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विभाजनकारी बयान पर AIMIM ने तौकीर निजामी को किया पार्टी से निष्कासित, ओवैसी ने कहा- ‘संविधान के खिलाफ कुछ भी मंजूर नहीं’

The Hill India News
Last updated: March 25, 2026 2:54 pm
The Hill India News
Published: March 25, 2026
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नई दिल्ली/हैदराबाद। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी साख और संवैधानिक छवि को बनाए रखने के लिए एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। ईद के मौके पर ‘आर्थिक बहिष्कार’ और ‘केवल अपनों से खरीदारी’ की अपील कर विवादों के घेरे में आए पार्टी नेता तौकीर निजामी को AIMIM ने तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि समाज में दरार पैदा करने वाले और किसी विशेष समुदाय के आर्थिक बहिष्कार की वकालत करने वाले बयानों के लिए संगठन में कोई जगह नहीं है।

Contents
विवाद की जड़: क्या था तौकीर निजामी का बयान?AIMIM का कड़ा रुख: अनुशासनहीनता और असंवैधानिक आचरणसंविधान के प्रति प्रतिबद्धता का संदेशतौकीर निजामी की प्रतिक्रिया: ‘अध्यक्ष से करूंगा बात’राजनीतिक गलियारों में हलचलसुशासन और सौहार्द की प्राथमिकता

विवाद की जड़: क्या था तौकीर निजामी का बयान?

हाल ही में सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर तौकीर निजामी का एक बयान तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की थी कि वे ईद की खरीदारी केवल अपने ही समुदाय के दुकानदारों से करें। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में समाज को बांटने और एक विशेष प्रकार के ‘आर्थिक ध्रुवीकरण’ के प्रयास के रूप में देखा गया। देखते ही देखते इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया और विपक्षी दलों के साथ-साथ नागरिक समाज ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

AIMIM का कड़ा रुख: अनुशासनहीनता और असंवैधानिक आचरण

पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक निष्कासन पत्र में तौकीर निजामी के कृत्य को ‘घोर अनुशासनहीनता’ करार दिया गया है। पार्टी नेतृत्व ने अपने पत्र में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि तौकीर निजामी का सार्वजनिक बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना और उकसाने वाला है, बल्कि यह सीधे तौर पर समाज में विभाजन पैदा करने वाला है।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि AIMIM नेता तौकीर निजामी निष्कासित किए जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि उनकी बातें पार्टी की मूल विचारधारा और भारत के संविधान की मूल भावना के विपरीत थीं। पत्र में लिखा गया, “भारत का संविधान सभी नागरिकों के बीच समानता, न्याय और साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देता है। किसी भी समुदाय का आर्थिक बहिष्कार करना या धर्म के आधार पर भेदभाव करना AIMIM के सिद्धांतों में शामिल नहीं है।“

संविधान के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM अक्सर अपनी कट्टर छवि को लेकर चर्चा में रहती है, लेकिन इस कार्रवाई के जरिए पार्टी ने एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी ने आधिकारिक बयान में कहा है कि वह संवैधानिक मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

निष्कासन पत्र में आगे कहा गया है, “पार्टी यह साफ करना चाहती है कि चाहे कोई व्यक्ति संगठन में किसी भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, यदि वह समाज में विद्वेष फैलाने या असंवैधानिक आचरण में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी संकोच के सख्त कार्रवाई की जाएगी।“ इस कदम को राजनीतिक विशेषज्ञ ओवैसी की उस रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जहां वे खुद को ‘संविधान का रक्षक’ बताते हुए अपनी राष्ट्रीय छवि को और अधिक परिपक्व बनाना चाहते हैं।

तौकीर निजामी की प्रतिक्रिया: ‘अध्यक्ष से करूंगा बात’

पार्टी के इस कड़े फैसले के बाद तौकीर निजामी की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मीडिया (इंडिया टीवी) से बातचीत के दौरान निजामी ने कहा कि उन्हें अब तक आधिकारिक रूप से निष्कासन का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “मुझे सोशल मीडिया या अन्य स्रोतों से इस कार्रवाई की जानकारी मिली है। मैं इस विषय में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से सीधे बात करूंगा और अपना पक्ष रखूंगा।” हालांकि, पार्टी ने अपने पत्र में ‘तत्काल प्रभाव’ शब्द का इस्तेमाल कर उनके लौटने के रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

तौकीर निजामी पर हुए इस एक्शन ने अन्य राजनीतिक दलों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। जानकारों का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए AIMIM किसी भी ऐसे विवाद से बचना चाहती है जिससे उसे ‘सांप्रदायिक’ करार देकर घेरा जा सके। विशेषकर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में जहां पार्टी अपना आधार बढ़ा रही है, वहां इस तरह के विवादित बयान पार्टी की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

सुशासन और सौहार्द की प्राथमिकता

निश्चित रूप से, AIMIM का यह कदम भारत की बहुलवादी संस्कृति और साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। राजनीतिक दलों के भीतर इस तरह की त्वरित और सख्त जवाबदेही तय होना लोकतंत्र के लिए सुखद है। अब देखना यह होगा कि तौकीर निजामी के निष्कासन के बाद पार्टी की भविष्य की दिशा क्या रहती है और क्या अन्य नेता इस कार्रवाई से सबक लेते हैं।

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