उत्तराखंडफीचर्ड

नशामुक्त देवभूमि: चंपावत पुलिस का तस्करों पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’, 30 लाख की अवैध संपत्ति फ्रीज

चंपावत/बनबसा: उत्तराखंड को नशे की गिरफ्त से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चलाए जा रहे ‘नशामुक्त देवभूमि 2025’ अभियान के तहत चंपावत पुलिस एक्शन के मोड में नजर आ रही है। जिले की पुलिस ने न केवल तस्करों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया है, बल्कि उनके द्वारा अपराध से अर्जित काले साम्राज्य को भी ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत नशा तस्करों की लगभग 30 लाख रुपये की अवैध चल-अचल संपत्तियों को फ्रीज करने की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।

संपत्तियों पर दिल्ली कोर्ट की मुहर

पुलिस अधीक्षक (SP) रेखा यादव के कुशल नेतृत्व में चंपावत पुलिस ने नशा कारोबारियों के वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह से चिन्हित कर लिया था। थाना बनबसा में दर्ज मेफेड्रोन (MD) ड्रग तस्करी के एक गंभीर मामले में पुलिस ने आरोपियों की संपत्तियों का ब्यौरा जुटाकर नई दिल्ली स्थित सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया था। न्यायालय ने तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के बैंक खातों में जमा भारी भरकम धनराशि और उनके द्वारा खरीदी गई लग्जरी कारों को फ्रीज व जब्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

5 किलो से अधिक MD ड्रग और बड़ा नेटवर्क

इस पूरे मामले की जड़ें 12 जुलाई 2025 को हुई उस बड़ी बरामदगी से जुड़ी हैं, जब पुलिस ने ईशा विश्वकर्मा नामक महिला के पास से करीब 5 किलो 688 ग्राम अवैध मेफेड्रोन (MD) ड्रग बरामद की थी। पुलिस की गहन तफ्तीश में यह सामने आया कि यह नेटवर्क केवल चंपावत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार पिथौरागढ़ के पंगरोली-सुआलेख क्षेत्र में संचालित नशीले पदार्थों के निर्माण और तस्करी से जुड़े थे। पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड से लेकर पेडलर्स तक को बेनकाब किया था।

लग्जरी कारों और खातों पर चला हंटर

नशे के इस अवैध कारोबार से आरोपियों ने कम समय में बेतहाशा संपत्ति अर्जित की थी। चंपावत पुलिस एक्शन के तहत अब उन संपत्तियों को सरकारी कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जब्त की गई संपत्तियों में आरोपियों की शान-ओ-शौकत का हिस्सा रही ‘एमजी हेक्टर’ और ‘स्विफ्ट डिजायर’ जैसी लग्जरी कारें शामिल हैं। इसके अलावा, कई बैंक खातों में जमा लाखों रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया है, ताकि अपराधी इस धन का उपयोग कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने या दोबारा अपराध करने में न कर सकें।

चिन्हित किए गए शातिर अपराधी

पुलिस जांच में इस नेटवर्क से जुड़े कई चेहरों का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में राहुल कुमार, कुणाल कोहली, विशाल नरेंद्र भंडारी, ओम जय गोबिंद गुप्ता, उपेंद्र सुरेंद्र यादव और अमर कुमार कोहली जैसे अभियुक्तों के नाम सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि ये सभी आरोपी एक संगठित सिंडिकेट की तरह काम कर रहे थे, जिसका मकसद युवाओं को नशे के दलदल में धकेलकर मुनाफा कमाना था।

नशा तस्करों में हड़कंप, एसपी की सख्त चेतावनी

चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने सख्त लहजे में कहा है कि जिले में नशे के सौदागरों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जो भी व्यक्ति नशे के कारोबार से एक भी रुपये की अवैध संपत्ति बनाएगा, उसे कानून के दायरे में लाकर कुर्क किया जाएगा। एसपी ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल तस्कर को पकड़ना नहीं, बल्कि उसके पूरे आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है ताकि वह दोबारा उठने की हिम्मत न कर सके।”

भविष्य की रणनीति और सामाजिक सुरक्षा

चंपावत पुलिस की इस प्रभावी कार्रवाई से सीमावर्ती क्षेत्रों और पूरे उत्तराखंड के नशा तस्करों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस अब अन्य पुराने मामलों की भी फाइलें खंगाल रही है, जिनमें अपराधियों ने नशे की कमाई से जमीनें या वाहन खरीदे हैं। पुलिस प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि देवभूमि को सुरक्षित रखा जा सके।

राष्ट्रीय स्तर पर सराही जा रही इस कार्रवाई ने यह संदेश दे दिया है कि उत्तराखंड पुलिस अब नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए उनके समूल नाश के लिए कटिबद्ध है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button