तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। इसी कड़ी में कांग्रेस आलाकमान ने अपने उम्मीदवारों की बहुप्रतीक्षित दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 37 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है। हालांकि, इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला फैसला पार्टी के दिग्गज नेता और सांसद के. सुधाकरन को लेकर लिया गया है। कांग्रेस ने सुधाकरन की दावेदारी को दरकिनार करते हुए कन्नूर सीट से टी.ओ. मोहनन को चुनावी मैदान में उतारा है।
टिकटों का गणित: अब तक 92 उम्मीदवारों के नाम तय
कांग्रेस ने केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए अपनी चुनावी मशीनरी को तेज कर दिया है। 17 मार्च को जारी पहली सूची में पार्टी ने 55 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। अब दूसरी सूची में 37 और नाम जुड़ने के साथ ही कांग्रेस ने अब तक कुल 92 सीटों पर अपने पत्ते खोल दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव (2021) में भी कांग्रेस 93 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जबकि शेष सीटें सहयोगियों को दी गई थीं।
के. सुधाकरन: जिद, बगावत और फिर किनारे
केरल कांग्रेस के सबसे कद्दावर और फायरब्रांड नेताओं में शुमार कुंभकुडी सुधाकरन (के. सुधाकरन) को टिकट न मिलना इस समय राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वर्तमान में कन्नूर से सांसद और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के पूर्व अध्यक्ष सुधाकरन अपनी पारंपरिक सीट कन्नूर से विधानसभा चुनाव लड़ने की जिद पर अड़े थे।
सूत्रों के मुताबिक, सुधाकरन ने आलाकमान को निर्दलीय चुनाव लड़ने तक की चेतावनी दी थी। हालांकि, बाद में उन्होंने नरम रुख अपनाते हुए कहा था कि “पार्टी का फैसला सर्वोपरि होगा।” अंततः कांग्रेस नेतृत्व ने पीढ़ीगत बदलाव या रणनीतिक कारणों से उनकी मांग को ठुकरा दिया और उनकी जगह टी.ओ. मोहनन पर भरोसा जताया है।

कौन हैं के. सुधाकरन? सियासी सफर पर एक नजर
के. सुधाकरन केरल की राजनीति का एक ऐसा चेहरा हैं जिनकी कन्नूर और उत्तर केरल के क्षेत्रों में गहरी पैठ मानी जाती है।
-
सांसदीय अनुभव: वे 2009, 2019 और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में कन्नूर सीट से लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं।
-
विधायक और मंत्री: वे चार बार विधानसभा के सदस्य रहे हैं और केरल सरकार में वन एवं खेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो संभाल चुके हैं।
-
संगठनात्मक शक्ति: केपीसीसी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है।
प्रमुख चेहरे और सीटें: नेमोम से सबरीनाधन को मौका
दूसरी सूची में केवल कन्नूर ही नहीं, बल्कि नेमोम सीट पर भी सबकी नजरें टिकी थीं। कांग्रेस ने यहाँ से सबरीनाधन को उम्मीदवार बनाया है। नेमोम को केरल की ‘वाराणसी’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ मुकाबला हमेशा त्रिकोणीय और दिलचस्प होता है। पार्टी ने इस बार युवाओं और अनुभवी चेहरों के मिश्रण को तरजीह दी है ताकि सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का लाभ उठाया जा सके।
चुनावी कार्यक्रम: 9 अप्रैल को फैसला, 4 मई को परिणाम
केरल विधानसभा चुनाव के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। राज्य की सभी सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। मतदाताओं का फैसला ईवीएम में कैद होने के बाद 4 मई 2026 को मतगणना होगी। कांग्रेस के लिए यह चुनाव ‘करो या मरो’ की स्थिति जैसा है, क्योंकि 2021 के चुनाव में पार्टी महज 21 सीटें ही जीत पाई थी।
कांग्रेस की रणनीति: जोखिम या मास्टरस्ट्रोक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुधाकरन जैसे दिग्गज को टिकट न देना कांग्रेस के लिए “दोधारी तलवार” साबित हो सकता है। एक तरफ जहाँ पार्टी नए चेहरों को आगे लाकर कैडर में नया जोश भरना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ सुधाकरन के समर्थकों की नाराजगी कन्नूर बेल्ट में कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ सकती है।
| मुख्य विवरण | जानकारी |
| कुल विधानसभा सीटें | 140 |
| कांग्रेस की कुल घोषित सीटें | 92 |
| मतदान की तारीख | 9 अप्रैल 2026 |
| परिणाम की तारीख | 4 मई 2026 |
| कन्नूर से उम्मीदवार | टी.ओ. मोहनन |
| नेमोम से उम्मीदवार | सबरीनाधन |
केरल में एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच हमेशा कड़ा मुकाबला रहता है। कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि वह केवल ‘जिताऊ’ (Winnability) और अनुशासित उम्मीदवारों पर ही दांव लगाएगी। अब देखना यह होगा कि के. सुधाकरन की गैर-मौजूदगी में कांग्रेस उत्तर केरल में अपनी साख बचा पाती है या नहीं।



