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उत्तराखंडफीचर्ड

Uttarakhand: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने PRSI के प्रतिनिधिमंडल से करी भेंट, कहा—“भारत की आत्मा को समझने में पब्लिक रिलेशंस की भूमिका अनिवार्य”

The Hill India News
Last updated: December 6, 2025 2:45 pm
The Hill India News
Published: December 6, 2025
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देहरादून, लोक भवन | 06 दिसंबर 2025: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि भारत की आत्मा, संस्कृति, परंपराओं और जनभावनाओं को सही रूप में समझने और अभिव्यक्त करने में पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह समय न केवल तकनीकी परिवर्तन का है, बल्कि वैचारिक नेतृत्व का भी है, और ऐसे दौर में पब्लिक रिलेशंस का दायित्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

Contents
“विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में जनसंपर्क की भूमिका केंद्रीय स्तंभ”एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी के दौर में पीआर की चुनौतियाँ और अवसरसम्मेलन का थीम: “विकसित भारत @ 2047 में जनसंपर्क की भूमिका”उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष पर विशेष सत्र“जनसंपर्क केवल संदेश देने का माध्यम नहीं, बल्कि मार्गदर्शक शक्ति है”प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे अधिकारीअंत में

राज्यपाल लोक भवन, देहरादून में पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) के प्रतिनिधिमंडल से भेंट कर रहे थे। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें 13–15 दिसंबर तक राजधानी देहरादून में आयोजित होने वाले 47वें ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशंस कॉन्फ्रेंस में भाग लेने हेतु औपचारिक आमंत्रण दिया।


“विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में जनसंपर्क की भूमिका केंद्रीय स्तंभ”

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए विकसित भारत @ 2047 के संकल्प को वास्तविकता रूप में परिवर्तित करने के लिए जनसंपर्क एक पुल की तरह काम करता है।

उन्होंने कहा—
“बिना प्रभावी कम्युनिकेशन के विकास की गति मजबूत नहीं हो सकती। पीआर वह सेतु है जो नीति और जनता के बीच विश्वास कायम करता है।”

राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बहुलतावादी संस्कृति, विविध सामाजिक परंपराओं और भावनात्मक संरचना को समझे बिना प्रभावी संचार संभव नहीं है। पीआर केवल सूचना प्रसारण का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और नेतृत्व प्रदान करने वाली संस्था के रूप में उभरना चाहिए।


एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी के दौर में पीआर की चुनौतियाँ और अवसर

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि यह समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा-ड्रिवन टूल्स का है, जहाँ जानकारियाँ अत्यधिक तेज़ी से फैलती हैं और लोगों की राय पल भर में प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा—
“नई तकनीकें तभी सार्थक हैं जब वे भारतीय संस्कृति और सामाजिक जड़ों से जुड़कर इस्तेमाल की जाएँ। पीआर को तकनीक के उपयोग के साथ मानवीय संवेदनाओं का संतुलन बनाना होगा।”

राज्यपाल ने सोशल मीडिया के जिम्मेदार, सकारात्मक और तथ्यपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गलत या आधी-अधूरी जानकारी की वजह से समाज भ्रमित होता है, इसलिए जनसंपर्क पेशेवरों की यह जिम्मेदारी है कि वे सत्य, विश्वसनीयता और जनहित को प्राथमिकता दें।


सम्मेलन का थीम: “विकसित भारत @ 2047 में जनसंपर्क की भूमिका”

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सम्मेलन का विस्तृत ब्रोशर प्रस्तुत किया और आयोजन से जुड़ी तैयारियों की जानकारी दी। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय “विकसित भारत @ 2047 में जनसंपर्क की भूमिका” निर्धारित किया गया है।

सम्मेलन में देशभर से आने वाले 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें—

  • पीआर प्रोफेशनल
  • कॉरपोरेट कम्युनिकेशन विशेषज्ञ
  • सरकारी विभागों के जनसंपर्क अधिकारी
  • मीडिया स्टडीज के प्रोफेसर और विद्यार्थी
  • संचार रणनीतिकार

उपस्थित रहेंगे और पब्लिक रिलेशंस के भविष्य, नई तकनीकों, नैतिक कम्युनिकेशन, डिजिटल रणनीतियों और जनहित आधारित संवाद पर विचार-विमर्श करेंगे।


उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष पर विशेष सत्र

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य के रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष) को ध्यान में रखते हुए विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र के अंतर्गत—

  • राज्य की 25 वर्ष की विकास यात्रा
  • उपलब्धियाँ
  • चुनौतियाँ
  • भविष्य के अवसर
  • पर्यटन, प्राकृतिक संसाधन, आपदा प्रबंधन और डिजिटल शासन जैसे मुद्दे

पर विस्तृत परिचर्चाएँ होंगी।

राज्यपाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड की विकास कहानी देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक है। जनसंपर्क इस कहानी को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकता है।


“जनसंपर्क केवल संदेश देने का माध्यम नहीं, बल्कि मार्गदर्शक शक्ति है”

राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक समय में पीआर का स्वरूप केवल प्रेस नोट या मीडिया प्रबंधन तक सीमित नहीं रहा।

उन्होंने कहा—
“पीआर को दिशा-दर्शी की भूमिका निभानी होगी। उसमें समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और राष्ट्रहित में संवाद को नया आयाम देने की क्षमता होनी चाहिए।”

उन्होंने युवाओं को भी इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया और कहा कि पब्लिक रिलेशंस एक ऐसा पेशा है जो समाज, तकनीक और संस्कृति—तीनों को जोड़कर चलता है।


प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे अधिकारी

राज्यपाल से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में—

  • संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय
  • पीआरएसआई देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष रवि बिजारनिया
  • सचिव अनिल सती
  • कोषाध्यक्ष सुरेश भट्ट
  • सदस्य संजय भार्गव
  • सदस्य वैभव गोयल

उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी और कहा कि सम्मेलन उत्तराखंड में जनसंपर्क पेशे की संभावनाओं को बढ़ावा देगा।


अंत में

राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को सम्मेलन की अग्रिम शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पब्लिक रिलेशंस भारतीय समाज को समझने और इससे जुड़ने की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने आशा जताई कि यह अधिवेशन देशभर के संचार पेशेवरों को एक नई दिशा देगा और विकसित भारत के संकल्प में नई ऊर्जा जोड़ेगा।

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