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डिजिटल होगा उत्तराखंड निर्वाचन: SIR अभियान में BLO का हाथ थामेंगे ‘आईटी वॉलिंटियर्स’, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बनाया खाका

देहरादून (सचिवालय): उत्तराखंड में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी, सटीक और तकनीक-युक्त बनाने की दिशा में राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। आगामी अप्रैल माह में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम को लेकर राज्य प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इस बार का अभियान न केवल प्रशासनिक चुस्ती के लिए जाना जाएगा, बल्कि इसमें ‘तकनीकी युवाओं’ की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के हर बूथ पर अब बीएलओ (Booth Level Officers) के साथ आईटी वॉलिंटियर्स की तैनाती की जाएगी। यह कदम डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया को तेज करने और मतदाता सूचियों में त्रुटियों को शून्य करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

आईटी वॉलिंटियर्स: तकनीक और जमीनी कार्य का संगम

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में नोडल अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में डेटा की शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा गया है कि कागजी प्रपत्रों से डिजिटल डेटाबेस तैयार करने में समय और मानवीय त्रुटियां बाधक बनती हैं। इस बाधा को दूर करने के लिए, प्रदेश के सभी बूथों पर तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं (IT Volunteers) को तैनात किया जा रहा है।

इन वॉलिंटियर्स की मुख्य भूमिकाएं:

  1. प्रपत्रों का डिजिटलाइजेशन: गणना प्रपत्रों को तत्काल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना।

  2. वितरण एवं संकलन: प्रपत्रों के वितरण और उनके वापस संकलन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना।

  3. तकनीकी सहायता: बीएलओ को मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन पोर्टल के संचालन में मदद करना।

डॉ. पुरुषोत्तम ने अपर सचिव ग्राम्य विकास और निदेशक शहरी विकास विभाग को निर्देश दिए कि इस अभियान के लिए ऐसे युवाओं का चयन जल्द से जल्द किया जाए जो तकनीकी रूप से निपुण हों और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को समझते हों।

मैपिंग और समन्वय पर जोर: मंडल आयुक्तों को निर्देश

बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचन प्रक्रिया की सफलता के लिए ‘मैपिंग’ को आधारभूत आवश्यकता बताया। उन्होंने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के आयुक्तों को निर्देश दिए कि बूथों की मैपिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। सटीक मैपिंग से न केवल मतदाताओं को अपना बूथ खोजने में आसानी होगी, बल्कि निर्वाचन आयोग को भी संसाधनों के प्रबंधन में सहूलियत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि “विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)” एक समयबद्ध प्रक्रिया है, और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए ग्राम्य विकास, शहरी विकास और आईटी विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना अनिवार्य है।

डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूती

उत्तराखंड में आईटी वॉलिंटियर्स की तैनाती का यह निर्णय केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप है। निर्वाचन आयोग का लक्ष्य है कि मतदाता पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस या कम से कम कागजी कार्रवाई तक सीमित किया जाए। इससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा होगी, बल्कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या कटवाने की प्रक्रिया में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।

बैठक में उपस्थित आईटीडीए (ITDA) के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए कि वे वॉलिंटियर्स के लिए आवश्यक तकनीकी बुनियादी ढांचा और सहायता तंत्र तैयार रखें। युवाओं को इस अभियान से जोड़कर सरकार उन्हें गवर्नेंस की बारीकियां सीखने का अवसर भी प्रदान कर रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति और भावी रणनीति

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जो इस अभियान के विभिन्न पहलुओं की निगरानी करेंगे। बैठक में निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चन्द्र, अपर सचिव झरना कमठान, निदेशक महिला बाल विकास बीएल राणा, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, निदेशक एसआईसी मनीष जुगरान, अपर निदेशक आईटीडीए तीरथ पाल, और उप निदेशक सूचना रवि बिजारनियां सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।

सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मार्च के अंत तक सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि अप्रैल से शुरू होने वाले इस विशेष अभियान में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और सटीकता ही इस पुनरीक्षण अभियान की सफलता का पैमाना होगी।


सुदृढ़ लोकतंत्र की ओर एक और कदम

उत्तराखंड निर्वाचन आयोग द्वारा आईटी वॉलिंटियर्स के माध्यम से किया जा रहा यह प्रयोग आने वाले चुनावों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। युवाओं की तकनीकी शक्ति और बीएलओ के जमीनी अनुभव का यह मेल न केवल मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाएगा, बल्कि आम जनता के लिए निर्वाचन सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाएगा।

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