By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तर प्रदेश: मां की मौत के बाद बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक कौन? इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने किया स्पष्ट
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तर प्रदेश > उत्तर प्रदेश: मां की मौत के बाद बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक कौन? इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने किया स्पष्ट
उत्तर प्रदेशफीचर्ड

उत्तर प्रदेश: मां की मौत के बाद बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक कौन? इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने किया स्पष्ट

The Hill India News
Last updated: April 23, 2026 4:42 am
The Hill India News
Published: April 23, 2026
Share
SHARE

प्रयागराज: मां की मृत्यु के बाद नाबालिग बच्चे की कस्टडी किसे मिलेगी, इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हालिया फैसले में महत्वपूर्ण स्पष्टता प्रदान की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मां के निधन के बाद पिता ही बच्चे का प्राकृतिक (Natural) और वैधानिक अभिभावक होता है और सामान्य परिस्थितियों में वही बच्चे की देखभाल के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति माना जाता है।

यह मामला वाराणसी से जुड़े एक 13 महीने के मासूम बच्चे की कस्टडी को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका से संबंधित था। याचिकाकर्ता पिता ने कोर्ट से अपने बच्चे की कस्टडी मांगी थी, जो वर्तमान में उसके ननिहाल पक्ष के पास रह रहा था। पिता ने कोर्ट में यह दलील दी कि वह आर्थिक रूप से सक्षम है और बच्चे के पालन-पोषण तथा भविष्य को सुरक्षित करने में पूरी तरह सक्षम है। इसलिए उसे बच्चे की कस्टडी देने से इनकार करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि बच्चा अभी केवल 13 महीने का है। न्यायालय ने कहा कि इतनी कम उम्र में यदि बच्चे को उसके पिता से अलग रखा जाता है, तो भविष्य में उनके बीच भावनात्मक संबंध विकसित होने में बाधा आ सकती है। यह स्थिति न केवल बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए नुकसानदायक हो सकती है, बल्कि पिता के अधिकारों को भी प्रभावित कर सकती है।

मामले में यह भी सामने आया कि बच्चे की मां का निधन फरवरी 2025 में एक असफल आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान हो गया था। इसके बाद से बच्चा ननिहाल पक्ष—मौसा और मौसी—के पास रह रहा था। ननिहाल पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि बच्चे का जन्म समय से पहले हुआ था और उसे विशेष देखभाल की आवश्यकता है, जो वे बेहतर तरीके से कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान हुई मृत्यु को लेकर कुछ संदेह भी जताए।

हालांकि कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह पाया कि पिता के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और न ही ऐसा कोई सबूत है जिससे यह साबित हो कि वह अपनी पत्नी की मृत्यु के लिए जिम्मेदार है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह के आधार पर पिता को उसके बच्चे से अलग नहीं किया जा सकता।

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय—तेजस्विनी गौड़ बनाम शेखर जगदीश प्रसाद तिवारी (2019)—का भी हवाला दिया। इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि मां की मृत्यु के बाद पिता ही बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक होता है और बच्चे की कस्टडी उसे ही दी जानी चाहिए, बशर्ते वह सक्षम और योग्य हो।

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि कस्टडी से जुड़े मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत “बच्चे का सर्वोत्तम हित” (Welfare of the Child) होता है। यानी अदालत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बच्चा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सुरक्षित और संतुलित वातावरण में पले-बढ़े।

इसी आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पिता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि बच्चे की कस्टडी तुरंत उसे सौंपी जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि बच्चे का उसके ननिहाल पक्ष से भावनात्मक संबंध बना रहे। इसके लिए कोर्ट ने हर रविवार शाम 4 बजे से दो घंटे तक मुलाकात (विजिटेशन राइट्स) की अनुमति दी है।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की परिस्थिति उत्पन्न होती है जिससे बच्चे के हित प्रभावित होते हैं, तो संबंधित पक्ष दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

यह फैसला न केवल एक विशेष मामले में न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि ऐसे तमाम मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन भी प्रदान करता है, जहां माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु के बाद बच्चे की कस्टडी को लेकर विवाद उत्पन्न होता है।

You Might Also Like

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री BS येदियुरप्पा को राहत, हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर लगाई रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख: हरिद्वार के खाद्य आपूर्ति अधिकारी पर ‘आय से अधिक संपत्ति’ मामले में राज्य सरकार व ईडी को नोटिस
ममता बनर्जी ने PM पद के लिए दिया खरगे के नाम का प्रस्ताव, कांग्रेस अध्यक्ष बोले- ‘जीत के बाद होगा तय’
प्रतापगढ़ में 20 करोड़ की ऑनलाइन ठगी का खुलासा, तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार, 16 राज्यों में फैला था नेटवर्क
प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंडवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामना दी
TAGGED:Allahabad High CourtChild Custody LawCustody BattleLegal AwarenessLegal RightsNatural Guardian
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में लागू हुई ‘महक क्रांति नीति 2026’, चंपावत-नैनीताल में बनेगी देश की पहली ‘सिनेमन वैली’; 91,000 किसानों की बदलेगी किस्मत

The Hill India News
The Hill India News
June 13, 2026
दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश से बदला मौसम, अगले 5 दिन उत्तर भारत में आंधी-तूफान का तांडव; जानें यूपी में कब आएगा मॉनसून
आज से पीएम मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया का ऐतिहासिक दौरा; राफेल जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी पर टिकीं दुनिया की नजरें
लक्सर में दरिंदगी की हदें पार; मायके में घुसकर पत्नी पर कांच की बोतल से हमला, फिर सरेआम दे दिया ‘तीन तलाक’
IMA की 158वीं पासिंग आउट परेड आज, पहली बार 9 महिला कैडेट्स ‘अंतिम पग’ पार कर रचेंगी इतिहास; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी गवाह
अचानक ठप हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम, ‘मेटा का सर्वर डाउन’ होने से दुनिया भर में मची खलबली, करोड़ों यूजर्स परेशान
‘पीएम मोदी कलयुग में भगवान का अवतार’ उत्तराखंड में धामी सरकार के मंत्री का अजीबो-गरीब  बयान
जिला प्रशासन की अनूठी पहल: देहरादून में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को मिलेगा निःशुल्क उपचार; डीएम डॉ. आशीष चौहान ने शुरू किया महा-अभियान
UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा 2026: चारधाम यात्रा, मौसम का अलर्ट और भारी जाम का संकट; आयोग की अपील— ‘एक दिन पहले पहुंचें परीक्षा केंद्र’
नैनीताल में सड़क हादसा: जल संस्थान के बेकाबू ट्रक ने दिल्ली की मां-बेटी को रौंदा; वैन को टक्कर मारने के बाद भीड़ में घुसा वाहन, हालत बेहद नाजुक
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?