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उत्तराखंड के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: ‘घेर-बाड़’ योजना को मिली केंद्र की मदत, CM ने केंद्रीय कृषि मंत्री से बात कर बताई थी ये समस्या

The Hill India News
Last updated: March 13, 2026 3:14 pm
The Hill India News
Published: March 13, 2026
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भराड़ीसैंण (गैरसैंण): उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आतंक से जूझ रहे किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सक्रियता और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुए संवाद के बाद, राज्य की महत्वाकांक्षी ‘घेर-बाड़ योजना’ (Gher-Baar Yojana) के लिए केंद्रीय सहायता फिर से बहाल हो गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस योजना के सुचारू संचालन के लिए 25 करोड़ रुपये की प्रारंभिक वित्तीय सहायता मंजूर कर दी है।

Contents
तीन साल का सूखा खत्म: जिला योजना से चल रहा था कामसदन में कृषि मंत्री की बड़ी घोषणा: 25 करोड़ की स्वीकृतिआंकड़ों की जुबानी: अब तक की प्रगतिकिसानों की आय और पलायन पर पड़ेगा असरडबल इंजन सरकार का समन्वय

तीन साल का सूखा खत्म: जिला योजना से चल रहा था काम

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी चुनौती है। जंगली सूअर, बंदर और हाथियों द्वारा किसानों की मेहनत पर पानी फेरने की घटनाएं आम हैं। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने सोलर फेंसिंग और घेर-बाड़ की योजना शुरू की थी। तीन वर्ष पूर्व तक इस योजना को ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ के तहत केंद्र से फंडिंग मिल रही थी, लेकिन तकनीकी कारणों से यह मदद बंद हो गई थी।

जब केंद्र से सहायता मिलनी बंद हुई, तो किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने इसे रोकने के बजाय जिला योजना (District Plan) के बजट से चलाने का निर्णय लिया। हालांकि, सीमित संसाधनों के कारण इसे बड़े स्तर पर लागू करना चुनौतीपूर्ण था, जिसके लिए सीएम लगातार केंद्र के संपर्क में थे।


सदन में कृषि मंत्री की बड़ी घोषणा: 25 करोड़ की स्वीकृति

भराड़ीसैंण में चल रहे विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सदन को इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों गौचर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

गणेश जोशी ने सदन में कहा:

“मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और केंद्रीय नेतृत्व के सहयोग का परिणाम है कि हमें कृषि मंत्रालय का आधिकारिक पत्र प्राप्त हो गया है। 25 करोड़ रुपये की यह राशि राज्य में कृषि सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जाएगी। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने अपने बजट में भी इस वर्ष 10 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया है।”


आंकड़ों की जुबानी: अब तक की प्रगति

राज्य सरकार ने सदन में पिछले तीन वर्षों का लेखा-जोखा पेश करते हुए बताया कि केंद्र की मदद के बिना भी राज्य ने अपने स्तर पर सराहनीय कार्य किया है:

  • घेराबंदी का दायरा: पिछले 3 वर्षों में कुल 2841 हेक्टेयर कृषि भूमि की घेर-बाड़ (Solar/Chain-link fencing) की गई।

  • लाभान्वित किसान: इस योजना से राज्य के 44 हजार 429 किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए हैं।

  • बजट प्रावधान: वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में भी योजना के विस्तार के लिए विशेष धनराशि आवंटित की गई है।


किसानों की आय और पलायन पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि घेर-बाड़ योजना के लिए केंद्रीय मदद मिलना राज्य में पलायन (Migration) रोकने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा। पहाड़ों में खेती छोड़ने का एक मुख्य कारण जंगली जानवरों द्वारा फसल की बर्बादी है। जब किसानों की फसल सुरक्षित रहेगी, तो उनकी आय में वृद्धि होगी और वे दोबारा बंजर हो रही भूमि पर कृषि के लिए प्रोत्साहित होंगे।

डबल इंजन सरकार का समन्वय

यह घटनाक्रम केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण पेश करता है। मुख्यमंत्री धामी की पैरवी और शिवराज सिंह चौहान की त्वरित प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की कृषि समस्याओं पर दिल्ली की पैनी नजर है। 25 करोड़ की यह किस्त केवल शुरुआत मानी जा रही है, आने वाले समय में योजना के तहत नई तकनीक और आधुनिक फेंसिंग प्रणालियों को भी शामिल किया जा सकता है।

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