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मिडिल ईस्ट की आहट के बीच PM मोदी की इमरजेंसी मीटिंग; साढ़े तीन घंटे चला मंथन, ‘मिशन ऊर्जा सुरक्षा’ पर बड़ी रणनीति तैयार

The Hill India News
Last updated: March 22, 2026 2:53 pm
The Hill India News
Published: March 22, 2026
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Photo: ANI
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। युद्ध के इस वैश्विक संकट और भारत पर इसके संभावित आर्थिक असर को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई। प्रधानमंत्री आवास (7 LKM) पर करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस हाई-लेवल मीटिंग में देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति (Energy Security) को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया।

Contents
13 दिग्गज मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ ‘वॉर रूम’ रणनीतिमुख्य फोकस: ईंधन, बिजली और फर्टिलाइजर की सप्लाई चेन‘राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा’: पीएम मोदी का कड़ा संदेशहोर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और भारत की चिंतावैश्विक नेताओं के साथ पीएम मोदी की ‘टेलीफोनिक डिप्लोमेसी’क्या होगा आम आदमी पर असर?

इस बैठक का मुख्य एजेंडा युद्ध के कारण बाधित हो रही ग्लोबल सप्लाई चेन के बीच भारत में कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना था।

13 दिग्गज मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ ‘वॉर रूम’ रणनीति

प्रधानमंत्री की इस मैराथन बैठक में सरकार के सबसे कद्दावर चेहरे मौजूद रहे। बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 13 कैबिनेट मंत्री शामिल थे। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थितियों पर अपनी रिपोर्ट साझा की।

इनके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पीयूष गोयल, प्रह्लाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित तैयारियों का ब्यौरा दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और पीएम के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी इस रणनीतिक चर्चा का हिस्सा रहे।

#WATCH | दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के बदलते हालात को देखते हुए पेट्रोलियम, क्रूड, गैस, पावर और फर्टिलाइज़र सेक्टर से जुड़ी स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। pic.twitter.com/h0Fu9WW7hf

— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 22, 2026

मुख्य फोकस: ईंधन, बिजली और फर्टिलाइजर की सप्लाई चेन

युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति में बाधा आने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर है कि देश में ईंधन और बिजली की कमी न हो।

  • ऊर्जा सुरक्षा: बैठक में पेट्रोलियम मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं कि वे तेल आयात के वैकल्पिक रास्तों और स्रोतों पर काम करें।

  • फर्टिलाइजर आपूर्ति: खेती का सीजन देखते हुए खाद (Fertilizer) की कमी न हो, इसके लिए बफर स्टॉक की समीक्षा की गई।

  • घरेलू बाजार पर लगाम: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का बोझ आम जनता की जेब पर कम से कम पड़े, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

‘राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा’: पीएम मोदी का कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी 12 मार्च को आगाह किया था कि पश्चिम एशिया के युद्ध ने विश्वव्यापी ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। उन्होंने इसे ‘राष्ट्रीय चरित्र की गंभीर परीक्षा’ करार देते हुए शांति, धैर्य और जनता में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया था। पीएम ने बैठक में दोहराया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं (International Supply Chain) में आए व्यवधानों को कम करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और भारत की चिंता

युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हुई, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है।

महत्वपूर्ण तथ्य: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह प्रमुख समुद्री मार्ग है जिसके जरिए वैश्विक ऊर्जा का करीब 20 प्रतिशत व्यापार होता है।

ईरान ने इस मार्ग पर आवाजाही बाधित कर दी है और बहुत कम जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है, ऐसे में यह गतिरोध भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

वैश्विक नेताओं के साथ पीएम मोदी की ‘टेलीफोनिक डिप्लोमेसी’

संघर्ष की शुरुआत के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सक्रिय कूटनीति का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, यूएई, कतर, फ्रांस और जॉर्डन समेत कई देशों के राष्ट्रप्रमुखों से फोन पर बात की है। भारत का प्रयास है कि इस संघर्ष को जल्द से जल्द रोका जाए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक नुकसान न हो।

क्या होगा आम आदमी पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद रहता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ महंगाई दर में भी उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि, आज की इस हाई-लेवल मीटिंग के बाद सरकार ने यह भरोसा देने की कोशिश की है कि देश के पास पर्याप्त रिजर्व है और वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

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TAGGED:Amit Shahcrude oil supplyIndia energy securityMiddle East war crisisPM Modi emergency meetingPM residence meetingS JaishankarStrait of Hormuz dispute
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