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उत्तराखंड के शहरी विकास को लगेंगे पंख: CM धामी के विजन से ‘अर्बन चैलेंज फंड’ बनेगा गेमचेंजर, ₹1 लाख करोड़ की योजना से सवरेंगे शहर

देहरादून: उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों को वैश्विक स्तर की सुविधाओं से लैस करने और नगर निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) योजना के माध्यम से अब राज्य के छोटे-बड़े शहरों में आधुनिक आधारभूत ढांचे का जाल बिछाया जाएगा। सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत रोडमैप पेश किया है।

मुख्यमंत्री का संकल्प: आधुनिक और सशक्त उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस योजना का लाभ राज्य के प्रत्येक नगर निकाय तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए शहरों को न केवल रहने लायक बनाना है, बल्कि उन्हें निवेश और पर्यटन के हब के रूप में भी विकसित करना है। उत्तराखंड अर्बन चैलेंज फंड के तहत राज्य के 108 नगर निकायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

₹1 लाख करोड़ का राष्ट्रीय कोष: उत्तराखंड को मिलेगी प्राथमिकता

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा संचालित यह योजना वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। इस विशाल बजट का लाभ उन शहरों को मिलेगा जो प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर बेहतर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेंगे। उत्तराखंड के लिए राहत की बात यह है कि ‘पर्वतीय राज्य’ होने के नाते यहाँ के सभी निकाय ‘क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना’ के दायरे में आएंगे। इसका सीधा लाभ यह होगा कि कम वित्तीय क्षमता वाली नगर पंचायतें भी बैंकों से ऋण लेकर बड़े विकास कार्य शुरू कर सकेंगी।

इन तीन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस

योजना के तहत विकास प्रस्तावों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की बदलती जरूरतों को पूरा करेंगे:

  1. जल एवं स्वच्छता (Water & Sanitation): इसके अंतर्गत अत्याधुनिक पेयजल आपूर्ति प्रणाली, सीवरेज नेटवर्क, एसटीपी (STP) प्लांट और वैज्ञानिक तरीके से कूड़ा निस्तारण की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

  2. रचनात्मक पुनर्विकास (Creative Redevelopment): ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून जैसे पुराने शहरों के बाजारों, विरासत स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का जीर्णोद्धार कर उन्हें नया स्वरूप दिया जाएगा।

  3. सिटीज़ ऐज़ ग्रोथ हब्स (Cities as Growth Hubs): शहरों को केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित न रखकर उन्हें शिक्षा, उद्योग, तीर्थाटन और व्यापार के केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

50 प्रतिशत मार्केट फाइनेंस की शर्त: वित्तीय अनुशासन का नया दौर

योजना की एक अनूठी शर्त ‘मार्केट फाइनेंस’ है। कुल परियोजना लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा निकायों को बैंक ऋण, बॉन्ड या पीपीपी (PPP) मॉडल से जुटाना होगा। शेष 50 प्रतिशत में केंद्र और राज्य सरकार की बराबर (25-25%) हिस्सेदारी होगी। आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार के अनुसार, यह शर्त नगर निकायों में वित्तीय अनुशासन लाएगी और उन्हें अपने राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।


प्रदर्शन आधारित फंडिंग और कड़े सुधार

अर्बन चैलेंज फंड के तहत पैसा केवल कागजी प्रस्तावों पर नहीं, बल्कि ‘ग्राउंड परफॉर्मेंस’ पर मिलेगा। केंद्रीय सहायता तीन किस्तों (30%, 50%, और 20%) में जारी की जाएगी। इसके लिए परियोजनाओं की जियो टैगिंग और स्वतंत्र सत्यापन अनिवार्य होगा। साथ ही, निकायों को कुछ अनिवार्य सुधार करने होंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • संपत्ति कर (Property Tax) सुधार और डिजिटल नागरिक सेवाएं।

  • जीआईएस (GIS) आधारित सर्वे और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम।

  • जलवायु अनुकूल (Climate Resilient) शहरी नियोजन।

इन शहरों की बदलेगी सूरत

प्रारंभिक खाके के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुड़की, रुद्रपुर और श्रीनगर जैसे प्रमुख शहरों के लिए विशेष औद्योगिक और शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से ‘कॉन्सेप्ट नोट’ और ‘डीपीआर’ (DPR) बनाकर केंद्र को भेजने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड अर्बन चैलेंज फंड केवल एक वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि यह राज्य के शहरी भविष्य का नया ब्लूप्रिंट है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह योजना उत्तराखंड के शहरों को स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। सचिव आवास के अनुसार, राज्य सरकार सभी निकायों को गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव तैयार करने में हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है ताकि ‘विकसित उत्तराखंड’ का सपना साकार हो सके।

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