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12 साल की उम्र और 5 मेडल; मिलिए टेबल टेनिस की ‘वंडर गर्ल’ कायरा भंडारी से, जिसकी आंखों में है ओलंपिक का सपना

The Hill India News
Last updated: March 3, 2026 4:59 am
The Hill India News
Published: March 3, 2026
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लखनऊ/देहरादून: भारत में खेलों की बदलती तस्वीर के बीच एक ऐसी कहानी उभरकर सामने आई है, जो ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों की सफलता की जीती-जागती मिसाल है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के इस विशेष मौके पर देश की नजरें उत्तराखंड की एक ऐसी नन्ही प्रतिभा पर टिकी हैं, जिसने अपनी छोटी सी उम्र में टेबल के बड़े-बड़े दिग्गजों के पसीने छुड़ा दिए हैं। हम बात कर रहे हैं 12 वर्षीय कायरा भंडारी की, जिन्हें खेल जगत आज ‘वंडर गर्ल’ के नाम से पहचान रहा है।

Contents
रिकॉर्ड्स की नई इबारत: एक चैंपियनशिप, पांच पदककठिन तपस्या: रोजाना 8 घंटे की ट्रेनिंग और ऑनलाइन पढ़ाईमां का साथ और 6 साल की उम्र से पैडल थामने का सफरलक्ष्य: 2031 तक ओलंपिक गोल्ड और तिरंगे की शानकिताबों का शौक और सादगी भरा जीवनमहिला दिवस 2026 की थीम और कायरा का संदेश

रिकॉर्ड्स की नई इबारत: एक चैंपियनशिप, पांच पदक

हाल ही में हरिद्वार में आयोजित उत्तराखंड स्टेट टेबल टेनिस चैंपियनशिप में कायरा ने वह कारनामा कर दिखाया जो अनुभवी खिलाड़ियों के लिए भी एक चुनौती होता है। कायरा ने महज एक प्रतियोगिता की पांच अलग-अलग आयु श्रेणियों में हिस्सा लिया और सभी में पदक जीतकर सबको चौंका दिया।

उनकी उपलब्धियों का सफर कुछ इस प्रकार रहा:

  • अंडर-15 और अंडर-19: गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक)

  • अंडर-13 और सीनियर वुमेंस: सिल्वर मेडल (रजत पदक)

  • अंडर-17: ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक)

12 साल की उम्र में सीनियर महिला वर्ग में पदक जीतना यह दर्शाता है कि कायरा की तकनीक और एकाग्रता किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी से कम नहीं है। अब वह नेशनल टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2026 में पांच श्रेणियों में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कठिन तपस्या: रोजाना 8 घंटे की ट्रेनिंग और ऑनलाइन पढ़ाई

सफलता कभी इत्तेफाक नहीं होती, यह कायरा की दिनचर्या से स्पष्ट होता है। कायरा वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इंटरनेशनल कोच पराग अग्रवाल की देखरेख में ‘पैसिफिक टेबल टेनिस अकादमी’ में प्रशिक्षण ले रही हैं।

खेल के प्रति उनका समर्पण ऐसा है कि वह प्रतिदिन 7 से 8 घंटे टेबल पर पसीना बहाती हैं। चूंकि खेल के कारण नियमित स्कूल जाना संभव नहीं था, इसलिए कायरा एक इंटरनेशनल ऑनलाइन स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं। फिलहाल वह सातवीं कक्षा की छात्रा हैं। उनके कोच पराग अग्रवाल बताते हैं, “कायरा में गजब की फुर्ती और सीखने की ललक है। वह पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना जानती है।”

मां का साथ और 6 साल की उम्र से पैडल थामने का सफर

कायरा की इस यात्रा में उनकी मां लतिका भंडारी एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी हैं। मूल रूप से देहरादून की रहने वाली लतिका अपनी बेटी के सपनों को पंख देने के लिए लखनऊ में रहकर उसकी ट्रेनिंग और डाइट का पूरा ध्यान रखती हैं।

कायरा ने महज 6 साल की उम्र में पहली बार टेबल टेनिस का पैडल थामा था। स्कूल में बच्चों को खेलते देख इस खेल की गति (Speed) ने उन्हें ऐसा आकर्षित किया कि उन्होंने इसे ही अपना करियर बनाने की ठान ली। टेबल टेनिस दुनिया के सबसे तेज खेलों में गिना जाता है, जहाँ 9 फीट लंबे टेबल पर सेकंड के सौवें हिस्से में फैसले लेने होते हैं, और कायरा इस कला में माहिर होती जा रही हैं।

लक्ष्य: 2031 तक ओलंपिक गोल्ड और तिरंगे की शान

कायरा भंडारी का लक्ष्य सिर्फ नेशनल चैंपियनशिप तक सीमित नहीं है। उनकी नजरें भविष्य के एशियाई खेलों और ओलंपिक पर टिकी हैं। ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरा सपना है कि अगले 5 सालों में मैं भारत के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतूं। जब पोडियम पर तिरंगा ऊपर जाए और राष्ट्रगान बजे, तो मैं उसे गर्व से सलामी देना चाहती हूं।”

कायरा दिग्गज खिलाड़ी मनिका बत्रा और अचंता शरत कमल को अपना आदर्श मानती हैं। वहीं, खेल के मैदान पर वह कर्नाटक की साक्ष्या संतोष और हरियाणा की अवनी दुआ को अपना सबसे मजबूत प्रतिद्वंदी मानती हैं।

किताबों का शौक और सादगी भरा जीवन

खिलाड़ी होने के साथ-साथ कायरा एक जिज्ञासु पाठक भी हैं। उन्हें सुधा मूर्ति और रस्किन बॉन्ड की किताबें पढ़ना पसंद है। विज्ञान (विशेषकर बायोलॉजी) उनका प्रिय विषय है। डाइट चार्ट का सख्ती से पालन करने वाली कायरा को बिरयानी और दक्षिण भारतीय व्यंजन इडली-डोसा बेहद पसंद हैं। देहरादून स्थित अपने घर जाने पर वह अपने दो पालतू कुत्तों ‘मून’ और ‘जो’ के साथ समय बिताना पसंद करती हैं।

महिला दिवस 2026 की थीम और कायरा का संदेश

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम ‘दान से लाभ’ (Invest in Women: Accelerate Progress) के इर्द-गिर्द है, जो लैंगिक समानता और महिलाओं के विकास में निवेश पर जोर देती है।

कायरा भंडारी ने इस मौके पर समाज को एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “समाज में जेंडर इक्वेलिटी (लैंगिक समानता) होनी चाहिए। हर बच्ची को कोई न कोई खेल जरूर खेलना चाहिए क्योंकि यह न केवल शारीरिक रूप से फिट रखता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता भी बढ़ाता है।“ उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी आगे बढ़ने का अवसर दें।

कायरा भंडारी जैसी बेटियां आज के भारत की नई पहचान हैं। जहाँ एक अनुमान के मुताबिक खेलों में लड़कियों की भागीदारी लड़कों के मुकाबले काफी कम (करीब 30%) है, वहां कायरा जैसी प्रतिभाएं अन्य बच्चियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उत्तराखंड की यह ‘वंडर गर्ल’ अब नेशनल चैंपियनशिप में अपनी धमक दिखाने को तैयार है, और देश को उम्मीद है कि जल्द ही यह नन्ही पैडलर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराएगी।

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