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BSF-BGB में सीमा पर टकराव: बांग्लादेशी घुसपैठिए को वापस लेने से इनकार, ‘नो मैन्स लैंड’ में फंसा शख्स बना विवाद की वजह

The Hill India News
Last updated: June 11, 2026 4:13 am
The Hill India News
Published: June 11, 2026
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भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक बार फिर अवैध घुसपैठ को लेकर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। मेघालय के साउथ वेस्ट गारो हिल्स जिले में स्थित महेंद्रगंज सेक्टर के नंदिरचर इलाके में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच उस समय तीखी बहस हो गई, जब भारतीय सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस लेने से बांग्लादेशी अधिकारियों ने इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद संबंधित व्यक्ति दोनों देशों की सीमा के बीच स्थित ‘नो मैन्स लैंड’ में फंस गया है और उसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर मेघालय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। सीमा पर तैनात BSF जवानों ने उसे पकड़ लिया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी पहचान और पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में उसके बांग्लादेशी नागरिक होने की बात सामने आई। इसके बाद BSF ने उसे बांग्लादेशी सीमा की ओर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन वहां तैनात BGB जवानों ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

इस दौरान दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच बहस शुरू हो गई, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में BSF और BGB के जवान संबंधित व्यक्ति की नागरिकता और पहचान को लेकर एक-दूसरे से बहस करते नजर आ रहे हैं। कुछ समय के लिए सीमा क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि हालात को नियंत्रण में रखा गया और किसी प्रकार की हिंसक घटना की सूचना नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए व्यक्ति की पहचान 55 वर्षीय सती राजबंशी के रूप में हुई है। वह बांग्लादेश के राजशाही जिले के गुडागारी थाना क्षेत्र के चालना गांव का निवासी बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह हिंदू समुदाय से संबंध रखता है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि वह बांग्लादेशी नागरिक है और गैर-कानूनी तरीके से भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था।

दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने उसे पहले अपने क्षेत्र में हिरासत में लिया था और बाद में भारतीय सीमा की ओर धकेलने की कोशिश की। इसी वजह से उसकी नागरिकता और सीमा पार आने की परिस्थितियों को लेकर दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच मतभेद सामने आए हैं।

मामले को सुलझाने के लिए BSF और BGB के अधिकारियों के बीच फ्लैग मीटिंग भी आयोजित की गई। आमतौर पर ऐसी बैठकों के जरिए सीमा से जुड़े विवादों का समाधान निकाल लिया जाता है, लेकिन इस बार कोई सहमति नहीं बन सकी। परिणामस्वरूप वह व्यक्ति अब भी ‘नो मैन्स लैंड’ में फंसा हुआ है। यह वह क्षेत्र होता है जो दो देशों की सीमाओं के बीच स्थित होता है और जहां किसी एक देश का प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण नहीं माना जाता।

इस घटना ने सीमा प्रबंधन, अवैध घुसपैठ और कथित पुशबैक की नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ समय से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम और मेघालय में अवैध घुसपैठ को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। असम सरकार भी लगातार बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज करने की बात कहती रही है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि राज्य में अवैध घुसपैठ के खिलाफ अभियान को और सख्त बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए गैर-कानूनी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजा जाएगा।

फिलहाल मेघालय सीमा पर सामने आया यह मामला दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। जब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाता, तब तक सती राजबंशी का भविष्य अधर में लटका रहेगा। वहीं, इस घटना ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ, नागरिकता विवाद और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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