
देहरादून/चमोली: देवभूमि उत्तराखंड में मौसम के मिजाज ने एक बार फिर करवट ले ली है। मार्च के महीने में, जहाँ आमतौर पर चटक धूप और गर्मी का अहसास होने लगता है, वहीं इस बार कुदरत के अलग ही रंग देखने को मिल रहे हैं। राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गुरुवार सुबह से ही जबरदस्त बर्फबारी (Snowfall) का दौर जारी है, जबकि मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को प्रभावित किया है। इस बेमौसम बदलाव ने राज्य में एक बार फिर कड़ाके की ठंड की वापसी करा दी है।
मार्च में दूसरी बार बिछी सफेद चादर: चारधाम में बढ़ी मुश्किलें
यह मार्च के महीने में दूसरी बार है जब उत्तराखंड के पहाड़ों ने सफेद चांदी की चादर ओढ़ ली है। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। इसके अलावा पिथौरागढ़ के मुनस्यारी, चमोली के औली और उत्तरकाशी के हर्षिल जैसे पर्यटक स्थलों पर भी कुदरत मेहरबान दिखी।
हालांकि, इस बर्फबारी का सीधा असर आगामी चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) की तैयारियों पर पड़ता दिख रहा है। यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही समय शेष है, ऐसे में धामों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने, रास्तों से बर्फ हटाने और पुनर्निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केदारनाथ धाम में निर्माण कार्यों की गति बर्फबारी के कारण धीमी पड़ गई है।
मैदानों में ओलावृष्टि और बारिश: फसलों को भारी नुकसान
पहाड़ों पर जहाँ बर्फ गिर रही है, वहीं देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधियों और गरज-चमक के साथ बारिश हुई है। कई क्षेत्रों से ओलावृष्टि (Hailstorm) की खबरें भी सामने आई हैं।
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कृषि पर मार: ओलावृष्टि ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। गेहूं की तैयार फसल और सरसों को काफी नुकसान पहुँचा है।
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बागवानी को क्षति: उत्तरकाशी और चमोली के सेब बागानों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फलों के बौर (फूल) झड़ गए हैं, जिससे बागवानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है।
देहरादून समेत कई शहरों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आलम यह है कि लोगों को संदूक में रखे गर्म कपड़े, जैकेट और स्वेटर फिर से निकालने पड़े हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी: अगले 48 घंटे भारी
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने अगले 48 घंटों के लिए राज्य के अधिकांश जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के निदेशक डॉ. सी.एस. तोमर के अनुसार, राज्य में वर्तमान में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय है।
विभाग द्वारा जारी प्रमुख चेतावनियाँ:
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ऑरेंज अलर्ट: उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर भारी बर्फबारी की संभावना।
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तेज हवाएं: मैदानी इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झक्कड़ (Stormy Winds) चलने का अनुमान।
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तापमान में गिरावट: अगले दो दिनों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है।
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ओलावृष्टि और बिजली: टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और हरिद्वार में बिजली गिरने और ओलावृष्टि को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।
विशेषज्ञों की राय: क्यों बदल रहा है मौसम?
डॉ. सी.एस. तोमर ने बताया कि 19 और 20 मार्च को प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अपने चरम पर रहेगा। इसकी वजह से हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात होगा। उन्होंने कहा, “21 मार्च के बाद विक्षोभ धीरे-धीरे कमजोर पड़ेगा और मौसम साफ होने की उम्मीद है। हालांकि, तब तक पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की संभावना और रास्तों के बंद होने के खतरे को देखते हुए यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।”
पर्यटकों के लिए एडवाइजरी
प्रशासन ने बर्फबारी वाले इलाकों में जा रहे पर्यटकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। फिसलन भरे रास्तों और कम दृश्यता (Visibility) के कारण वाहन चलाने में सावधानी बरतने को कहा गया है। साथ ही, ऊंचे इलाकों में ट्रेकिंग पर जाने वाले दलों को फिलहाल अपनी योजना टालने की हिदायत दी गई है।
बदलती जलवायु का संकेत?
मार्च के महीने में बार-बार हो रही यह बर्फबारी जलवायु परिवर्तन के संकेतों की ओर भी इशारा करती है। जहाँ एक तरफ सैलानी इस नजारे का लुत्फ उठा रहे हैं, वहीं स्थानीय निवासी और किसान इस अनिश्चितता से परेशान हैं। फिलहाल, पूरा उत्तराखंड कड़ाके की ठंड की चपेट में है और आने वाले दो दिन राज्य के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकते हैं।



