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उत्तर प्रदेशफीचर्ड

यूपी रोडवेज का बड़ा फैसला: मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अब ₹20,000 की सहायता, नहीं होगी किसी प्रकार की रिकवरी

The Hill India News
Last updated: April 17, 2026 5:26 am
The Hill India News
Published: April 17, 2026
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने अपने कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण और मानवीय निर्णय लिया है। अब निगम में कार्यरत किसी भी कर्मचारी—चाहे वह नियमित हो, संविदा पर हो या आउटसोर्स—की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को अंतिम संस्कार के लिए ₹20,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। खास बात यह है कि इस धनराशि की अब किसी भी प्रकार की रिकवरी नहीं की जाएगी, जबकि पहले ऐसा नहीं था।

Contents
पहले क्या थी व्यवस्था?अब क्या बदला?कर्मचारी संगठनों की भूमिकाकर्मचारी संघ ने भी जताई खुशीसामाजिक और मानवीय पहल

इस फैसले की जानकारी प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि यूपीएसआरटीसी में पहले से ही “यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना” लागू है, जिसके तहत बस दुर्घटनाओं में घायल या मृत यात्रियों और कर्मचारियों को आर्थिक सहायता दी जाती है। अब इसी योजना के अंतर्गत कर्मचारियों के आश्रितों को दी जाने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की गई है।

पहले क्या थी व्यवस्था?

पूर्व में यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती थी, तो उसके आश्रितों को अंतिम संस्कार के लिए ₹5,000 की आकस्मिक सहायता दी जाती थी। लेकिन यह राशि बाद में कर्मचारी के वेतन या देयकों से समायोजित कर ली जाती थी, यानी एक तरह से यह राशि वापस ले ली जाती थी। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से कर्मचारी संगठनों द्वारा आपत्ति जताई जा रही थी।

कर्मचारी संगठनों का कहना था कि एक ओर परिवार अपने सदस्य को खो देता है और दूसरी ओर दी गई मामूली सहायता भी बाद में वापस ले ली जाती है, जो पूरी तरह अमानवीय है। साथ ही बढ़ती महंगाई के दौर में ₹5,000 में अंतिम संस्कार जैसे आवश्यक कार्य भी पूरे करना मुश्किल हो गया था।

अब क्या बदला?

नए आदेश के तहत अब यह सहायता राशि ₹5,000 से बढ़ाकर ₹20,000 कर दी गई है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब इस राशि की कोई रिकवरी नहीं होगी। यानी आश्रितों को यह सहायता पूरी तरह अनुदान के रूप में मिलेगी।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि निगम अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। बस चालकों और परिचालकों को नियमित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।

कर्मचारी संगठनों की भूमिका

इस फैसले के पीछे रोडवेज कर्मचारी संगठनों की अहम भूमिका रही है। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश के महामंत्री गिरीश चंद्र मिश्र ने बताया कि यह मुद्दा पिछले महीने प्रबंध निदेशक के समक्ष उठाया गया था। उन्होंने इस विषय को गंभीरता से लिया और निदेशक मंडल की बैठक में इस पर सकारात्मक निर्णय लिया गया।

गिरीश चंद्र मिश्र ने कहा कि पहले की व्यवस्था में सहायता राशि बढ़ाने और रिकवरी बंद करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब इसे लागू किया जाना कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है। उन्होंने निदेशक मंडल और प्रबंध निदेशक का आभार व्यक्त किया।

कर्मचारी संघ ने भी जताई खुशी

उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के प्रांतीय मीडिया प्रभारी रजनीश मिश्रा ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया है। पहले जहां ₹5,000 की सहायता दी जाती थी और बाद में उसे वसूल लिया जाता था, वह व्यवस्था कर्मचारियों के परिवारों के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से बोझिल थी।

उन्होंने कहा कि संघ ने प्रबंधन से अनुरोध किया था कि इस राशि को बढ़ाया जाए और रिकवरी की प्रक्रिया को समाप्त किया जाए। अब जब सरकार और निगम ने इस पर सकारात्मक निर्णय लिया है, तो यह निश्चित रूप से कर्मचारियों के लिए राहत भरा कदम है।

सामाजिक और मानवीय पहल

यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार और परिवहन निगम की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। किसी भी कर्मचारी की मृत्यु उसके परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी होती है। ऐसे में अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक प्रक्रिया के लिए तत्काल और पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

इस कदम से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उनके परिवारों को भी यह भरोसा मिलेगा कि संकट की घड़ी में निगम उनके साथ खड़ा है।

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