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मिशन ‘टीबी मुक्त उत्तराखंड’: उधम सिंह नगर ने पेश की मिसाल, राज्यभर में मिला दूसरा स्थान; राज्यपाल ने डॉ. केके अग्रवाल को नवाजा

रुद्रपुर/देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘टीबी मुक्त भारत’ संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद ने एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और जनभागीदारी के अनूठे समन्वय के चलते उधम सिंह नगर ने टीबी उन्मूलन अभियान में पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान प्रदेश के माननीय राज्यपाल ने उधम सिंह नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. केके अग्रवाल को प्रतिष्ठित सम्मान से विभूषित किया।

विश्व टीबी दिवस पर मिली बड़ी पहचान

यह सम्मान विश्व टीबी दिवस (24 मार्च) के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड स्वास्थ्य मिशन द्वारा ‘100 दिवसीय सघन टीबी उन्मूलन अभियान’ का शंखनाद भी किया गया। राज्य के सभी 13 जनपदों की स्वास्थ्य प्रगति की समीक्षा के बाद उधम सिंह नगर के ‘रुद्रपुर मॉडल’ को विशेष रूप से सराहा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तराई के इस जिले ने जिस तरह से औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाकर मरीजों की खोज की, वह पूरे राज्य के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

उधम सिंह नगर की सफलता के चार मुख्य स्तंभ

उधम सिंह नगर टीबी उन्मूलन सफलता के पीछे केवल प्रशासनिक आंकड़े नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की एक सोची-समझी रणनीति रही है। जिले की इस उपलब्धि को मुख्य रूप से चार स्तंभों पर टिका हुआ माना जा रहा है:

  1. सटीक और त्वरित पहचान (Active Case Finding): स्वास्थ्य विभाग ने केवल अस्पतालों में आने वाले मरीजों का इंतजार नहीं किया, बल्कि घर-घर जाकर संभावित लक्षणों वाले लोगों की जांच की। विशेष रूप से मलिन बस्तियों और औद्योगिक क्षेत्रों में सघन अभियान चलाए गए।

  2. निरंतर निगरानी और फॉलोअप: टीबी के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती मरीज द्वारा बीच में दवा छोड़ देना है। डॉ. केके अग्रवाल के नेतृत्व में एक ‘सुदृढ़ निगरानी तंत्र’ विकसित किया गया, जिसने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक पंजीकृत मरीज अपनी खुराक पूरी करे।

  3. पोषण सहायता और निक्षय मित्र: केंद्र सरकार की निक्षय पोषण योजना का जिले में प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। स्वयंसेवी संस्थाओं और ‘निक्षय मित्रों’ को जोड़कर मरीजों को पौष्टिक आहार किट उपलब्ध कराई गई, जिससे रिकवरी दर में भारी उछाल आया।

  4. व्यापक जनजागरूकता: ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के नारे को गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग लिया गया, जिससे इस बीमारी से जुड़ा सामाजिक कलंक (Stigma) कम हुआ।

डॉ. केके अग्रवाल: टीम वर्क और जनसहभागिता का श्रेय

सम्मान ग्रहण करने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके अग्रवाल ने इस सफलता का सारा श्रेय अपनी पूरी टीम और जनपद की जनता को दिया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन हजारों आशा कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वयंसेवी संस्थाओं का है जिन्होंने दिन-रात एक कर टीबी के खिलाफ इस जंग को लड़ा है। जनसहभागिता के बिना किसी भी स्वास्थ्य मिशन की पूर्ण सफलता असंभव है।”

डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया कि जनपद में टीबी उन्मूलन के लिए तकनीक का भी सहारा लिया गया है। डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से मरीजों की स्थिति पर रीयल-टाइम नजर रखी गई, जिससे रोगमुक्ति दर (Cure Rate) में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई।

100 दिवसीय सघन अभियान: अब लक्ष्य प्रथम स्थान का

राज्यपाल द्वारा सम्मानित होने के बाद जनपद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का उत्साह दोगुना हो गया है। उत्तराखंड स्वास्थ्य मिशन द्वारा शुरू किए गए नए 100 दिवसीय सघन अभियान के तहत अब उधम सिंह नगर का लक्ष्य न केवल अपनी रैंकिंग सुधारना है, बल्कि जिले को पूरी तरह से ‘टीबी मुक्त’ घोषित करना है।

स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प दोहराया है कि भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाएगा। औद्योगिक इकाइयों के साथ समन्वय कर श्रमिकों के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे, ताकि समाज का कोई भी वर्ग इस घातक बीमारी की चपेट में न रहे।

राज्य के लिए प्रेरणास्रोत बना उधम सिंह नगर

उत्तराखंड के अन्य जनपदों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी उधम सिंह नगर के कार्यों की सराहना की है। जिस तरह से जिले ने कठिन भौगोलिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की है, वह यह सिद्ध करता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और नेतृत्व दूरदर्शी हो, तो बड़े से बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।

यह उपलब्धि निश्चित रूप से राज्य के अन्य जिलों को भी प्रतिस्पर्धा के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रेरित करेगी।

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