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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > ऋषभ पंत के पैतृक गांव पाली में फिर लौटेगी रौनक? पुश्तैनी मकान का निर्माण शुरू, मां ने सड़क को लेकर ग्रामीणों से की बातचीत
उत्तराखंडफीचर्डस्पोर्ट्स

ऋषभ पंत के पैतृक गांव पाली में फिर लौटेगी रौनक? पुश्तैनी मकान का निर्माण शुरू, मां ने सड़क को लेकर ग्रामीणों से की बातचीत

The Hill India News
Last updated: August 11, 2026 4:36 am
The Hill India News
Published: August 11, 2026
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पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट स्थित पाली गांव में क्रिकेटर ऋषभ पंत के परिवार की सक्रियता से जगी नई उम्मीद, ग्रामीण बोले- पंत परिवार की वापसी से गांव को मिल सकती है नई पहचान और रिवर्स पलायन को मिलेगा बढ़ावा

पिथौरागढ़: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार क्रिकेटर ऋषभ पंत इन दिनों उत्तराखंड में जमीन खरीदने और प्रदेश को अपना नया बेस बनाने की इच्छा को लेकर चर्चा में हैं। इसी बीच पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव पाली से ऐसी खबर सामने आई है, जिसने ग्रामीणों के बीच उम्मीद जगा दी है। पाली गांव में ऋषभ पंत के पुश्तैनी मकान के नवनिर्माण का काम शुरू हो गया है। इसके बाद ग्रामीणों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में पंत परिवार अपने पैतृक गांव की ओर रुख कर सकता है।

Contents
पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट स्थित पाली गांव में क्रिकेटर ऋषभ पंत के परिवार की सक्रियता से जगी नई उम्मीद, ग्रामीण बोले- पंत परिवार की वापसी से गांव को मिल सकती है नई पहचान और रिवर्स पलायन को मिलेगा बढ़ावामां सरोज पंत ने गांव पहुंचकर शुरू कराया मकान का कामसड़क को लेकर भी ग्रामीणों से हुई बातचीतकरीब 300 परिवारों वाले गांव में अब रह गए सिर्फ 50 परिवारग्राम प्रधान बोले- पूरा गांव ऋषभ पंत के स्वागत के लिए तैयारऋषभ पंत ने भी जताई थी उत्तराखंड लौटने की इच्छास्थानीय निवासी ने 20 नाली जमीन देने की पेशकश कीपंत की वापसी से गांव को मिल सकती है नई पहचानपाली की उम्मीदों को मिला नया सहारा

गंगोलीहाट विकासखंड मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित पाली गांव ऋषभ पंत का पैतृक गांव है। यहां पंत परिवार की पुश्तैनी जमीन और मकान मौजूद है। समय के साथ पुराना मकान जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन अब उसके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से गांव में एक बार फिर चहल-पहल बढ़ने की उम्मीद है।

मां सरोज पंत ने गांव पहुंचकर शुरू कराया मकान का काम

जानकारी के अनुसार, ऋषभ पंत की मां सरोज पंत हाल ही में अपने पैतृक गांव पाली पहुंचीं और उन्होंने पुराने मकान के नवनिर्माण का काम शुरू कराया। कुछ दिन गांव में रहने के बाद वह वापस लौट गई हैं, लेकिन निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है।

ऋषभ पंत के चचेरे भाई दिनेश चंद्र पंत के मुताबिक पुश्तैनी आवास के नवनिर्माण का काम शुरू हो चुका है। परिवार की इस सक्रियता को ग्रामीण ऋषभ पंत और उनके परिवार के गांव से दोबारा जुड़ाव के तौर पर देख रहे हैं।

हालांकि अभी तक पंत परिवार की ओर से गांव में स्थायी रूप से लौटने या यहां नया घर बनाकर रहने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पुश्तैनी मकान का निर्माण शुरू होने से चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म है।

सड़क को लेकर भी ग्रामीणों से हुई बातचीत

पाली गांव के लिए सबसे बड़ी समस्याओं में से एक आज भी सड़क संपर्क है। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे में ऋषभ पंत की मां के गांव पहुंचने के दौरान सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों से बातचीत किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस बातचीत के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी है कि यदि पंत परिवार गांव में सक्रिय होता है तो सड़क जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर भी सरकार और प्रशासन का ध्यान इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेटर का अपने पैतृक गांव से दोबारा जुड़ना सिर्फ परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे गांव की समस्याएं बड़े स्तर पर सामने आ सकती हैं और विकास कार्यों को भी गति मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

करीब 300 परिवारों वाले गांव में अब रह गए सिर्फ 50 परिवार

पाली गांव भी उत्तराखंड के उन हजारों पहाड़ी गांवों में शामिल है, जिन्होंने पिछले कुछ दशकों में बड़े पैमाने पर पलायन का दर्द झेला है। कभी करीब 300 परिवारों से आबाद रहे इस गांव में अब लगभग 50 परिवार ही रह गए हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों और मैदानी क्षेत्रों की ओर चले गए। गांव खाली होते गए और कई पुराने मकान वीरान पड़ गए।

ऐसे में यदि ऋषभ पंत का परिवार अपने पैतृक गांव से दोबारा जुड़ता है और यहां आना-जाना बढ़ाता है, तो इसे स्थानीय लोग रिवर्स पलायन की एक सकारात्मक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

ग्राम प्रधान बोले- पूरा गांव ऋषभ पंत के स्वागत के लिए तैयार

पाली के ग्राम प्रधान विनोद प्रसाद का कहना है कि अगर ऋषभ पंत और उनका परिवार गांव लौटता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात होगी। उन्होंने कहा कि पूरा गांव उनके स्वागत के लिए तैयार है।

ग्रामीणों का मानना है कि ऋषभ पंत की लोकप्रियता का लाभ गांव को भी मिल सकता है। उनके यहां आने से पाली गांव देशभर में चर्चा में आ सकता है और पर्यटन की संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं। पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और पंत परिवार की पुश्तैनी विरासत को देखते हुए गांव भविष्य में एक अलग पहचान बना सकता है।

ऋषभ पंत ने भी जताई थी उत्तराखंड लौटने की इच्छा

ऋषभ पंत ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से दिल्ली से अपना बेस उत्तराखंड स्थानांतरित करने और राज्य में जमीन खरीदकर घर बनाने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने अपने पहाड़ी लोगों के बीच लौटने और राज्य के विकास में योगदान देने की बात कही थी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि पंत ने स्पष्ट किया था कि वह सरकार से मुफ्त जमीन या किसी तरह का तोहफा नहीं चाहते। उनकी इच्छा सरकारी निर्धारित दरों पर जमीन खरीदने की है। उन्होंने जमीन खरीदने की प्रक्रिया में मदद की अपील भी की थी।

ऋषभ पंत के इस बयान के बाद उनके पैतृक गांव पाली में पुश्तैनी मकान का निर्माण शुरू होना ग्रामीणों के लिए खासा उत्साह पैदा कर रहा है। हालांकि इन दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि पंत परिवार की ओर से नहीं हुई है।

स्थानीय निवासी ने 20 नाली जमीन देने की पेशकश की

ऋषभ पंत के गांव लौटने की संभावनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक स्थानीय निवासी ने उनके लिए 20 नाली भूमि निशुल्क देने की पेशकश तक कर दी है।

स्थानीय निवासी नीरज पंत ने कहा कि यदि ऋषभ पंत यहां घर बनाना चाहते हैं तो वह उन्हें 20 नाली भूमि निशुल्क देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पूरा क्षेत्र ऋषभ पंत का स्वागत करना चाहता है।

हालांकि ऋषभ पंत पहले ही सरकारी दरों पर जमीन खरीदने की अपनी इच्छा स्पष्ट कर चुके हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर की गई ऐसी पेशकश भावनात्मक रूप से उनके प्रति लोगों के लगाव और सम्मान को दर्शाती है।

पंत की वापसी से गांव को मिल सकती है नई पहचान

ऋषभ पंत आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक बड़ा नाम हैं। ऐसे में यदि उनका अपने पैतृक गांव से जुड़ाव और मजबूत होता है तो इसका सामाजिक और आर्थिक असर भी देखने को मिल सकता है। उनके गांव आने-जाने से स्थानीय युवाओं में भी अपने गांव और पहाड़ से जुड़े रहने की प्रेरणा बढ़ सकती है।

पाली जैसे पलायन प्रभावित गांवों के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण हो सकता है कि यदि रोजगार और बुनियादी सुविधाएं बेहतर हों तो गांवों में वापस लौटने की संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।

फिलहाल पंत परिवार की ओर से गांव में स्थायी रूप से लौटने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पुश्तैनी मकान का निर्माण शुरू होने और सड़क को लेकर बातचीत ने ग्रामीणों की उम्मीद जरूर बढ़ा दी है।

पाली की उम्मीदों को मिला नया सहारा

ऋषभ पंत के पैतृक गांव पाली में एक पुराने मकान का दोबारा निर्माण भले ही सामान्य घटना लगे, लेकिन पलायन से जूझ रहे इस पहाड़ी गांव के लिए यह उम्मीद की एक बड़ी किरण है। करीब 300 परिवारों से घटकर 50 परिवारों तक सिमट चुके पाली में यदि पंत परिवार का दोबारा जुड़ाव बढ़ता है, तो यह गांव के लिए नई शुरुआत साबित हो सकती है।

अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि क्या ऋषभ पंत वास्तव में अपने पहाड़ और अपने पुश्तैनी गांव की ओर लौटते हैं। अगर ऐसा होता है तो पाली की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के गांव की कहानी नहीं रहेगी, बल्कि यह उत्तराखंड में रिवर्स पलायन, गांव से जुड़ाव और पहाड़ की ओर लौटने की एक प्रेरणादायक मिसाल भी बन सकती है।

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