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उत्तराखंड में ‘ग्रीन सेस’ का आगाज: बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की जेब होगी ढीली, पहले दिन 650 वाहनों से हुई वसूली

The Hill India News
Last updated: January 14, 2026 12:35 pm
The Hill India News
Published: January 14, 2026
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देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड की आबोहवा को शुद्ध रखने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से चल रही कवायद के बाद आखिरकार उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर Green Cess (हरित शुल्क) लागू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के इस फैसले का औपचारिक आगाज हरिद्वार जिले के नारसन चेक पोस्ट से हुआ। अब उत्तराखंड की सीमाओं में प्रवेश करने वाले प्रत्येक निजी और व्यावसायिक वाहन (कुछ श्रेणियों को छोड़कर) को इस शुल्क का भुगतान करना होगा।

Contents
नारसन चेक पोस्ट से हुई औपचारिक शुरुआतपहले दिन की रिपोर्ट: तकनीकी अड़चनें और समाधानसरकार क्यों वसूल रही है ग्रीन सेस?शुल्क की दरें: किस वाहन पर कितना लगेगा टैक्स?किसे मिलेगी छूट?कहाँ-कहाँ लगे हैं हाई-टेक कैमरे?गढ़वाल मंडल के प्रमुख बॉर्डर:कुमाऊं मंडल के प्रमुख चेक पोस्ट:1 जनवरी से होनी थी शुरुआत, अब हुई प्रभावीविशेषज्ञों की राय

नारसन चेक पोस्ट से हुई औपचारिक शुरुआत

राज्य में Uttarakhand Green Cess व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए परिवहन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। हरिद्वार-दिल्ली हाईवे पर स्थित नारसन चेक पोस्ट पर पहले दिन सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। यहाँ विशेष रूप से स्थापित कैमरों और सॉफ्टवेयर की मदद से वाहनों की स्क्रीनिंग की गई। हालांकि, पहले दिन कुछ तकनीकी बाधाएं भी सामने आईं, लेकिन विभाग ने सफलतापूर्वक सैकड़ों वाहनों से उपकर वसूल कर इस नई व्यवस्था की नींव रखी।

पहले दिन की रिपोर्ट: तकनीकी अड़चनें और समाधान

परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के पहले दिन नारसन चेक पोस्ट पर लगभग 850 वाहनों को जांच के दायरे में लिया गया। इनमें से 650 वाहनों से सफलतापूर्वक ग्रीन सेस वसूला गया। शेष 200 वाहनों के मामले में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या और सॉफ्टवेयर में शुरुआती ग्लिच (खामियों) के कारण शुल्क नहीं लिया जा सका।

अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह ने इस संबंध में बताया:

“पहले दिन कुछ तकनीकी दिक्कतें आईं, जिन्हें हम गंभीरता से ले रहे हैं। नेटवर्क और सॉफ्टवेयर से जुड़ी खामियों को दूर करने के लिए तकनीकी टीम को निर्देशित किया गया है। आने वाले दिनों में यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक और बाधा रहित होगी।”


सरकार क्यों वसूल रही है ग्रीन सेस?

उत्तराखंड एक संवेदनशील हिमालयी राज्य है, जहाँ हर साल करोड़ों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। इससे राज्य की सड़कों पर भारी दबाव पड़ता है और कार्बन उत्सर्जन में भी वृद्धि होती है। Environment Conservation को ध्यान में रखते हुए, इस सेस से मिलने वाली धनराशि का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जाएगा:

  1. पर्यावरण संरक्षण: वनीकरण और प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।

  2. सड़क बुनियादी ढांचा: पर्यटन मार्गों और मुख्य राजमार्गों की मरम्मत और रखरखाव।

  3. ट्रैफिक मैनेजमेंट: सीमाओं पर अत्याधुनिक तकनीक और कैमरों की स्थापना।


शुल्क की दरें: किस वाहन पर कितना लगेगा टैक्स?

परिवहन विभाग ने वाहनों की श्रेणी और उनके आकार के आधार पर शुल्क निर्धारित किया है। यहाँ विस्तार से दी गई सूची है:

वाहन श्रेणी निर्धारित ग्रीन सेस (प्रतिदिन)
निजी चार पहिया वाहन (Car) ₹80
बस (Buses) ₹140
भारी वाहन (Heavy Trucks) ₹120
डिलीवरी वैन (Delivery Vans) ₹250
बड़े ट्रक (आकार के अनुसार) ₹140 से ₹700 तक

किसे मिलेगी छूट?

आम जनता और आपातकालीन सेवाओं को राहत देते हुए सरकार ने कुछ श्रेणियों को Uttarakhand Green Cess के दायरे से बाहर रखा है:

  • दोपहिया वाहन (Bikes/Scooters)

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और CNG वाहन

  • एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड

  • पुलिस और सैन्य वाहन

  • राज्य सरकार के आधिकारिक वाहन


कहाँ-कहाँ लगे हैं हाई-टेक कैमरे?

पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए प्रमुख प्रवेश द्वारों पर हाई-डेफिनिशन कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं।

गढ़वाल मंडल के प्रमुख बॉर्डर:

गढ़वाल क्षेत्र में विशेष रूप से आशारोड़ी बॉर्डर, नारसन बॉर्डर, कुल्हाल (हिमाचल सीमा), गोवर्धनपुर और चिड़ियापुर में कैमरों की तैनाती की गई है। यहाँ से गुजरने वाले हर बाहरी वाहन का डेटा सीधे कंट्रोल रूम से जुड़ जाएगा।

कुमाऊं मंडल के प्रमुख चेक पोस्ट:

कुमाऊं में काशीपुर, जसपुर, खटीमा, रुद्रपुर और पुलभट्टा (बरेली रोड) पर सीसीटीवी और सेस वसूली सिस्टम एक्टिव कर दिया गया है। इन स्थानों पर व्यावसायिक वाहनों की सघन निगरानी की जा रही है।


1 जनवरी से होनी थी शुरुआत, अब हुई प्रभावी

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार की योजना इसे 1 जनवरी 2026 से ही पूरी तरह लागू करने की थी, लेकिन तकनीकी तैयारियों और सॉफ्टवेयर टेस्टिंग में देरी के कारण इसे अब चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है। Uttarakhand Transport Department का लक्ष्य है कि आने वाले एक सप्ताह के भीतर राज्य के सभी 20 से अधिक प्रवेश द्वारों पर इसे पूरी तरह ‘कैशलेस’ और ‘ऑटोमैटिक’ बना दिया जाए।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक और पर्यावरणीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य के राजस्व को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी करेगा। हालांकि, चुनौती यह है कि सीमाओं पर वाहनों का लंबा जाम न लगे, जिसके लिए विभाग को अपनी फास्टैग (FASTag) जैसी तकनीक को और अधिक अपग्रेड करना होगा।


उत्तराखंड में ग्रीन सेस की शुरुआत एक नए युग का संकेत है, जहाँ पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। यदि तकनीकी खामियों को जल्द दूर कर लिया जाता है, तो यह मॉडल अन्य हिमालयी राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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