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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > UKSSSC वाहन चालक भर्ती विवाद: मेरिट लिस्ट में ‘अजीबो-गरीब’ नामों और जेंडर पर घमासान, आयोग ने कहा- ‘अभिलेख सत्यापन में सीधे होंगे बाहर’
उत्तराखंडफीचर्ड

UKSSSC वाहन चालक भर्ती विवाद: मेरिट लिस्ट में ‘अजीबो-गरीब’ नामों और जेंडर पर घमासान, आयोग ने कहा- ‘अभिलेख सत्यापन में सीधे होंगे बाहर’

The Hill India News
Last updated: June 21, 2026 4:37 am
The Hill India News
Published: June 21, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया और विवादों का चोली-दामन का साथ एक बार फिर उजागर हुआ है। इस बार उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) द्वारा आयोजित वाहन चालक व प्रवर्तन चालक भर्ती परीक्षा की अनंतिम मेरिट सूची (Provisional Merit List) जारी होते ही प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नया बवंडर खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर बेरोजगार संगठनों के मंचों तक, मेरिट सूची में दर्ज अभ्यर्थियों के अजीबोगरीब नामों, जेंडर (लिंग) संबंधी विसंगतियों और चयन के कट-ऑफ पर तीखे सवाल दागे जा रहे हैं।

Contents
क्या है पूरा मामला? 31 मई को हुई थी परीक्षा‘एक्सप्लोर ज्ञान’ और ‘OKOL’ जैसे नामों पर सोशल मीडिया पर खिंचाईजेंडर और कट-ऑफ अंकों को लेकर भी खड़े हुए गंभीर सवालआयोग की सफाई: “जैसी सूचना अभ्यर्थी ने भरी, वैसा ही परिणाम दिखा”सख्त हिदायत: फर्जीवाड़ा करने वाले होंगे डिबार, दर्ज हो सकता है मुकदमायुवाओं और प्रशासन की नजरें ड्राइविंग टेस्ट पर

हालांकि, चौतरफा हमलों के बीच अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने फ्रंट फुट पर आकर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परिणाम में दिख रही विसंगतियां आयोग के स्तर से हुई कोई ‘डेटा एंट्री’ या टाइपिंग की गलती नहीं है, बल्कि यह खुद अभ्यर्थियों द्वारा ऑनलाइन आवेदन करते समय भरी गई त्रुटिपूर्ण जानकारियों का नतीजा है।

क्या है पूरा मामला? 31 मई को हुई थी परीक्षा

दरअसल, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने वाहन चालक और प्रवर्तन चालक के कुल 75 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए बीते 31 मई 2026 को राज्य के विभिन्न केंद्रों पर लिखित परीक्षा का आयोजन किया था। परीक्षा के बाद आयोग ने त्वरित गति से कार्य करते हुए 2 जून को प्रारंभिक उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी की, जिस पर 3 से 7 जून 2026 तक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आपत्तियां मांगी गईं।

विषय विशेषज्ञों द्वारा आपत्तियों के गहन परीक्षण के बाद संशोधित उत्तर कुंजी तैयार की गई। इसी संशोधित कुंजी के आधार पर 75 पदों के सापेक्ष छह गुना उम्मीदवारों को चुनते हुए 450 अभ्यर्थियों की एक अनंतिम श्रेष्ठता सूची जारी की गई, जिन्हें अगले चरण यानी ड्राइविंग दक्षता परीक्षा (Driving Skills Test) में शामिल होना है। लेकिन, जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, इसमें शामिल कुछ प्रविष्टियों ने हर किसी को चौंका दिया।

‘एक्सप्लोर ज्ञान’ और ‘OKOL’ जैसे नामों पर सोशल मीडिया पर खिंचाई

इस यूकेएसएसएससी वाहन चालक भर्ती विवाद को सबसे ज्यादा हवा तब मिली जब सोशल मीडिया पर मेरिट लिस्ट के कुछ स्क्रीनशॉट वायरल होने लगे। इस आधिकारिक सरकारी सूची में अभ्यर्थियों के नाम के आगे ‘एक्सप्लोर ज्ञान’ (Explore Gyan) और ‘OKOL’ जैसे शब्द लिखे हुए दिखाई दिए।

बेरोजगार युवाओं और नेटिजंस ने इसे आयोग की घोर लापरवाही बताते हुए ट्रोल करना शुरू कर दिया। लोगों का तर्क था कि एक प्रतिष्ठित सरकारी भर्ती संस्था की मुख्य सूची में ऐसे गैर-गंभीर और फर्जी प्रतीत होने वाले नाम आखिर कैसे जगह पा सकते हैं? क्या आयोग ने फॉर्मों की प्रारंभिक छंटनी (Scrutiny) नहीं की थी?

जेंडर और कट-ऑफ अंकों को लेकर भी खड़े हुए गंभीर सवाल

विवाद केवल नामों तक ही सीमित नहीं रहा। उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने इस सूची को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मेरिट सूची में व्यापक स्तर पर जेंडर संबंधी गड़बड़ियां हैं; कई महिला अभ्यर्थियों को पुरुष और पुरुष अभ्यर्थियों को महिला वर्ग में डाल दिया गया है, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और शुचिता संदिग्ध नजर आती है।

इसके अलावा, कुछ अभ्यर्थियों ने यह गंभीर दावा भी किया कि लिखित परीक्षा की उत्तर कुंजी से जब उन्होंने अपने अंकों का मिलान किया था, तो उनके अंक अधिक थे। इसके बावजूद उनका नाम सूची से नदारद है, जबकि उनसे बेहद कम संभावित अंक पाने वाले उम्मीदवार इस ६-गुना की सूची में जगह बनाने में कामयाब हो गए हैं। बेरोजगार संघ ने इस बिंदु को उठाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

आयोग की सफाई: “जैसी सूचना अभ्यर्थी ने भरी, वैसा ही परिणाम दिखा”

बढ़ते विवाद और युवाओं के आक्रोश को देखते हुए यूकेएसएसएससी के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया खुद सामने आए और उन्होंने आयोग का रुख पूरी तरह साफ किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी चयन प्रक्रिया डिजिटल और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर आधारित है।

चयन प्रक्रिया पर उठ रहे हर सवाल का बिंदुवार जवाब देते हुए आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने कहा:

“यह सूची पूरी तरह से अनंतिम (Provisional) है। सोशल मीडिया पर जिन ‘एक्सप्लोर ज्ञान’ या ‘OKOL’ जैसे नामों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, वे आयोग की कोई तकनीकी चूक नहीं हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन थी और उम्मीदवारों ने खुद अपने फॉर्म में यही नाम दर्ज किए थे। सॉफ्टवेयर ने केवल उन्हीं जानकारियों को परिणाम के रूप में प्रोसेस किया है। यही बात जेंडर संबंधी विसंगतियों पर भी लागू होती है। उम्मीदवारों ने जो लिंग (Male/Female) फॉर्म में चुना, वही सूची में प्रदर्शित हो रहा है।”

कम अंक वालों के चयन और अधिक अंक वालों के बाहर होने के दावों पर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कई अभ्यर्थी सिर्फ अपनी कार्बन कॉपी और प्रारंभिक उत्तर कुंजी के आधार पर हवा में अपने अंकों का आकलन कर लेते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि ओएमआर (OMR) शीट के मूल्यांकन के दौरान यदि किसी ने गोला गलत भरा है, एक ही प्रश्न के दो उत्तर अंकित किए हैं, या रोल नंबर व बुकलेट सीरीज भरने में तकनीकी गलती की है, तो उनके अंक स्वतः ही कट जाते हैं या ओएमआर रिजेक्ट हो जाती है। इसके बावजूद, यदि किसी को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह आयोग में नियमानुसार अपनी लिखित आपत्ति दर्ज करा सकता है, जिसका परीक्षण कराया जाएगा।

सख्त हिदायत: फर्जीवाड़ा करने वाले होंगे डिबार, दर्ज हो सकता है मुकदमा

आयोग ने साफ कर दिया है कि यह अंतिम चयन नहीं है, बल्कि अभी मुख्य परीक्षा के बाद के दो सबसे कड़े चरण बाकी हैं। पहला चरण वाहन संचालन दक्षता परीक्षा (ड्राइविंग टेस्ट) का होगा और उसके बाद सबसे महत्वपूर्ण ‘अभिलेख सत्यापन’ (Document Verification) का चरण आएगा।

जीएस मर्तोलिया ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान यदि कोई भी अभ्यर्थी अपने नाम, जेंडर, आयु, जाति या शैक्षणिक योग्यता के संबंध में मूल दस्तावेजों से इतर कोई भ्रामक या गलत जानकारी देते हुए पाया गया, तो उसकी उम्मीदवारी को उसी क्षण निरस्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जानबूझकर गलत विवरण भरकर राजकीय सेवा की चयन प्रक्रिया को बाधित या गुमराह करने वाले ऐसे तत्वों को भविष्य में आयोग की सभी परीक्षाओं से हमेशा के लिए प्रतिबंधित (Debar) करने पर भी विचार चल रहा है, और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

युवाओं और प्रशासन की नजरें ड्राइविंग टेस्ट पर

आयोग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जो ४५० अभ्यर्थी इस सूची में शामिल हैं, उनके लिए वाहन संचालन दक्षता परीक्षा की तिथियों और स्थान की घोषणा जल्द ही यूकेएसएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर अलग से की जाएगी। आयोग ने उम्मीदवारों को किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी है।

वर्तमान में, इस यूकेएसएसएससी वाहन चालक भर्ती विवाद ने उत्तराखंड के भीतर सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। अब सभी की निगाहें आगामी अभिलेख सत्यापन प्रक्रिया पर टिकी हैं, जहां दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि यह गड़बड़ी वाकई लापरवाह अभ्यर्थियों की जल्दबाजी का नतीजा थी या फिर व्यवस्था की परतों के पीछे कोई और कहानी छिपी है।

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