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फर्जी IAS का पूरा खेल बेनकाब! ससुराल से मिले ‘ट्रेनी अफसर’ के मोमेंटो, ‘भारत सरकार’ वाली इनोवा जब्त; हाई-फाई लाइफस्टाइल के भी मिले सुराग

The Hill India News
Last updated: August 27, 2026 11:34 am
The Hill India News
Published: August 27, 2026
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अशोकनगर/भोपाल: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में कथित तौर पर फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान कई अहम सुराग मिलने का दावा किया गया है। जांच के दौरान आरोपी के भोपाल स्थित घर और ससुराल से कथित तौर पर फर्जी आईएएस अधिकारी के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले मोमेंटो, दस्तावेजों की छायाप्रतियां और अन्य सामग्री बरामद की गई है।

Contents
9.80 लाख रुपये की ठगी की शिकायत से खुला मामलाभोपाल के घर से मिले मामले से जुड़े दस्तावेजससुराल से मिले कथित ‘IAS ट्रेनी’ के मोमेंटो‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा ने खींचा पुलिस का ध्यानकार चालक भी हिरासत में, पूछताछ जारीमहंगे होटल और हवाई यात्रा के भी मिले सुरागमूल दस्तावेज नहीं मिलने से बढ़ा शकक्या किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं तार?

मामले में पुलिस ने कथित तौर पर उस इनोवा कार को भी जब्त किया है, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखी पट्टी लगाई गई थी। पुलिस का आरोप है कि इसी वाहन के जरिए आरोपियों ने लोगों के बीच प्रभाव जमाने और खुद को सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करने की कोशिश की। कार के चालक को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में और कितने लोग शामिल हैं और आरोपियों ने कथित तौर पर कितने लोगों को अपना निशाना बनाया।

9.80 लाख रुपये की ठगी की शिकायत से खुला मामला

चंदेरी थाना क्षेत्र में 23 अगस्त 2026 को जय कुमार कोली और उनके साथियों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनसे फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर करीब 9 लाख 80 हजार रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने के बाद चंदेरी पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और भोपाल निवासी तृप्ति सिंह राजपूत तथा उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। इसके बाद पुलिस को अदालत से रिमांड मिला और आरोपियों को भोपाल ले जाकर उनके ठिकानों की तलाशी ली गई। इसी तलाशी के दौरान जांच को आगे बढ़ाने वाले कई दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद होने की बात कही जा रही है।

भोपाल के घर से मिले मामले से जुड़े दस्तावेज

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के बाग मुगलिया स्थित घर की तलाशी ली गई। यहां से मामले से संबंधित कई दस्तावेजों की छायाप्रतियां बरामद हुईं। पुलिस का कहना है कि ये वही दस्तावेज हो सकते हैं, जो कथित तौर पर शिकायतकर्ता पक्ष से लिए गए थे।

बरामद दस्तावेजों को पुलिस ने जब्त कर जांच में शामिल कर लिया है। अब इन दस्तावेजों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों ने कथित ठगी की योजना कैसे तैयार की थी और लोगों के सामने अपनी पहचान किस तरह स्थापित की।

जांचकर्ताओं के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि दस्तावेजों में किन लोगों की जानकारी मौजूद है और क्या आरोपियों ने इसी तरह अन्य लोगों से भी संपर्क किया था। यदि ऐसे और दस्तावेज सामने आते हैं तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।

ससुराल से मिले कथित ‘IAS ट्रेनी’ के मोमेंटो

पुलिस जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपी की ससुराल से कथित तौर पर बरामद किए गए ट्रेनी आईएएस अधिकारी से जुड़े मोमेंटो बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, अलकापुरी स्थित ससुराल की तलाशी के दौरान कुछ ऐसे मोमेंटो मिले, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर खुद को प्रशासनिक अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करने के लिए किया जा सकता था।

पुलिस को आशंका है कि इन मोमेंटो और अन्य सामग्री के जरिए लोगों पर प्रभाव डालने की कोशिश की जाती थी। किसी व्यक्ति के पास सरकारी पद से जुड़े प्रतीक, सम्मान या पहचान जैसी चीजें दिखाई देने पर आम लोगों के बीच उसके अधिकारी होने का भ्रम पैदा हो सकता है।

अब पुलिस इन मोमेंटो की वास्तविकता और उनके स्रोत की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन्हें कहां से हासिल किया गया और क्या इनका इस्तेमाल केवल दिखावे के लिए किया जाता था या इनके पीछे कोई सुनियोजित योजना थी।

‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा ने खींचा पुलिस का ध्यान

जांच के दौरान पुलिस के हाथ लगी इनोवा कार ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस के अनुसार, कार पर ‘भारत सरकार’ लिखी पट्टी लगाई गई थी। आरोप है कि इसी वाहन का इस्तेमाल तृप्ति राजपूत और उसके भाई द्वारा लोगों के सामने अपना रौब दिखाने के लिए किया जाता था।

सरकारी वाहन जैसा दिखने वाला वाहन और उस पर सरकारी पहचान से जुड़ी पट्टी किसी भी व्यक्ति पर प्रभाव डाल सकती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कार का इस्तेमाल किन-किन स्थानों पर किया गया और आरोपियों ने इसके जरिए किन लोगों से संपर्क किया।

वाहन को जब्त कर पुलिस ने जांच में शामिल कर लिया है। वाहन के दस्तावेज, उसके मालिकाना हक और उस पर सरकारी पहचान जैसी पट्टी लगाए जाने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

कार चालक भी हिरासत में, पूछताछ जारी

पुलिस ने इस मामले में इनोवा कार चलाने वाले भूपेंद्र बैरागी को भी हिरासत में लिया है। वह भोपाल के अयोध्या नगर का निवासी बताया गया है। पुलिस अब चालक से यह जानने की कोशिश कर रही है कि वह आरोपियों के संपर्क में कैसे आया और कार का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जाता था।

जांच एजेंसी के लिए चालक की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह आरोपियों के साथ विभिन्न स्थानों पर गया हो सकता है। उसके बयान से आरोपियों की गतिविधियों, यात्राओं और संपर्कों से संबंधित अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है।

हालांकि, चालक की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

महंगे होटल और हवाई यात्रा के भी मिले सुराग

जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की कथित हाई-फाई लाइफस्टाइल से जुड़े सुराग मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी महंगे होटलों में ठहरते थे और हवाई यात्रा भी करते थे।

अब पुलिस इन यात्राओं और खर्चों के स्रोत की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का मुख्य सवाल यह है कि आरोपियों के पास इन खर्चों के लिए धन कहां से आता था और क्या इसका संबंध कथित ठगी से था।

यदि खर्चों और कथित ठगी की रकम के बीच कोई संबंध सामने आता है तो यह जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। पुलिस वित्तीय लेनदेन और खर्चों से संबंधित रिकॉर्ड को भी खंगाल सकती है।

मूल दस्तावेज नहीं मिलने से बढ़ा शक

पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान कई जगहों से मूल दस्तावेजों के बजाय उनकी छायाप्रतियां मिलीं। इससे जांच एजेंसी को आशंका है कि मामले से जुड़े कुछ मूल दस्तावेजों को कथित तौर पर नष्ट या छिपाया गया हो सकता है।

इसी आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238 को भी मामले में जोड़ा है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यदि कोई दस्तावेज नष्ट किए गए हैं तो उन्हें किसने और किस उद्देश्य से हटाया या नष्ट किया।

यह पहलू जांच को और गंभीर बनाता है, क्योंकि दस्तावेज किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी या पहचान संबंधी अपराध में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।

क्या किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं तार?

इस पूरे मामले की सबसे बड़ी पहेली अब यही है कि क्या तृप्ति राजपूत और उसका भाई अकेले इस कथित फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे या उनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

पुलिस फिलहाल आरोपियों से जुड़े संपर्कों, दस्तावेजों, वाहन, वित्तीय लेनदेन और अन्य गतिविधियों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक अन्य स्थानों पर दर्ज मामलों को इस प्रकरण से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा गया है, लेकिन जांच जारी है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपियों ने सरकारी अधिकारी होने का कथित रूप से इस्तेमाल कर अन्य लोगों को भी प्रभावित किया था। यदि जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं तो यह फर्जी आईएएस प्रकरण और बड़ा हो सकता है।

फिलहाल इस मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। कथित फर्जी आईएएस पहचान, ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा, ट्रेनी अफसर के मोमेंटो, दस्तावेजों की छायाप्रतियां और आलीशान जीवनशैली के सुराग—इन सभी कड़ियों को जोड़कर पुलिस पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अब जांच से यह साफ होगा कि कथित फर्जीवाड़े का दायरा कितना बड़ा था, इसमें कितने लोग शामिल थे और आरोपियों ने सरकारी अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया।

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