
भराड़ीसैंण/देहरादून: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में चल रहे विधानसभा सत्र के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन और प्रशासन को लेकर दो टूक संदेश दे दिया है। एक ओर जहां उन्होंने भ्रष्टाचार और अवैध खनन के मामले में इकबालपुर पुलिस चौकी (Iqbalpur Police Chowki) के पूरे स्टाफ को निलंबित कर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को चरितार्थ किया है, वहीं दूसरी ओर सदन में राज्य के मजबूत वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) की गूंज सुनाई दी है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट में उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों की श्रेणी में देश का दूसरा सबसे बेहतर वित्तीय प्रबंधन वाला राज्य घोषित किया गया है।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: इकबालपुर चौकी का पूरा स्टाफ सस्पेंड
उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री धामी का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। हरिद्वार जनपद की इकबालपुर पुलिस चौकी में तैनात उपनिरीक्षक (चौकी प्रभारी) सहित छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, इकबालपुर क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस ऑडियो में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) हरिद्वार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरी चौकी को ही लाइन हाजिर कर दिया। निलंबित होने वालों में शामिल हैं:
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नवीन सिंह चौहान (चौकी प्रभारी, उपनिरीक्षक)
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हेड कांस्टेबल विरेन्द्र शर्मा और हरेन्द्र
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कांस्टेबल विपिन कुमार, देवेश सिंह और प्रदीप।
मामले की जांच एसपी देहात (SP Rural) को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वित्तीय प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का डंका
भ्रष्टाचार पर प्रहार के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने सदन में उत्तराखंड की आर्थिक प्रगति का ब्यौरा भी पेश किया। भराड़ीसैंण विधानसभा में बोलते हुए सीएम धामी ने कहा कि राज्य ने राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) और सुशासन में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
नीति आयोग की रिपोर्ट में बड़ी उपलब्धि नीति आयोग द्वारा प्रकाशित फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 (रिपोर्ट 2023-24) में उत्तराखंड को उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। यह रिपोर्ट राज्य की राजस्व वृद्धि, व्यय की गुणवत्ता और प्रभावी ऋण प्रबंधन पर मुहर लगाती है।
मुख्यमंत्री ने सदन को निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं से अवगत कराया:
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अरुण जेटली फाइनेंशियल मैनेजमेंट रिपोर्ट: इस रिपोर्ट में भी उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश के बाद दूसरा स्थान मिला है।
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FRBM मानकों का पालन: CAG (महालेखाकार) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने Fiscal Responsibility and Budget Management Act के सभी मानकों को पूरा किया है।
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राजस्व अधिशेष (Revenue Surplus): उत्तराखंड ने न केवल अपने घाटे को नियंत्रित किया है, बल्कि राजस्व अधिशेष की स्थिति को भी बरकरार रखा है।
सुशासन और पारदर्शिता: आत्मनिर्भर उत्तराखंड का संकल्प
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है। उन्होंने कहा कि राजस्व में बढ़ोतरी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह पारदर्शी नीतियों और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परिणाम है। सरकार अब इस वित्तीय मजबूती का उपयोग बुनियादी ढांचे (Infrastructure), सामाजिक कल्याण और रोजगार सृजन में संतुलित निवेश के लिए कर रही है।
“कानून व्यवस्था बनाए रखना जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी है, यदि वही भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हमारी सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर अडिग है।” – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
प्रशासन को सख्त संदेश
एक ही दिन में दो बड़ी घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि धामी सरकार विकास के लिए जितनी नरम है, अनुशासनहीनता के लिए उतनी ही कठोर। जहां एक तरफ वित्तीय मोर्चे पर राज्य की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस महकमे में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने अन्य अधिकारियों के लिए भी ‘चेतावनी’ की लकीर खींच दी है। आने वाले समय में अवैध खनन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह अभियान और तेज होने की संभावना है।



