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उत्तराखंड: NEET पेपर लीक पर गरमाई सियासत, उत्तराखंड में भर्ती घोटालों का लंबा इतिहास; युवाओं का भरोसा फिर टूटा

The Hill India News
Last updated: May 14, 2026 10:26 am
The Hill India News
Published: May 14, 2026
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देहरादून: देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद उपजा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली के आरोपों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को चिंता में डाल दिया है। उत्तराखंड में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं और दोनों दल एक-दूसरे पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं।

Contents
कांग्रेस का हमला, सरकार को बताया विफलभाजपा का पलटवार, कहा- कांग्रेस की देन है ‘पर्ची-खर्ची’ संस्कृतिउत्तराखंड में भर्ती घोटालों का लंबा इतिहास1. UKSSSC स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक2. VDO-VPDO भर्ती घोटाला3. सचिवालय रक्षक भर्ती विवाद4. वन दारोगा भर्ती परीक्षा विवाद5. पटवारी-लेखपाल भर्ती पर उठे सवाल6. पुलिस भर्ती परीक्षाओं पर भी विवादक्यों नहीं रुक रहा पेपर लीक का खेल?धामी सरकार का नकल विरोधी कानूनयुवाओं में बढ़ता अविश्वास

NEET परीक्षा में उत्तराखंड के लगभग 1800 छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद छात्रों के बीच असमंजस और मानसिक दबाव की स्थिति बन गई है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक कठिन मेहनत की, परिवारों ने आर्थिक बोझ उठाया, कोचिंग और रहने पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन अब दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता ने उनका आत्मविश्वास तोड़ दिया है।

कांग्रेस का हमला, सरकार को बताया विफल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल  ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि NEET परीक्षा रद्द होना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों पर हमला है। उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थियों ने वर्षों की मेहनत और परिवारों के त्याग के बाद परीक्षा दी थी, लेकिन परीक्षा सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाना सरकार की नाकामी को दर्शाता है।

गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में देशभर में दर्जनों भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी एग्जाम्स में पेपर लीक और धांधली के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल सिस्टम की कमजोरी नहीं, बल्कि युवाओं के साथ विश्वासघात है। कांग्रेस ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोर सजा दी जाए।

उन्होंने उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में पिछले कई वर्षों से भर्ती परीक्षाएं लगातार विवादों में रही हैं। कहीं प्रश्नपत्र लीक हुए, कहीं परिणामों में देरी हुई, तो कहीं भाई-भतीजावाद के आरोप लगे। कांग्रेस का कहना है कि सत्ता संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर संगठित नकल और पेपर लीक संभव नहीं हो सकते।

भाजपा का पलटवार, कहा- कांग्रेस की देन है ‘पर्ची-खर्ची’ संस्कृति

वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक अवसरवाद बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत परीक्षा रद्द की और सीबीआई जांच के आदेश दिए।

महेंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार पहले ही परीक्षा धांधली रोकने के लिए सख्त कानून बना चुकी है और इस बार दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि “पर्ची-खर्ची” की राजनीति कांग्रेस शासनकाल की देन है और पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं थी।

भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। उन्होंने युवाओं से धैर्य बनाए रखने की अपील की और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

उत्तराखंड में भर्ती घोटालों का लंबा इतिहास

NEET विवाद ने एक बार फिर उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में सामने आए भर्ती घोटालों और पेपर लीक मामलों की याद ताजा कर दी है। राज्य में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

जांच एजेंसियों की रिपोर्टों में यह सामने आया कि कई मामलों में संगठित गिरोह, दलाल, कोचिंग नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता थी। अब तक अलग-अलग मामलों में 60 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

1. UKSSSC स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक

Uttarakhand Subordinate Service Selection Commission की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा राज्य के सबसे चर्चित भर्ती घोटालों में गिनी जाती है। परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद ही सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में प्रश्नपत्र वायरल होने की खबरें सामने आई थीं।

जांच में पता चला कि परीक्षा से पहले ही चुनिंदा अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचा दिया गया था। इस मामले में कई गिरफ्तारियां हुईं और बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। इस प्रकरण ने राज्य की भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

2. VDO-VPDO भर्ती घोटाला

ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा का मामला भी उत्तराखंड के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में शामिल रहा। एसटीएफ जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा में पास कराने की व्यवस्था की गई थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। इस मामले में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए और कई गिरफ्तारियां भी हुईं। इस प्रकरण ने यह दिखाया कि भर्ती परीक्षाओं में संगठित नेटवर्क किस तरह सक्रिय था।

3. सचिवालय रक्षक भर्ती विवाद

सचिवालय रक्षक भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक और सेटिंग के आरोप लगे थे। जांच एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बेचे गए थे और कुछ अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए।

हालांकि जांच के बाद कई तथ्यों का खुलासा हुआ, लेकिन इस प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया कि भर्ती परीक्षाओं के आसपास दलालों का नेटवर्क गहराई तक पहुंच चुका था।

4. वन दारोगा भर्ती परीक्षा विवाद

वन विभाग की दारोगा भर्ती परीक्षा भी विवादों से अछूती नहीं रही। परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोप लगे। कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए और पारदर्शिता की मांग की।

अभ्यर्थियों का आरोप था कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती गई। हालांकि जांच के बाद कुछ मामलों में कार्रवाई हुई, लेकिन इस प्रकरण ने भी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित किया।

5. पटवारी-लेखपाल भर्ती पर उठे सवाल

राज्य में पटवारी और लेखपाल भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी कई बार विवाद सामने आए। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाए कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और परिणामों में अनियमितताएं थीं।

हर मामले में पेपर लीक साबित नहीं हुआ, लेकिन लगातार उठते सवालों ने भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा किया। इससे युवाओं के बीच अविश्वास और बढ़ा।

6. पुलिस भर्ती परीक्षाओं पर भी विवाद

उत्तराखंड में पुलिस भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी समय-समय पर धांधली और पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। कुछ मामलों में अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को अदालत तक चुनौती दी।

युवाओं का कहना है कि जब भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो मेहनत करने वाले उम्मीदवारों का मनोबल टूटता है और सिस्टम के प्रति भरोसा कमजोर होता है।

क्यों नहीं रुक रहा पेपर लीक का खेल?

देहरादून में कोचिंग अकादमी चलाने वाले डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि अब पेपर लीक केवल नकल का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह करोड़ों रुपये का संगठित नेटवर्क बन चुका है।

उनके अनुसार इस नेटवर्क में तकनीकी जानकार लोग, प्रिंटिंग चेन से जुड़े कर्मचारी, कोचिंग गिरोह, दलाल और कई बार अंदरूनी सिस्टम से जुड़े लोग भी शामिल पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में लगातार भर्ती घोटाले सामने आना यह संकेत देता है कि परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली और परीक्षा केंद्रों की निगरानी में अभी भी कई कमजोरियां मौजूद हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर भ्रष्ट नेटवर्क इतने मजबूत हो जाते हैं कि वे पूरे सिस्टम को प्रभावित कर देते हैं।

धामी सरकार का नकल विरोधी कानून

लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बाद पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 10 फरवरी 2023 को देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानूनों में से एक लागू किया।

“उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अध्यादेश, 2023” के तहत नकल और पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ उम्रकैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया। सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने के बाद कई परीक्षा माफिया गिरफ्तार किए गए और राज्य में नकल के मामलों पर काफी हद तक रोक लगी है।

हालांकि विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। कांग्रेस का कहना है कि जब तक भर्ती एजेंसियों और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक इस तरह के मामले सामने आते रहेंगे।

युवाओं में बढ़ता अविश्वास

लगातार सामने आ रहे भर्ती घोटालों और पेपर लीक मामलों का सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ रहा है। हजारों छात्र वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परिवार आर्थिक बोझ उठाते हैं, कोचिंग और रहने पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब परीक्षा रद्द होती है या धांधली सामने आती है तो सबसे अधिक नुकसान ईमानदार अभ्यर्थियों को होता है।

कई छात्रों का कहना है कि अब उन्हें परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं रह गया है। कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि बार-बार परीक्षा रद्द होने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत नहीं बनाया गया, तो युवाओं का भरोसा और कमजोर हो सकता है। भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता केवल सरकारी नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि देश की शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की साख से भी जुड़ी हुई है।

NEET विवाद ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पेपर लीक और भर्ती घोटाले केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुके हैं। अब सबकी नजर जांच एजेंसियों और सरकार की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या इस बार वास्तव में दोषियों तक पहुंचा जाएगा या फिर यह मामला भी समय के साथ राजनीतिक बहस बनकर रह जाएगा।

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