हरिद्वार में जीएसटी विभाग की लगातार कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। इलेक्ट्रिकल कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर कथित छापेमारी और जांच की कार्रवाई के विरोध में सोमवार को व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और शहर में विरोध मार्च निकाला। हरिद्वार इलेक्ट्रिकल ट्रेड एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों के साथ अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया। व्यापारियों ने जीएसटी विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
आर्यनगर चौक से चंद्राचार्य चौक तक निकला विरोध मार्च
सोमवार को हरिद्वार में इलेक्ट्रिकल कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद कर विरोध दर्ज कराया। व्यापारियों ने आर्यनगर चौक से चंद्राचार्य चौक तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी सड़क पर नजर आए और जीएसटी विभाग की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की।
व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से इलेक्ट्रिकल और बिजली के सामान का कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों पर जीएसटी विभाग की ओर से लगातार जांच और छापेमारी की जा रही है। इससे कारोबारियों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। इससे पहले रविवार को भी व्यापारियों ने ज्वालापुर तहसील परिसर से चंद्राचार्य चौक तक विरोध रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया था।
रविवार के प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने सोमवार को दुकानें बंद रखने और जरूरत पड़ने पर सरकार को दुकानों की चाबियां सौंपने तक की चेतावनी दी थी। सोमवार को व्यापारियों ने दुकानें बंद कर अपना विरोध दर्ज कराया।
व्यापारियों ने लगाए ये आरोप
हरिद्वार इलेक्ट्रिकल ट्रेड एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई। व्यापारियों का आरोप है कि अधिकारियों की ओर से कम समय के नोटिस पर लाखों रुपये एडवांस टैक्स के नाम पर जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
राजीव गुप्ता का कहना है कि व्यापारियों को पहले से ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में मंदी, ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता चलन और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से जुड़े शुल्क जैसी समस्याओं के बीच यदि दुकानों और प्रतिष्ठानों पर लगातार कार्रवाई होती है तो इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ता है।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इस समय बाजार में कारोबार बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे समय में कार्रवाई को लेकर व्यापारी वर्ग में चिंता और असंतोष बढ़ रहा है।
हालांकि, जीएसटी विभाग की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर विभाग का पक्ष इन रिपोर्टों में सामने नहीं आया है। इसलिए व्यापारियों के आरोपों को उनके पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
“शिकायत है तो नोटिस देकर बुलाया जाए”—व्यापारी
व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी कारोबारी के कारोबार, टैक्स भुगतान या दस्तावेजों को लेकर विभाग को कोई शिकायत या संदेह है तो नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि व्यापारी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में भी पीछे नहीं हटेंगे।
व्यापारी नेताओं के मुताबिक, अधिकारियों को पहले नोटिस देकर संबंधित व्यापारी से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। यदि दस्तावेजों की जांच के बाद भी कोई कमी या अनियमितता सामने आती है तो विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।
राजीव गुप्ता ने कहा कि व्यापारी सरकार और विभागों के साथ सहयोग करते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर व्यापारियों के बीच भय का माहौल नहीं बनना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि उनका विरोध जांच प्रक्रिया के खिलाफ नहीं, बल्कि जिस तरीके से कार्रवाई किए जाने का वे आरोप लगा रहे हैं, उसके खिलाफ है।
“व्यापारी हर जांच में सहयोग करेगा, लेकिन जबरन कार्रवाई स्वीकार नहीं”
व्यापारी नेता प्रदीप कालरा ने कहा कि यदि जीएसटी विभाग किसी व्यापारी को दस्तावेजों की जांच के लिए बुलाता है तो व्यापारी वहां पहुंचकर जांच में सहयोग करेगा। उनका कहना है कि यदि जांच के बाद विभाग संतुष्ट नहीं होता है तो कानून के तहत कार्रवाई का अधिकार विभाग के पास है।
लेकिन व्यापारियों का आरोप है कि अचानक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई किए जाने से बाजार में तनाव की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि व्यापारी जांच और नियमों के पालन के लिए तैयार हैं, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे व्यापारियों में अनावश्यक भय की स्थिति पैदा न हो।
दूसरे व्यापारिक संगठनों का भी मिला समर्थन
इस विरोध की एक खास बात यह रही कि पहले जहां मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल कारोबारियों का संगठन ही जीएसटी कार्रवाई का विरोध कर रहा था, वहीं सोमवार को अन्य व्यापारिक संगठनों से जुड़े कारोबारी भी समर्थन में सामने आए।
रविवार के प्रदर्शन में भी बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए थे। रिपोर्टों के मुताबिक व्यापारियों ने स्पष्ट किया था कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जा सकता है।
व्यापारियों के एकजुट होने से अब यह मामला केवल इलेक्ट्रिकल कारोबारियों तक सीमित न रहकर व्यापक व्यापारी विरोध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। सोमवार को दुकानें बंद रखना इसी बढ़ते विरोध का संकेत माना जा रहा है।
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ा विवाद
हरिद्वार में व्यापारियों और जीएसटी विभाग के बीच बढ़ते विवाद का समय भी महत्वपूर्ण है। त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और व्यापारी इस दौरान कारोबार बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। व्यापारियों का कहना है कि ऐसे समय में लगातार जांच और छापेमारी की स्थिति से व्यापार प्रभावित हो सकता है।
व्यापारियों के अनुसार, बाजार पहले से ही ऑनलाइन कारोबार और अन्य आर्थिक दबावों से जूझ रहा है। ऐसे में यदि दुकानों पर लगातार विभागीय कार्रवाई होती है तो इससे ग्राहकों और कारोबार दोनों पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, जीएसटी व्यवस्था के तहत कर अनुपालन और जांच की प्रक्रिया विभागीय जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि व्यापारी संगठनों और जीएसटी विभाग के बीच इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।
“जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन होगा”
व्यापारी नेता संजीव नैय्यर ने भी जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी व्यापारी के खिलाफ शिकायत या संदेह है तो उसे नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा सकता है। उनके मुताबिक अचानक कार्रवाई से व्यापारियों में भय और असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही छापेमारी की कार्रवाई नहीं रोकी गई तो व्यापारी बड़ा आंदोलन शुरू कर सकते हैं। व्यापारियों ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को शहर के दूसरे बाजारों तक भी ले जाया जा सकता है।
व्यापारियों की ओर से पहले ही यह चेतावनी दी जा चुकी है कि यदि कार्रवाई जारी रही तो वे अपनी दुकानें बंद कर सरकार को चाबियां सौंपने का कदम उठा सकते हैं।
प्रशासन और व्यापारियों के बीच संवाद की जरूरत
हरिद्वार में सोमवार को हुए प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि व्यापारियों की शिकायतों का समाधान किस स्तर पर होता है। व्यापारी चाहते हैं कि विभाग उनके साथ बातचीत करे और जिन मामलों में दस्तावेज या टैक्स संबंधी कोई कमी है, उन्हें नियमानुसार स्पष्ट किया जाए।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि वे टैक्स व्यवस्था और कानून का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार हो।
वहीं, जीएसटी विभाग की ओर से यदि किसी व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है तो उसके पीछे विभागीय जांच और कर अनुपालन से जुड़े कारण हो सकते हैं। इन कारणों और संबंधित मामलों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर सामने आ सकेगी।
फिलहाल हरिद्वार में जीएसटी कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का आंदोलन तेज होता दिखाई दे रहा है। दुकानें बंद करने से लेकर विरोध मार्च और सरकार को चाबियां सौंपने की चेतावनी तक पहुंच चुके इस विवाद ने प्रशासन और व्यापारी संगठनों के बीच संवाद की जरूरत बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो व्यापारियों के आंदोलन के और व्यापक होने की संभावना है।
