भी अछूता नहीं है। पिछले साल झूलाघाट बॉर्डर से एक अमेरिकी नागरिक को बिना पासपोर्ट और वीजा के नेपाल भागने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। यह घटना दर्शाती है कि उत्तराखंड के रास्ते अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघने की कोशिशें भी लगातार जारी हैं।

फर्जी दस्तावेज गिरोह और जन सेवा केंद्रों की भूमिका

पुलिस जांच का एक सिरा अब उन ‘जन सेवा केंद्रों’ (CSC) तक भी पहुँच गया है, जहाँ से इन विदेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। आशंका है कि एक संगठित गिरोह सक्रिय है जो चंद रुपयों के लालच में देश की सुरक्षा से समझौता कर रहा है। पुलिस अब इन केंद्रों के संचालकों की कुंडली खंगाल रही है ताकि फर्जी आईडी बनाने वाले नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

सीएम धामी का सख्त रुख: चारधाम रूट पर हाई अलर्ट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन को विशेष निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि ‘देवभूमि’ की जनसांख्यिकी (Demography) से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खासकर उत्तरकाशी और अन्य पहाड़ी जिलों में स्थित आश्रमों, धर्मस्थलों और किराए के मकानों का शत-प्रतिशत सत्यापन करने को कहा गया है, ताकि चारधाम यात्रा मार्ग पर सुरक्षा अभेद्य बनी रहे।

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल का बयान: “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—देवभूमि की सुरक्षा सर्वोपरि है। सत्यापन अभियान और ऑपरेशन कालनेमि रुकने वाले नहीं हैं। जो भी अवैध रूप से रह रहा है, उसे या तो जेल भेजा जाएगा या डिपोर्ट किया जाएगा।”

उत्तराखंड सत्यापन अभियान ने यह साफ कर दिया है कि राज्य अब घुसपैठियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहा। पुलिस की मुस्तैदी और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से अब एक-एक संदिग्ध की पहचान की जा रही है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों को भी जागरूक रहने की जरूरत है ताकि फर्जी दस्तावेजों के सहारे आपके पड़ोस में कोई विदेशी अपराधी अपनी जड़ें न जमा सके।

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