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उत्तराखंडफीचर्ड

Uttarakhand: सीएम धामी ने आपदा प्रभावितों के बीच मनाई दीपावली, संवेदनशीलता और सेवा का दिया संदेश

The Hill India News
Last updated: October 20, 2025 9:08 am
The Hill India News
Published: October 20, 2025
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देहरादून | ब्यूरो रिपोर्ट: दीपों के पर्व दीपावली पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मानवता और संवेदनशीलता का अद्भुत उदाहरण पेश किया। उन्होंने राज्य की राजधानी देहरादून के निकट सहस्त्रधारा क्षेत्र के मझाड़ा गाँव पहुँचकर आपदा प्रभावित परिवारों के बीच दीपावली मनाई।

Contents
प्रभावित परिवारों से संवाद, समस्याएँ सुनीं“आपदा से प्रभावित हर व्यक्ति की पीड़ा, सरकार की पीड़ा है”पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों में तेजी के निर्देशसंवेदनशीलता और अपनत्व का भावजनता के बीच मुख्यमंत्री की उपस्थिति बनी प्रेरणाआपदा प्रबंधन में सरकार की प्राथमिकताएँलोगों में दिखी राहत और विश्वास की भावना

जहाँ आमतौर पर यह पर्व परिवार और अपनों के साथ रोशनी बाँटने का अवसर होता है, वहीं मुख्यमंत्री ने इस बार इसे आपदा से जूझ रहे नागरिकों के साथ साझा कर ‘सेवा, संवेदना और समर्पण’ का प्रतीक बना दिया।


प्रभावित परिवारों से संवाद, समस्याएँ सुनीं

मुख्यमंत्री धामी ने सहस्त्रधारा, काली गाड़ और मझाड़ा गाँव के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया और स्थानीय नागरिकों से सीधे संवाद किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और उन्हें दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान क्षेत्र में नदी के कटाव और सुरक्षा दीवारों की मजबूती से जुड़ी समस्याएँ रखीं। इस पर मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को रिवर ट्रेनिंग कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य में तेजी लाने के भी सख्त निर्देश दिए, ताकि ग्रामीणों को आपदा के खतरे से राहत मिल सके।


“आपदा से प्रभावित हर व्यक्ति की पीड़ा, सरकार की पीड़ा है”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित नागरिकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
उन्होंने कहा —

“आपदा से प्रभावित हर व्यक्ति की पीड़ा, सरकार की पीड़ा है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पुनर्वास कार्यों में कोई देरी न हो और हर प्रभावित परिवार को राहत मिले। दीपावली केवल रोशनी का नहीं, बल्कि संवेदनाओं और एकता का त्योहार है। हमें अपने जीवन में भी उम्मीद और मुस्कान की ज्योति जलाए रखनी चाहिए।”

धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक पुनर्विकास योजना तैयार की है, जिसमें पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।


पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों में तेजी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाकर प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत पहुँचाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने का कार्य युद्धस्तर पर किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह भी कहा कि

“किसी भी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। शिक्षा उनका अधिकार है और सरकार इस दिशा में हर संभव कदम उठा रही है।”

उन्होंने यह भी बताया कि जिन परिवारों के घर आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। वहीं, जो परिवार फिलहाल किराये के मकानों में रह रहे हैं, उनके किराए का भुगतान निर्धारित मानकों के अनुसार सरकार द्वारा किया जाएगा।


संवेदनशीलता और अपनत्व का भाव

मुख्यमंत्री धामी ने अपनी दीपावली प्रभावित परिवारों के घरों में पहुँचकर मनाई। उन्होंने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों से आत्मीय संवाद किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके जीवन को फिर से सामान्य बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।

गाँव की महिलाओं और बच्चों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और दीपावली की शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ दीप जलाए और मिठाइयाँ बाँटी।
उनके इस कदम ने गाँव के वातावरण में नई उम्मीद की किरण जगाई।

स्थानीय निवासी सुनीता देवी ने कहा, “मुख्यमंत्री का हमारे बीच आना हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। इस कठिन समय में उन्होंने जो संवेदनशीलता दिखाई, उससे हमें विश्वास हुआ कि सरकार हमारे साथ है। ”वहीं, एक अन्य ग्रामीण मोहम्मद सलीम ने कहा, “दीपावली मनाने तो सब आते हैं, लेकिन जो दर्द बाँटने आता है, वही सच्चा नेता होता है।”


जनता के बीच मुख्यमंत्री की उपस्थिति बनी प्रेरणा

मुख्यमंत्री धामी के इस कदम को जनता ने संवेदनशील नेतृत्व का प्रतीक बताया। उनके दौरे के दौरान ग्रामीणों ने राहत और पुनर्वास कार्यों में सरकार की सक्रियता की सराहना की।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल मुख्यमंत्री के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें प्रशासनिक प्रतिबद्धता के साथ मानवीय संवेदना को केंद्र में रखा गया है।


आपदा प्रबंधन में सरकार की प्राथमिकताएँ

राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में रिवर ट्रेनिंग, तटबंध निर्माण, सड़क बहाली, और जल निकासी व्यवस्था सुधार जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं।

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि क्षेत्र के लिए विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर पुनर्निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किए जाएंगे। वहीं, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासन अब “मिशन मोड” में कार्य करेगा ताकि कोई भी परिवार राहत से वंचित न रह जाए।


लोगों में दिखी राहत और विश्वास की भावना

मुख्यमंत्री के आगमन से प्रभावित परिवारों में राहत और उत्साह की लहर दिखी। लोगों ने दीपावली के दिन मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कहा कि यह उनके जीवन की सबसे यादगार दीपावली रही।

ग्राम प्रधान गीता रावत ने कहा, “मुख्यमंत्री ने हमारे गाँव में आकर न सिर्फ दीप जलाए बल्कि हमारे जीवन में भी आशा की रोशनी जलाई।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह दौरा केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसेवा और संवेदना का जीवंत संदेश बन गया। जहाँ एक ओर उन्होंने सरकार की योजनाओं की समीक्षा की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने ग्रामीणों के साथ दीप जलाकर यह जताया कि उत्तराखंड सरकार केवल शासन नहीं, बल्कि परिवार की तरह जनता के साथ खड़ी है।

दीपावली के इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने यह सिद्ध कर दिया कि नेतृत्व का वास्तविक अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि कठिन समय में लोगों का हाथ थामना, उम्मीद जगाना और जीवन में नई रोशनी भरना है।

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