जमुई: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट, अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ अब उन लोगों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है, जिन्होंने नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर और वायरल किया। पुलिस के मुताबिक, करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल को चिह्नित कर उनके खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है। टीम का नेतृत्व जमुई की SDPO दीप्ति मोनाली कर रही हैं। पुलिस वायरल वीडियो, पीड़ितों के बयान, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, वीडियो के आधार पर अब तक करीब सात लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से तीन को गिरफ्तार किया जा चुका है।
19 सितंबर की शाम सामने आया था पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम करीब 7 बजे की है। कक्षा 10 में पढ़ने वाले एक नाबालिग छात्र और छात्रा के बारे में बताया गया है कि वे कोचिंग के बाद मड़वा पहाड़ इलाके की ओर गए थे। दोनों एक-दूसरे को जानते हैं और एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते हैं। वापस लौटते समय रास्ते में कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया।
आरोप है कि युवकों ने दोनों को घेर लिया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई, जबकि उसके साथ मौजूद छात्र को भी पकड़कर परेशान किया गया। घटना के दौरान दोनों ने वहां से जाने देने की गुहार लगाई। बाद में इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और देखते ही देखते तेजी से वायरल हो गया।
पुलिस के अनुसार, घटना के तत्काल बाद पीड़ित पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर सहित अन्य सुरागों की मदद से पीड़ितों तक पहुंच बनाई। इसके बाद पुलिस ने उनके बयान के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
जमुई पुलिस के सामने सबसे पहले वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान करने की चुनौती थी। पुलिस ने वायरल फुटेज को खंगाला और उसमें मौजूद संदिग्धों की पहचान शुरू की। वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर करीब सात लोगों की पहचान होने की बात सामने आई है।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी और अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बाकी संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जाएगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नाबालिग भी शामिल हैं। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम ने पुलिस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि मामले में तीन नाबालिगों की गिरफ्तारी की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में कुछ की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है।
पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों पर भी कार्रवाई
इस मामले में पुलिस ने सिर्फ घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं की है, बल्कि वायरल वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है।
पुलिस के मुताबिक, वायरल वीडियो में नाबालिग पीड़िता की पहचान सामने आ रही थी। ऐसे वीडियो को बिना संवेदनशील जानकारी छिपाए साझा करना पीड़िता की निजता को प्रभावित करता है। इसी आधार पर पुलिस ने करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल को चिह्नित किया और उनके खिलाफ साइबर थाने में मामला दर्ज किया।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के वीडियो को डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट या शेयर न करें। खास तौर पर नाबालिग पीड़ित या पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी को सोशल मीडिया पर फैलाने से बचने को कहा गया है।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी अपराध की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद कई बार लोग बिना तथ्य की पुष्टि किए उसे अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करना शुरू कर देते हैं। इससे जांच प्रभावित होने के साथ-साथ पीड़ित की निजता और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
POCSO और अन्य धाराओं के तहत मामला
मामले में पुलिस ने POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्राथमिकी में POCSO एक्ट की संबंधित धाराएं भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
क्योंकि मामला नाबालिगों से जुड़ा है, इसलिए पीड़ित छात्र और छात्रा की पहचान सार्वजनिक करना उचित नहीं है। समाचार रिपोर्टों में भी उनकी पहचान से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचा जा रहा है।
SIT कर रही पूरे मामले की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए जमुई पुलिस ने विशेष जांच दल का गठन किया है। SIT की जिम्मेदारी घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान करने, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ करने और फरार संदिग्धों तक पहुंचने की है।
जांच टीम वायरल वीडियो के अलावा घटनास्थल के आसपास उपलब्ध अन्य फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में कितने लोग शामिल थे और वीडियो किसने बनाया था। पुलिस के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहे सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।
महिला आयोग ने भी मांगी रिपोर्ट
जमुई की घटना सामने आने के बाद महिला अधिकारों से जुड़े संस्थानों ने भी मामले का संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने बिहार पुलिस से घटना को लेकर रिपोर्ट मांगी है। आयोग की ओर से मामले में कार्रवाई और पीड़ितों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है।
मामले ने सार्वजनिक स्थानों पर नाबालिगों और महिलाओं की सुरक्षा तथा सोशल मीडिया पर संवेदनशील घटनाओं के वीडियो साझा किए जाने को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। घटना के बाद पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया, इलाके में गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन पहलुओं पर पुलिस की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से बढ़ी चिंता
जमुई की इस घटना में एक और गंभीर पहलू यह रहा कि घटना का वीडियो कथित तौर पर सोशल मीडिया तक पहुंच गया। इसके बाद वीडियो अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलने लगा। वीडियो के वायरल होने के बाद ही मामला बड़े स्तर पर सामने आया और पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की।
पुलिस अब वीडियो को आगे प्रसारित करने वाले अकाउंट्स की भी जांच कर रही है। करीब 120 प्रोफाइल पर मामला दर्ज किए जाने की कार्रवाई इसी जांच का हिस्सा है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी नाबालिग पीड़ित से जुड़ी संवेदनशील सामग्री को वायरल न करें और यदि ऐसा वीडियो सामने आता है तो उसे आगे साझा करने के बजाय संबंधित एजेंसी को सूचना दें।
फिलहाल इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि पुलिस की नजर अन्य संदिग्धों पर है। करीब सात लोगों की पहचान किए जाने की जानकारी सामने आई है। SIT पूरे मामले के प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
जमुई पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि किसी संवेदनशील अपराध की घटना का वीडियो सामने आने पर सोशल मीडिया यूजर्स की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि नाबालिग पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली सामग्री को वायरल करना या आगे साझा करना स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ऐसे मामलों में कानून को अपना काम करने देना और पीड़ित की निजता का सम्मान करना बेहद जरूरी है।
