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आईआईटी मद्रास ने विकसित की देश की पहली स्वदेशी पोत यातायात प्रबंधन प्रणाली, बंदरगाह सुरक्षा और दक्षता में आएगी क्रांतिकारी बढ़त

नई दिल्ली, 26 नवंबर: भारत ने समुद्री अवसंरचना और तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने देश की पहली स्वदेशी पोत यातायात प्रबंधन प्रणाली (Vessel Traffic Management System — VTMS) विकसित कर बंदरगाह संचालन में नई संभावनाओं का द्वार खोल दिया है। यह प्रणाली अब देश के विभिन्न प्रमुख बंदरगाहों में उपयोग की जा रही है, जिससे आयात-निर्यात गतिविधियों, नौवहन सुरक्षा और पोर्ट मैनेजमेंट में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है। खास बात यह है कि यह प्रणाली पूरी तरह भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा स्थानीय परिस्थितियों, चुनौतियों और बंदरगाहों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है।


बंदरगाह मंत्रालय की जरूरतों पर आधारित तकनीक

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने आधुनिक, सुरक्षित तथा डिजिटल भारत के अनुरूप उन्नत पोत यातायात प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता व्यक्त की थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर आईआईटी मद्रास स्थित राष्ट्रीय बंदरगाह, जलमार्ग और तट प्रौद्योगिकी केंद्र (NTCPWC) ने इस स्वदेशी प्रणाली का विकास किया।

यह केंद्र वर्षों से समुद्री इंजीनियरिंग, तटीय ढांचे, नौवहन तकनीक और पोर्ट मॉडर्नाइजेशन पर काम करता आ रहा है। मंत्रालय द्वारा बताए गए तकनीकी मानकों, फीचर्स और सुरक्षा प्रोटोकॉल के आधार पर विशेषज्ञ टीम ने इस सिस्टम को तैयार किया।


क्या है पोत यातायात प्रबंधन प्रणाली?

पोत यातायात प्रबंधन प्रणाली (VTMS) समुद्र में चलने वाले जहाजों की गतिविधियों की निगरानी करने, उन्हें सुरक्षित मार्गदर्शन देने और बंदरगाहों में जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित रूप से नियंत्रित करने वाली एक उन्नत तकनीकी प्रणाली है।

इसका उपयोग निम्न महत्वपूर्ण कार्यों के लिए होता है—

  • जहाजों की लोकेशन ट्रैकिंग
  • टकराव की संभावनाओं की रोकथाम
  • मार्ग निर्देश देना
  • मौसम संबंधी सूचना उपलब्ध कराना
  • बंदरगाह के अंदर और समुद्री क्षेत्र में नौवहन नियंत्रण
  • आपातकालीन हालात में रियल-टाइम सहायता

अब तक यह तकनीक भारत में मुख्यतः विदेशी कंपनियों द्वारा विकसित उत्पादों पर निर्भर थी। लेकिन इस स्वदेशी VTMS के आने से देश का आयात-निर्भरता खत्म होने के साथ-साथ लागत में भारी कमी आएगी।


कैसे बदलेगी यह तकनीक भारत के बंदरगाहों की तस्वीर?

1. सुरक्षा में बड़ा सुधार

बंदरगाहों में ट्रैफिक बढ़ने के साथ टकराव, भटकाव या आपात स्थितियों की आशंका भी बढ़ जाती है। नई VTMS रियल-टाइम डेटा, हाई-रिजॉल्यूशन रडार, AIS सिस्टम, CCTV इंटीग्रेशन और उन्नत अल्गोरिद्म की मदद से तुरंत चेतावनी जारी करती है।
इससे समुद्री दुर्घटनाओं की संभावना बेहद कम होगी।

2. बंदरगाहों में भीड़ और देरी कम होगी

भारत के कई प्रमुख बंदरगाहों पर जहाजों की कतारें रहती हैं। VTMS पोर्ट ऑपरेशंस को स्मार्ट, सुव्यवस्थित और तेज बनाएगी।
इसके बाद जहाजों की लोडिंग-अनलोडिंग शेड्यूलिंग, एंकरिंग और डॉकिंग अधिक सुचारु रूप से हो सकेगी।

3. लागत में कमी—आत्मनिर्भरता में बढ़ोतरी

विदेशी VTMS सिस्टम की खरीद और मेंटेनेंस बेहद महंगा होता था।
अब भारत के पास अपनी स्वयं की तकनीक है, जिससे लागत 30–40% तक घट सकती है।

4. डेटा-ड्रिवन पोर्ट मैनेजमेंट

VTMS का एक अन्य फायदा यह है कि यह उच्च स्तरीय डेटा एनालिटिक्स प्रदान करती है।
इससे—

  • भविष्य की जरूरतों का आकलन
  • जहाजों के लिए बेहतर प्लानिंग
  • परिवहन समय में कमी
  • व्यापार गतिविधियों में तेजी
    आ सकेगी।

कौन-कौन से बंदरगाहों में किया गया है इसका उपयोग?

अभी यह प्रणाली विभिन्न प्रमुख बंदरगाहों में ट्रायल और इम्प्लीमेंटेशन फेज में है।
सूत्रों के अनुसार, इसे जल्द ही सभी बड़े बंदरगाहों—जैसे मुंबई, कोच्चि, चेन्नई, पारादीप, कांडला और विशाखापत्तनम—में लागू करने की योजना है।

NTCPWC ने बताया है कि आने वाले वर्षों में यह सिस्टम भारत के तटीय क्षेत्रों और जलमार्गों में भी उपयोग में लाया जाएगा, जिससे इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा।


केंद्र सरकार की ‘पोर्ट मॉडर्नाइजेशन’ पहल को मजबूत समर्थन

भारत सरकार ‘मारिटाइम इंडिया विज़न 2030’ के तहत देश भर में बंदरगाहों को हाई-टेक और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है।
स्वदेशी VTMS इस मिशन को गति प्रदान करेगा।

सरकार का लक्ष्य देश के समस्त प्रमुख बंदरगाहों को

  • अत्याधुनिक निगरानी
  • कनेक्टिविटी
  • इंटरऑपरेबल सिस्टम
  • और AI-समर्थित तकनीकों
    से लैस करना है।

आईआईटी मद्रास: समुद्री तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर

आईआईटी मद्रास बीते एक दशक से समुद्री इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारतीय अनुसंधान का अग्रणी केंद्र बना हुआ है। यह संस्थान अब दुनिया के चुनिंदा संस्थानों की श्रेणी में शामिल हो चुका है जो स्वदेशी स्तर पर ऐसी उन्नत समुद्री तकनीक विकसित कर सकते हैं।

NTCPWC भविष्य में—

  • AI आधारित पोर्ट मैनेजमेंट
  • ड्रोन मॉनिटरिंग
  • समुद्री सुरक्षा प्रणालियाँ
  • स्मार्ट वाटरवे सिस्टम
    जैसे क्षेत्रों में भी समाधान विकसित करने की योजना बना रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ेगी पहचान

स्वदेशी VTMS का सफल उपयोग भारत को भावी निर्यातक देशों की श्रेणी में भी ला सकता है।
भारत भविष्य में इस तकनीक को

  • दक्षिण एशियाई
  • अफ्रीकी
  • और दक्षिण-पूर्व एशियाई
    देशों को निर्यात कर सकता है, जहां तेज़ी से उभरते बंदरगाहों को किफायती समाधान की आवश्यकता है।

समापन

आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित देश की पहली स्वदेशी पोत यातायात प्रबंधन प्रणाली न केवल तकनीकी प्रगति का एक नया अध्याय है, बल्कि यह भारत के बंदरगाह प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में दीर्घकालिक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है।

यह उपलब्धि भारतीय अनुसंधान, इंजीनियरिंग कौशल और नवाचार क्षमता का प्रतीक है। आने वाले समय में यह प्रणाली भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बनाएगी। (भाषा इनपुट)

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