By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उच्चतम न्यायालय ने कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग से किया जवाब तलब
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > उच्चतम न्यायालय ने कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग से किया जवाब तलब
देशफीचर्ड

उच्चतम न्यायालय ने कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग से किया जवाब तलब

The Hill India News
Last updated: November 21, 2025 1:44 pm
The Hill India News
Published: November 21, 2025
Share
Image Source: ANI
SHARE

नई दिल्ली, 21 नवंबर: देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर जारी विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। केरल, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है।

Contents
क्या है विवाद?किन राज्यों में दायर हुई हैं याचिकाएँ?सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?निर्वाचन आयोग पर बढ़ा दबावकेरल और यूपी की याचिकाएँ क्यों चर्चा में?केरलउत्तर प्रदेशअब आगे क्या होगा?

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की तीन-न्यायाधीशीय पीठ ने कहा कि विभिन्न राज्यों से आई याचिकाओं में समान मुद्दे उठाए गए हैं, इसलिए उन सभी को एक साथ सुनना व्यावहारिक और न्यायसंगत होगा। अदालत ने निर्वाचन आयोग से इन याचिकाओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।


क्या है विवाद?

देशभर में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग ने कई राज्यों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू किया है। आयोग का कहना है कि:

  • मृतकों, डुप्लीकेट वोटरों, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके नागरिकों और अन्य त्रुटियों को हटाने के लिए एसआईआर आवश्यक है।
  • इससे मतदाता सूचियां अधिक सटीक और अद्यतन होंगी।
  • पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

लेकिन विपक्षी दलों, कई गैर-सरकारी संगठनों और कुछ नागरिक समूहों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि:

  • एसआईआर को पर्याप्त समय, पारदर्शिता और निष्पक्षता के बिना लागू किया जा रहा है।
  • कुछ राज्यों में लाखों वैध मतदाताओं के नाम काटे जाने का खतरा है।
  • यह प्रक्रिया संभावित रूप से “राजनीतिक रूप से प्रेरित” या “लक्षित” हो सकती है।
  • कई जगह बिना सूचना दिए सत्यापन किया जा रहा है।

इसी के चलते कई राज्यों में राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों ने एसआईआर को अदालत में चुनौती दी है।


किन राज्यों में दायर हुई हैं याचिकाएँ?

सुप्रीम कोर्ट में जिन राज्यों से एसआईआर के खिलाफ नई याचिकाएँ दाखिल हुई हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • केरल – जहाँ विपक्ष का आरोप है कि लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटाने का खतरा है व अधिकारियों ने प्रक्रिया जल्दबाजी में शुरू की।
  • उत्तर प्रदेश – कुछ राजनीतिक दलों ने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिना ग्राउंड-वेरिफिकेशन के नाम काटने की तैयारी हो रही है।
  • तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और त्रिपुरा – यहां भी मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर कई तकनीकी और प्रक्रियात्मक आपत्तियाँ उठाई गई हैं।

इन सभी मामलों में मुख्य आरोप यह है कि एसआईआर प्रक्रिया को पर्याप्त पारदर्शिता, नोटिस और सार्वजनिक भागीदारी के बिना लागू किया जा रहा है, जिससे वैध मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि:

  • सभी याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे समान प्रकृति के हैं।
  • मतदाताओं के अधिकार संवैधानिक और मौलिक महत्व रखते हैं।
  • निर्वाचन आयोग को अपना पक्ष स्पष्ट और विस्तृत रूप से रखना होगा।
  • अदालत मतदाता सूची में सुधार या पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनावश्यक दखल नहीं देना चाहती, लेकिन नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि निर्वाचन आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि:

  • एसआईआर किन कारणों से आवश्यक हुआ?
  • प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और निष्पक्षता को कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है?
  • क्या पर्याप्त नोटिस और शिकायत समाधान तंत्र उपलब्ध है?
  • क्या प्रत्येक नाम हटाने/संशोधन की प्रक्रिया को सत्यापित किया जाएगा?

निर्वाचन आयोग पर बढ़ा दबाव

निर्वाचन आयोग पहले से ही विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों की त्रुटियों, डुप्लीकेट नामों और फर्जी वोटिंग की शिकायतों से जूझ रहा है। आयोग ने दावा किया था कि एसआईआर एक सामान्य तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे हर वर्ष किया जाता है और यह किसी खास राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है।

लेकिन लगातार बढ़ती कानूनी चुनौतियों के चलते अब आयोग पर यह दबाव है कि वह:

  1. पारदर्शिता बढ़ाए
  2. विस्तृत दिशानिर्देश जारी करे
  3. प्रक्रिया में स्थानीय राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित करे
  4. और यह सिद्ध करे कि एसआईआर किसी भी तरह से वैध मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर रहा

अब अदालत ने जब औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है, तो आयोग को तय समय में अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दाखिल करनी होगी।


केरल और यूपी की याचिकाएँ क्यों चर्चा में?

केरल

केरल में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि:

  • कई विधानसभा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की तैयारी है।
  • मतदाताओं को पर्याप्त नोटिस नहीं दिया जा रहा।
  • बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को अत्यधिक दबाव में काम कराना पड़ रहा है।

राज्य में विपक्षी दलों ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ कदम” करार दिया है।

उत्तर प्रदेश

यूपी की याचिकाओं में कहा गया है कि:

  • बिना ग्राउंड रिपोर्ट और सत्यापन के नाम हटाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सूचना तक नहीं मिल रही।
  • एसआईआर का समय राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, जिससे संदेह पैदा होता है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने के बाद अब अगली सुनवाई में निर्वाचन आयोग को अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा। अदालत इन सभी याचिकाओं को एक साथ क्लब करके सुन सकती है, ताकि एक समान कानूनी दृष्टिकोण विकसित हो सके।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार:

  • यदि अदालत को लगे कि एसआईआर में पारदर्शिता की कमी है, तो वह आयोग को प्रक्रिया में सुधार के निर्देश दे सकती है।
  • यदि कोई गंभीर त्रुटि पाई जाती है तो कुछ राज्यों में पुनरीक्षण प्रक्रिया को रोकने या संशोधित करने का आदेश भी दिया जा सकता है।
  • वहीं, आयोग यह साबित कर सकता है कि यह एक नियमित और कानूनी प्रक्रिया है, जो मतदाता सूचियों को साफ-सुथरा बनाने के लिए जरूरी है।

मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है। उसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या पक्षपात सीधे नागरिकों के मतदान अधिकार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए एसआईआर जैसी प्रक्रिया पर उठे सवालों का जवाब देना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है—और अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर बारीकी से नजर रखेगा। आने वाली सुनवाई इस बात का फैसला करेगी कि एसआईआर प्रक्रिया आगे कैसे और किन शर्तों के साथ जारी रह पाएगी।

You Might Also Like

New Delhi: गृहमंत्री अमित शाह के बाद अब खेलमंत्री अनुराग ठाकुर से बातचीत को तैयार पहलवान : सूत्र
ब्रेकिंग न्यूज़ : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नकल विरोधी अध्यादेश 2023 को दी मंजूरी
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ख़ुफ़िया एजेंसियों का अलर्ट, आतंकी हमले की साजिश
मणिपुर से आई फिर हिंसा की खबर, खेत में सिंचाई कर रहे लोगों को बदमाशों ने उतारा मौत के घाट
Uttarakhand: मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर, सभी को दी खेल दिवस की शुभकामनाएं
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

नई साड़ी नहीं लाने पर पत्नी ने कुकर के ढक्कन से हमला कर ली पति की जान, बेनकाब हुई खौफनाक साजिश

The Hill India News
The Hill India News
July 22, 2026
‘मैं जीना चाहता हूं, लेकिन युवाओं के भविष्य की कीमत पर नहीं’ – सोनम वांगचुक का केंद्र सरकार को भावुक व कड़ा पत्र
देहरादून में ड्रग्स तस्करी पर बड़ा प्रहार: 30 लाख की MDMA और स्मैक बरामद, हाई-प्रोफाइल पार्टियों तक पहुंचने से पहले आरोपी गिरफ्तार
‘152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित’: शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, सरकार से मांगे जवाब और कार्रवाई
उत्तराखंड की एकल महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: मुख्यमंत्री धामी ने स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण में 488 महिलाओं को सौंपी ₹2.76 करोड़ से अधिक की सहायता राशि
ट्विशा शर्मा केस में नया मोड़: दो महिला जजों ने सुनवाई से किया इनकार, गिरीबाला की जमानत याचिका CBI कोर्ट ट्रांसफर
CJP प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज मामले में दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस; सबूत सुरक्षित रखने के दिए निर्देश
INS मालवन से बढ़ी भारतीय नौसेना की ताकत, समुद्र में दुश्मनों पर रखेगा पैनी नजर; आत्मनिर्भर भारत को मिला नया सुरक्षा कवच
उत्तराखंड के स्कूलों में मिड-डे मील की होगी रियल टाइम निगरानी, हर विद्यालय का सोशल ऑडिट अनिवार्य; शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं पर सरकार का बड़ा फोकस
लोकसभा में बड़ा एक्शन: महिला सांसदों पर कथित अभद्र टिप्पणी के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी निलंबित, संसद में मचा सियासी तूफान
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?