दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजनीतिक हलचल के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च ने राजधानी का माहौल पूरी तरह गरमा दिया। जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई, कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लागू किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि राजनीतिक दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
दिनभर चले घटनाक्रम के बीच सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई मुलाकात रही। बताया गया कि प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगों को नड्डा के समक्ष रखा और सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की। बातचीत के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा की। हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा और आगे की रणनीति जल्द तय की जाएगी।
उधर, संसद मार्च के दौरान पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि नहीं की, लेकिन पार्टी की ओर से दावा किया गया कि उन्हें प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया तथा कई लोगों को बिना किसी स्पष्ट कारण के हिरासत में ले लिया। पार्टी ने सभी विपक्षी सांसदों से प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आगे आने की अपील भी की।
प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी चर्चा में रहीं। समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि संसद भवन से जंतर-मंतर तक निकाले गए विरोध मार्च के दौरान डिंपल यादव को भी हिरासत में लिया गया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।
संसद के निकट स्थित रेल भवन के आसपास भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हो गए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने के लिए अभियान चलाया, जिसके बाद पूरा इलाका खाली करा लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार संसद परिसर और उससे जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही और किसी भी प्रदर्शनकारी को सुरक्षा घेरा पार करने की अनुमति नहीं दी गई।
इस बीच ओखला स्थित नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कार्यालय को लेकर भी अलग-अलग तरह की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि प्रदर्शनकारी NTA कार्यालय में घुस गए थे। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन खबरों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शनकारी ने सुरक्षा घेरा नहीं तोड़ा और NTA कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सामान्य रही। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा परिणाम से संबंधित शिकायत लेकर पांच से सात अभ्यर्थी और उनके परिजनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत NTA अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ या सुरक्षा उल्लंघन की घटना नहीं हुई।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों या अफवाहों से बचें। पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी तरह की गलत सूचना फैलाने वालों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शन में कई सामाजिक संगठनों और विभिन्न राज्यों से आए छात्रों की भी भागीदारी देखने को मिली। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीताजली आंग्मो भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं और आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। उनके पहुंचने के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला। हालांकि पुलिस ने किसी भी समूह को संसद की ओर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी और सभी को निर्धारित क्षेत्र में ही रोकने का प्रयास किया।
दूसरी ओर संसद के भीतर भी मानसून सत्र का पहला दिन हंगामेदार रहा। विभिन्न विपक्षी दलों ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सरकार की ओर से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की गई। इसी बीच संसद भवन परिसर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे मौजूदा घटनाक्रम और संसद की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पूरे घटनाक्रम ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को दिनभर चुनौतीपूर्ण बनाए रखा। दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा और आम लोगों को भी आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
फिलहाल CJP और सरकार के बीच बातचीत का पहला दौर पूरा हो चुका है, लेकिन आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे होने वाली वार्ता तथा संसद में इस मुद्दे पर होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
