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असम चुनाव 2026: वोटिंग से पहले BJP को तगड़ा झटका, कैबिनेट मंत्री नंदिता गरलोसा कांग्रेस में शामिल; हाफलोंग से ठोकेंगी ताल

गुवाहाटी/हाफलोंग: असम विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में खेल और युवा कल्याण मंत्री रहीं नंदिता गरलोसा ने भगवा दल को अलविदा कहकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। गरलोसा का यह कदम भाजपा के लिए दीमा हसाओ क्षेत्र में एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस ने तत्काल प्रभाव से उन्हें हाफलोंग विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

टिकट कटने से नाराज थीं मंत्री गरलोसा

असम की राजनीति में इस दलबदल की मुख्य वजह टिकट वितरण को माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार हाफलोंग विधानसभा सीट से नंदिता गरलोसा का पत्ता काटकर रुपाली लांगथासा को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। सीटिंग विधायक और कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद टिकट न मिलने से गरलोसा के समर्थकों में भारी असंतोष था।

बताया जा रहा है कि पार्टी के इस फैसले के बाद गरलोसा ने कांग्रेस आलाकमान से संपर्क साधा। कांग्रेस ने भी बिना देरी किए उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई और दीमा हसाओ की ‘मजबूत आवाज’ करार देते हुए चुनावी मैदान में उतार दिया।

सीएम सरमा की ‘डैमेज कंट्रोल’ कोशिशें रही नाकाम

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को इस बगावत का आभास पहले ही हो गया था। रविवार को सीएम सरमा खुद हाफलोंग स्थित गरलोसा के आवास पर पहुंचे थे। बंद कमरे में हुई इस लंबी बैठक का उद्देश्य गरलोसा को पार्टी में बनाए रखना और डैमेज कंट्रोल करना था। हालांकि, बैठक के बाद दोनों ही नेताओं ने मीडिया से दूरी बनाए रखी, जिससे साफ संकेत मिल रहे थे कि बात नहीं बन पाई है। अंततः, गरलोसा ने कांग्रेस की विचारधारा पर भरोसा जताया और भाजपा से अपना नाता तोड़ लिया।

कांग्रेस का बड़ा दांव: निर्मल लंगथासा ने छोड़ी अपनी सीट

असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने इस बार गजब की रणनीतिक परिपक्वता दिखाई है। हाफलोंग सीट से पहले पार्टी ने प्रदेश महासचिव निर्मल लंगथासा को मैदान में उतारने का मन बनाया था। लेकिन नंदिता गरलोसा के आने के बाद, निर्मल लंगथासा ने बड़े राजनीतिक हित को देखते हुए अपनी दावेदारी स्वेच्छा से वापस ले ली और गरलोसा के नाम पर अपनी सहमति दे दी।

कांग्रेस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा:

“हमें यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि नंदिता गरलोसा अब कांग्रेस परिवार का हिस्सा हैं। पिछले 5 वर्षों से उन्होंने दीमा हसाओ की जनता के लिए संघर्ष किया है। वह अपने सिद्धांतों के लिए हमेशा अडिग रही हैं और भाजपा में उन्हें सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी।”

कांग्रेस का भाजपा पर तीखा हमला

नंदिता गरलोसा के शामिल होने के साथ ही कांग्रेस ने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री सरमा पर तीखे आरोप जड़े हैं। कांग्रेस की मीडिया टीम ने आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार आदिवासियों के हितों की अनदेखी कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री केवल बड़े कॉर्पोरेट घरानों को आदिवासियों की जमीनें बेचने में रुचि रखते हैं, और जो मंत्री या नेता इसका विरोध करता है, उसे दरकिनार कर दिया जाता है।

हाफलोंग का समीकरण और चुनावी कार्यक्रम

हाफलोंग सीट असम के दीमा हसाओ जिले की एकमात्र विधानसभा सीट है, जो जनजातीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब इस सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है:

  • कांग्रेस: नंदिता गरलोसा (सीटिंग विधायक और पूर्व मंत्री)

  • भाजपा: रुपाली लांगथासा

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव आयोग ने पहले ही तारीखों का ऐलान कर दिया है। राज्य में 9 अप्रैल, 2026 को मतदान होगा, जबकि चुनावी नतीजों की घोषणा 4 मई, 2026 को की जाएगी।

क्या होगा भाजपा पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि नंदिता गरलोसा का जाना केवल एक सीट का मामला नहीं है, बल्कि यह पहाड़ी जिलों में भाजपा के जनजातीय आधार को प्रभावित कर सकता है। खेल और युवा कल्याण मंत्री के रूप में उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की नई प्रत्याशी रुपाली लांगथासा इस ‘बगावत’ के शोर के बीच अपनी जमीन कितनी मजबूत रख पाती हैं।

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