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दिल्ली में ईंधन बचत और स्वदेशी अभियान की शुरुआत, सीएम रेखा गुप्ता के 10 बड़े फैसलों से बदलेगी सरकारी व्यवस्था

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने और देश में संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की अपील के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को राजधानी में “मेरा भारत, मेरा योगदान” अभियान की शुरुआत करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इन फैसलों का उद्देश्य ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी, सरकारी खर्चों पर नियंत्रण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना बताया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश इस समय आर्थिक आत्मनिर्भरता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में दिल्ली सरकार भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए नई कार्यशैली अपनाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि आम नागरिक भी इस अभियान का हिस्सा बनें और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

सबसे बड़ा फैसला सरकारी दफ्तरों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के सभी सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों को हर हफ्ते दो दिन घर से काम करने की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही निजी कंपनियों और कॉरपोरेट सेक्टर से भी अपील की जाएगी कि वे अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम नीति अपनाएं। सरकार का मानना है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, ट्रैफिक जाम घटेगा और ईंधन की बचत होगी।

दिल्ली सरकार ने सरकारी अधिकारियों के लिए पेट्रोल और डीजल के उपयोग पर भी सख्ती दिखाई है। अब अधिकारियों को मिलने वाले ईंधन कोटे में 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। हालांकि कर्मचारियों को राहत देते हुए परिवहन भत्ते में 10 प्रतिशत की वृद्धि का ऐलान किया गया है, ताकि उन्हें सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने में दिक्कत न हो।

मुख्यमंत्री ने “मंडे मेट्रो” अभियान की भी घोषणा की। इसके तहत हर सोमवार सभी मंत्री, अधिकारी और सरकारी कर्मचारी मेट्रो से सफर करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिले और लोग निजी वाहनों पर निर्भरता कम करें। कर्मचारियों की सुविधा के लिए सरकारी कॉलोनियों के बाहर 58 विशेष बसें तैनात की जाएंगी, जो उन्हें मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाएंगी।

दिल्ली सरकार ने सरकारी बैठकों के तरीके में भी बदलाव करने का फैसला लिया है। अब आधी बैठकों का आयोजन ऑनलाइन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों से भी अनुरोध किया कि वे नॉन-प्रैक्टिकल कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करें। इसके अलावा अदालतों से भी ज्यादा से ज्यादा मामलों की वर्चुअल सुनवाई करने की अपील की गई है। सरकार का कहना है कि इससे यात्रा कम होगी और समय के साथ ईंधन की भी बचत होगी।

एक अन्य बड़े फैसले के तहत अगले एक साल तक दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी आधिकारिक विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा। सरकार का तर्क है कि विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च कम कर उस धन का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी घोषणा की कि अगले तीन महीनों तक दिल्ली सरकार किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं करेगी। उनका कहना है कि बड़े आयोजनों में भारी मात्रा में बिजली, ईंधन और अन्य संसाधनों का उपयोग होता है, जिसे फिलहाल सीमित करना जरूरी है।

वाहनों की खरीद पर भी अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया गया है। दिल्ली सरकार अगले छह महीनों तक कोई नया पेट्रोल, डीजल या इलेक्ट्रिक वाहन नहीं खरीदेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए और अनावश्यक खर्चों से बचना चाहिए।

सरकार ने “मेड इन इंडिया” अभियान को भी अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार अब केवल 100 प्रतिशत स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल करेगी। सरकारी खरीद में भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी और राजधानी के सभी बड़े मॉल्स में विशेष “मेड इन India” कॉर्नर बनाए जाएंगे, ताकि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और छोटे उद्योगों को समर्थन देने में मदद करेगा।

ऊर्जा बचत को लेकर भी दिल्ली सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। सभी सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा बिजली की बर्बादी रोकने के लिए सरकारी दफ्तरों में “मास्टर स्विच” लगाए जाएंगे, ताकि कार्यालय बंद होने के बाद सभी उपकरण एक साथ बंद किए जा सकें।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन “नो व्हीकल डे” मनाएं। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली के लोग सप्ताह में एक दिन भी निजी वाहन का उपयोग बंद कर दें, तो इससे लाखों लीटर ईंधन की बचत हो सकती है और प्रदूषण में भी बड़ी कमी आएगी।

इन घोषणाओं के साथ दिल्ली सरकार अगले 90 दिनों तक जागरूकता अभियान भी चलाएगी। इस अभियान के जरिए लोगों को ईंधन बचाने, बिजली की खपत कम करने और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की शपथ भी दिलाई जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में इन फैसलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे संसाधनों की बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को पहले इन फैसलों के व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि सरकार का दावा है कि इन कदमों से दिल्ली में ट्रैफिक, प्रदूषण और सरकारी खर्चों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं, तो दिल्ली देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता और निजी क्षेत्र इन पहलों को किस हद तक अपनाते हैं।

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