काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में नेपाल में मौजूद कई भारतीय नागरिक भी आए हैं। भारत सरकार लगातार नेपाल प्रशासन के संपर्क में रहकर प्रभावित भारतीयों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास कर रही है। इसी बीच विदेश मंत्रालय ने नेपाल में भारतीय नागरिकों को लेकर महत्वपूर्ण और आधिकारिक जानकारी साझा की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। सरकार ने हालांकि यह स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति का “संपर्क से बाहर” होना जरूरी नहीं कि उसके लापता होने या घायल होने का संकेत हो। कई प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था पूरी तरह बाधित है, जिसके कारण वहां मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित करना बेहद मुश्किल हो गया है।
विदेश मंत्रालय की ओर से यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब नेपाल के कई इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क और संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे हालात में राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ भारतीय नागरिकों की लोकेशन का पता लगाना भारतीय अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
288 भारतीय नागरिकों से नहीं हो पा रहा संपर्क
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो अलग-अलग समूहों के साथ नेपाल की यात्रा पर गए थे। कुछ भारतीय नागरिक धार्मिक यात्रा पर थे, जबकि कुछ रोजगार और परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं।
जायसवाल ने बताया कि इन 288 लोगों में 73 भारतीय नागरिक त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। प्रभावित इलाके में संचार व्यवस्था बुरी तरह ठप होने के कारण परियोजना में काम करने वाले भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। विदेश मंत्रालय इन लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाने के लिए परियोजना के प्रमुख के संपर्क में है।
सरकार का कहना है कि प्रभावित इलाके में संचार लाइनें पूरी तरह से बाधित होने की वजह से वहां मौजूद लोगों से सीधे संपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में भारतीय अधिकारी स्थानीय प्रशासन और संबंधित परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर स्थिति की जानकारी जुटा रहे हैं।
21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया
राहत और बचाव अभियान के बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। यह जानकारी गुरुवार दोपहर 1 बजे तक की स्थिति के आधार पर दी गई।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि इन 21 लोगों का समूह तमिलनाडु से नेपाल की यात्रा पर गया था। उन्हें प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित स्थान पर लाया जा रहा है। इसके बाद उन्हें काठमांडू लाने और वहां से भारत वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
भारतीय दूतावास इन नागरिकों की लगातार सहायता कर रहा है। नेपाल में भारत के राजदूत ने भी सुरक्षित निकाले गए भारतीय नागरिकों से बातचीत की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद उनकी स्वदेश वापसी जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए दो समूह भी संपर्क से बाहर
विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय नागरिकों के कुछ समूह भी फिलहाल संपर्क से बाहर हैं। तमिलनाडु से यात्रा पर गए 37 और 49 भारतीय नागरिकों के दो बड़े समूहों से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।
बताया गया है कि ये दोनों समूह अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रा पर गए थे। इनमें एक समूह सम्राट ट्रैवल्स और दूसरा फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स के माध्यम से यात्रा पर गया था।
इन समूहों को लेकर उनके परिवारों में स्वाभाविक रूप से चिंता का माहौल है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि संपर्क न हो पाने को सीधे तौर पर किसी अनहोनी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में नेटवर्क और संचार सेवाओं के बाधित होने के कारण भी यात्रियों से संपर्क टूट सकता है।
सरकार संबंधित एजेंसियों और नेपाल प्रशासन के साथ मिलकर इन यात्रियों की स्थिति का पता लगाने में जुटी है।
पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय भी प्रभावित क्षेत्र में
विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक समूह नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे इलाके में मौजूद बताया गया है। यह वही क्षेत्र है, जहां प्राकृतिक आपदा ने व्यापक असर डाला है।
इन यात्रियों ने भी सम्राट ट्रैवल्स के माध्यम से यात्रा की थी। टिमुरे और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ एवं भूस्खलन के कारण परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। ऐसे में इन भारतीय नागरिकों तक राहत और सहायता पहुंचाना प्राथमिकता में शामिल है।
भारतीय अधिकारी नेपाल के स्थानीय प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं, ताकि प्रभावित भारतीयों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
अलग-अलग राज्यों के 61 भारतीय भी संपर्क से बाहर
विदेश मंत्रालय ने बताया कि रिचा टूर्स के माध्यम से यात्रा करने वाले विभिन्न राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों से भी फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा केरल के 33 भारतीय नागरिकों के बारे में भी अभी संपर्क स्थापित नहीं हो सका है।
इस तरह अलग-अलग समूहों और परियोजनाओं से जुड़े नागरिकों की संख्या मिलाकर 288 भारतीय नागरिक फिलहाल “अनकॉन्टैक्टेबल” श्रेणी में हैं। विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और नई जानकारी मिलने पर उसे सार्वजनिक करने की बात कही है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रभावित इलाकों में कई जगह संचार व्यवस्था बाधित है। नेटवर्क सेवाएं बंद होने और सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण राहत दलों को भी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
‘संपर्क से बाहर’ का मतलब लापता होना नहीं
विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया है। सरकार ने कहा है कि “संपर्क से बाहर” होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति लापता या घायल है।
दरअसल, प्राकृतिक आपदा के दौरान मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, टेलीफोन और अन्य संचार सेवाएं बाधित हो सकती हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति से कई घंटों या दिनों तक संपर्क नहीं हो पाना संभव है। इसलिए विदेश मंत्रालय ने लोगों से आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील की है।
यह स्पष्टीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों के परिवार भारत में उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सत्यापित जानकारी मिलने के साथ ही उसे साझा किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बातचीत
नेपाल में आपदा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से फोन पर बातचीत की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया और नेपाल की जनता के प्रति संवेदना जाहिर की।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल की जनता के साथ खड़ा है। भारत की ओर से नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश भी की गई।
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे में नेपाल में किसी भी बड़ी आपदा के समय भारत की ओर से सहायता की पेशकश महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारतीय दूतावास राहत अभियान में जुटा
नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास भी लगातार सक्रिय है। दूतावास नेपाल के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहा है।
दूतावास का ध्यान विशेष रूप से उन इलाकों पर है, जहां भारतीय नागरिकों के मौजूद होने की जानकारी मिली है और जहां संचार सेवाएं बाधित हैं। अधिकारियों की कोशिश है कि पहले नागरिकों की सही लोकेशन का पता लगाया जाए और उसके बाद आवश्यकता के अनुसार उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जाए।
राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ और अधिक भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी सामने आने की उम्मीद है। सरकार की प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा और जरूरत के अनुसार उन्हें चिकित्सा, भोजन, परिवहन तथा अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
नेपाल में आपदा ने बढ़ाई चुनौतियां
नेपाल में भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हुई है। पहाड़ी इलाकों में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सड़कें बंद होना, पुलों को नुकसान पहुंचना और संचार सेवाओं का ठप होना राहत अभियान के सामने बड़ी चुनौती बन जाता है।
भारतीय नागरिकों के लिए भी यही स्थिति मुश्किलें बढ़ा रही है। कई लोग समूहों में यात्रा कर रहे थे, इसलिए उनके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए ट्रैवल एजेंसियों, स्थानीय अधिकारियों और भारतीय दूतावास के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय का कहना है कि जैसे-जैसे सत्यापित जानकारी प्राप्त होगी, लोगों को अपडेट किया जाता रहेगा।
परिवारों को आधिकारिक अपडेट का इंतजार
नेपाल में संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों के परिवारों के लिए यह समय बेहद चिंता का है। कई परिवार अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी की खबर का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह स्थिति पर नजर रख रहा है और नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल सरकार के अनुसार 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
आने वाले समय में राहत और बचाव अभियान तेज होने के साथ संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है। भारत सरकार और भारतीय दूतावास की कोशिश है कि प्रभावित इलाकों में फंसे प्रत्येक भारतीय नागरिक तक मदद पहुंचाई जाए और उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जाए।
नेपाल की इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बीच भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा बनी हुई है। अब सभी की निगाहें राहत एवं बचाव अभियानों पर हैं और उम्मीद की जा रही है कि संपर्क से बाहर बताए जा रहे भारतीय नागरिकों के संबंध में जल्द सकारात्मक जानकारी सामने आएगी।
