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केंद्रीय बजट 2026: “विकसित भारत के नक्शे में ग्रामीण को भूली सरकार”, उत्तराखंड कांग्रेस ने बजट को बताया दिशाहीन

The Hill India News
Last updated: February 1, 2026 1:24 pm
The Hill India News
Published: February 1, 2026
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देहरादून। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर देवभूमि उत्तराखंड में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उत्तराखंड कांग्रेस ने इस बजट को ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ और ‘जुमलों का पिटारा’ करार देते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने संयुक्त रूप से इस बजट को आम आदमी की उम्मीदों पर तुषारापात बताया है।

Contents
हरीश रावत का हमला: “नक्शे में छूटा ग्रामीण भारत”गणेश गोदियाल की तीखी प्रतिक्रिया: “उद्योगपति मित्रों का पोषक है यह बजट”1. आंकड़ों की बाजीगरी और कोरी घोषणाएं2. उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों की उपेक्षामहंगाई और बेरोजगारी पर मौनपारदर्शिता का अभाव और ‘तीन कर्तव्य’ का नया जुमला“विकास दर दहाई तक पहुंचना नामुमकिन”

कांग्रेस नेतृत्व का आरोप है कि सरकार 2047 के विकसित भारत का सपना बेचते हुए वर्तमान की ज्वलंत समस्याओं—महंगाई, बेरोजगारी और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था—से आंखें मूंद रही है।


हरीश रावत का हमला: “नक्शे में छूटा ग्रामीण भारत”

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने बजट पर अपनी संक्षिप्त लेकिन मर्मभेदी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार का विजन वास्तविकता से कोसों दूर है। उन्होंने कहा: “वित्त मंत्री 2047 के विकसित भारत का काल्पनिक नक्शा खींच रही हैं, लेकिन इस लंबी लकीर को खींचते-खींचते वह आज के ग्रामीण भारत और उसकी बुनियादी जरूरतों को पूरी तरह भूल गई हैं। बिना गांव के विकास के ‘विकसित भारत’ की कल्पना बेमानी है।”

निर्मला सीतारमण जी का यह जो 9वां बजट है, यह 2047 के विकसित भारत का नक्शा खींचते-खींचते ग्रामीण भारत को भूल गया है, कृषि को भूल गया है, लघु उद्योग को भूल गया है, यह तीनों सेक्टर्स के एलोकेशन को देखिए तो इनकी वृद्धि रक्षा, रक्षा राष्ट्रीय आवश्यकता है। ट्रांसपोर्ट या दूसरे सेक्टर्स… pic.twitter.com/4kTltMqtBT

— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) February 1, 2026


गणेश गोदियाल की तीखी प्रतिक्रिया: “उद्योगपति मित्रों का पोषक है यह बजट”

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बजट को पूरी तरह दिशाहीन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट आम आदमी के हितों की रक्षा करने के बजाय केवल चुनिंदा ‘उद्योगपति मित्रों’ को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। गोदियाल ने सिलसिलेवार ढंग से बजट की खामियों को उजागर किया:

1. आंकड़ों की बाजीगरी और कोरी घोषणाएं

गोदियाल ने कहा कि वित्त मंत्री ने एक बार फिर जन आकांक्षाओं को पूरा करने और ‘सबका साथ-सबका विकास’ जैसी कोरी बातें की हैं। बजट में सात उच्च गति रेल कॉरिडोर और 100 स्मार्ट सिटी जैसे पुराने जुमलों को नए पैकेट में परोसा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य और किसानों की आय जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है।

2. उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों की उपेक्षा

कांग्रेस अध्यक्ष ने विशेष रूप से उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कहा कि एक ‘हिमालयी और आपदा प्रभावित राज्य’ होने के नाते उत्तराखंड को विशेष पैकेज की उम्मीद थी। लेकिन बजट में आपदा राहत के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया। रेल और एयर कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी उत्तराखंड को निराशा ही हाथ लगी है।


महंगाई और बेरोजगारी पर मौन

गोदियाल ने बजट को विकास अवरोधी करार देते हुए कहा कि पूरे भाषण में महंगाई कम करने का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा:

  • महंगाई का बोझ: मध्यम वर्ग और गरीब जनता महंगाई की चक्की में पिस रही है, लेकिन कर राहत या सब्सिडी के मोर्चे पर कुछ नहीं किया गया।

  • विदेशी कर्ज: देश का आम नागरिक बढ़ते विदेशी कर्ज के बोझ तले दब रहा है, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।

  • आय में वृद्धि का अभाव: सरकार किसानों और युवाओं की आय बढ़ाने का दावा तो करती है, लेकिन बजट में इसके लिए किसी वित्तीय आवंटन या नीतिगत बदलाव की जानकारी नहीं दी गई है।


पारदर्शिता का अभाव और ‘तीन कर्तव्य’ का नया जुमला

बजट में पेश किए गए ‘तीन कर्तव्यों’—आर्थिक वृद्धि में तेजी, जन आकांक्षाओं की पूर्ति और समावेशी विकास—को गोदियाल ने एक ‘नया जुमला’ बताया। उन्होंने बजट में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रमुख योजनाओं के लिए किए गए आवंटन की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि सरकार वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।


“विकास दर दहाई तक पहुंचना नामुमकिन”

गणेश गोदियाल ने अंत में कहा कि इस बजट के प्रावधानों को देखते हुए देश की अर्थव्यवस्था में विकास दर का दहाई का आंकड़ा छू पाना असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आम आदमी, गरीब किसान और युवाओं की उपेक्षा जारी रखी, तो देश की आर्थिक स्थिति और अधिक नाजुक हो जाएगी। कांग्रेस ने इस बजट को उत्तराखंड की जनता के साथ ‘धोखा’ करार दिया है।

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