
तेल अवीव/बेरूत: मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध की लपटें अब और तेज हो गई हैं। इज़राइल और ईरान समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। इज़रायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि दक्षिणी लेबनान में जारी सैन्य अभियान के दौरान अब तक 570 हिजबुल्लाह आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है।
इज़राइल की इस कार्रवाई ने हिजबुल्लाह की कमर तोड़ दी है। आईडीएफ ने न केवल आतंकियों को ढेर किया है, बल्कि उनके रणनीतिक ढांचे को भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, इज़रायली सेना ने अब तक 2,000 से अधिक आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं, जिसमें हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर और हथियार डिपो शामिल हैं।
120 कमांड पोस्ट और 100 हथियार भंडार ध्वस्त
इज़रायली वायु सेना और थल सेना के संयुक्त अभियान ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के गढ़ों को मलबे में तब्दील कर दिया है। आईडीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सैन्य अभियान में अब तक 120 कमांड पोस्टों को निशाना बनाकर नष्ट किया गया है। ये वही केंद्र थे जहाँ से हिजबुल्लाह इज़राइल के उत्तरी क्षेत्रों पर रॉकेट हमलों की योजना बनाता था।
इसके अतिरिक्त, इज़राइल ने हिजबुल्लाह के 100 से अधिक हथियार भंडारण केंद्रों (Weapon Storage Centers) को भी उड़ा दिया है। इन केंद्रों में बड़ी मात्रा में ईरान निर्मित मिसाइलें, ड्रोन और विस्फोटक जमा किए गए थे। आईडीएफ के प्रवक्ता ने बताया कि दक्षिणी लेबनान की पहाड़ियों और रिहायशी इलाकों के नीचे छिपे हिजबुल्लाह के इन ‘किलिंग जोन’ को नष्ट करना उत्तरी इज़राइल की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
130 मिसाइल लॉन्चर नष्ट: हिजबुल्लाह की मारक क्षमता पर प्रहार
हिजबुल्लाह द्वारा इज़राइल पर किए जा रहे रॉकेट हमलों को रोकने के लिए आईडीएफ ने एक विशेष रणनीति के तहत काम किया है। अब तक की कार्रवाई में 130 से ज्यादा मिसाइल लॉन्चरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। इनमें से कई लॉन्चरों को मोबाइल ट्रकों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास तैनात किया गया था।
इज़राइल का यह ‘लक्षित जमीनी अभियान’ (Targeted Ground Operation) 16 मार्च से और अधिक आक्रामक हो गया है। इसका मुख्य उद्देश्य एक “फॉरवर्ड डिफेंस एरिया” स्थापित करना है, ताकि हिजबुल्लाह के लड़ाकों को इज़रायली सीमा से इतना दूर धकेला जा सके कि वे उत्तरी इज़राइल के निवासियों पर सीधी गोलीबारी या छोटे रॉकेटों से हमला न कर सकें।
ईरान का समर्थन और अयातुल्ला के नाम पर बदला
यह युद्ध अब केवल इज़राइल और लेबनान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे ईरान की छाया साफ दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हिजबुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में और तेहरान के “आतंकी शासन” के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए इज़राइल पर हमले तेज किए हैं।
इज़रायली सेना का कहना है कि हिजबुल्लाह ने लेबनान के हितों के बजाय ईरानी एजेंडे को प्राथमिकता दी है। आईडीएफ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो कोई भी इज़रायली नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालेगा, उसे भारी कीमत चुकानी होगी। इज़राइल का यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि उत्तरी सीमा पर विस्थापित हुए हज़ारों इज़रायली नागरिक सुरक्षित अपने घरों को वापस नहीं लौट जाते।
‘ऑपरेशन नॉर्दर्न शील्ड’: जमीनी छापेमारी और हवाई हमले
दक्षिणी लेबनान का भूगोल हिजबुल्लाह को छिपकर वार करने की अनुमति देता है, लेकिन इज़राइल की उन्नत तकनीक और खुफिया तंत्र (Intelligence) ने उनकी सुरंगों और बंकरों का पता लगा लिया है। आईडीएफ सैनिक न केवल हवाई हमले कर रहे हैं, बल्कि चुनौतीपूर्ण जमीनी छापेमारी (Ground Raids) के जरिए हिजबुल्लाह के ‘लॉजिस्टिक्स नेटवर्क’ को भी काट रहे हैं।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इज़राइल की इस कार्रवाई ने हिजबुल्लाह को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। 570 आतंकवादियों का मारा जाना किसी भी संगठन के लिए एक बड़ा मानवीय और रणनीतिक नुकसान है। विशेष रूप से, अनुभवी कमांडरों की मौत ने हिजबुल्लाह के भीतर संचार और नेतृत्व के संकट को जन्म दिया है।
वैश्विक चिंता और सुरक्षा का सवाल
इज़राइल-हिजबुल्लाह युद्ध के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम की अपील कर रहा है, लेकिन इज़राइल का रुख साफ है—जब तक हिजबुल्लाह का खतरा सीमा से पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, सैन्य कार्रवाई नहीं रुकेगी।
इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के अनुसार, यह लड़ाई केवल सीमा की रक्षा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र से ईरानी प्रभाव वाले आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने का एक बड़ा मिशन है।



