मुंबई: सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और फिल्म की रिलीज के साथ ही इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। ‘केजीएफ’ जैसी ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी के बाद यश ने करीब चार साल तक बड़े पर्दे से दूरी बनाए रखी और इसके बाद जिस फिल्म के साथ वापसी की, उससे दर्शकों की उम्मीदें स्वाभाविक तौर पर काफी ऊंची थीं। फिल्म के बड़े बजट, भव्य सेटअप, यश की स्क्रीन प्रेजेंस और एक्शन को लेकर पहले से ही जबरदस्त माहौल बना हुआ था। लेकिन रिलीज के बाद फिल्म की कहानी और निर्देशन को लेकर उठ रहे सवालों ने इसकी चमक के बीच एक बड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है।
‘टॉक्सिक’ को लेकर करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट की चर्चा रही है। इतने बड़े स्तर पर बनी फिल्म से दर्शक केवल शानदार विजुअल्स और एक्शन ही नहीं, बल्कि मजबूत कहानी और प्रभावशाली स्क्रीनप्ले की भी उम्मीद कर रहे थे। यही वह मोर्चा है, जहां फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई दिखाई दे रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि अब फिल्म की निर्देशक गीतू मोहनदास का एक पुराना इंटरव्यू भी सोशल मीडिया और फिल्मी चर्चाओं में फिर सामने आ गया है।
गीतू मोहनदास का पुराना बयान क्यों हो रहा वायरल?
‘टॉक्सिक’ की रिलीज के बाद गीतू मोहनदास के उस पुराने बयान की चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने फिल्म बनाने के तरीके के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि वह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से पूरी तरह बंधकर काम करने में विश्वास नहीं रखतीं।
उनके मुताबिक, फिल्म की प्रक्रिया उनके लिए केवल पहले से तैयार स्क्रिप्ट को कैमरे के सामने उतार देने तक सीमित नहीं है। वह पहले कहानी लिखती हैं, लेकिन शूटिंग के दौरान परिस्थितियों, कलाकारों और रचनात्मक जरूरतों के हिसाब से उसमें बदलाव होते रहते हैं। इसके बाद एडिटिंग टेबल पर फिल्म का रूप एक बार फिर बदल सकता है।
यानी जिस कहानी और स्क्रिप्ट के साथ फिल्म की शुरुआत होती है, जरूरी नहीं कि दर्शकों को अंत में बिल्कुल वही फिल्म देखने को मिले। गीतू का मानना रहा है कि फिल्म निर्माण एक लगातार विकसित होने वाली प्रक्रिया है।
यही बयान अब ‘टॉक्सिक’ के संदर्भ में चर्चा का केंद्र बन गया है।
क्या रचनात्मक आजादी बनी कमजोरी?
गीतू मोहनदास का यह तरीका अपने आप में गलत नहीं कहा जा सकता। सिनेमा में कई निर्देशक शूटिंग और एडिटिंग के दौरान अपनी फिल्मों में बदलाव करते हैं। कई बार यही बदलाव किसी फिल्म को बेहतर और अधिक प्रभावशाली बना देते हैं। लेकिन सवाल तब खड़ा होता है जब बड़े बजट और बड़े स्टार वाली फिल्म में कहानी और स्क्रीनप्ले ही दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरे न उतरें।
‘टॉक्सिक’ को लेकर सामने आ रही प्रतिक्रियाओं में फिल्म के विजुअल ट्रीटमेंट और यश की मौजूदगी की चर्चा के साथ कहानी को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। ऐसे में गीतू का पुराना बयान लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या फिल्म को अंतिम रूप देते समय कहानी में हुए लगातार बदलाव उसके लिए नुकसानदेह साबित हुए?
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि फिल्म की कमियों के पीछे केवल यही कारण है। किसी फिल्म का अंतिम परिणाम कई पहलुओं पर निर्भर करता है, जिसमें कहानी, पटकथा, निर्देशन, संपादन, संगीत, प्रस्तुति और दर्शकों की अपेक्षाएं सभी शामिल होते हैं।
चार साल बाद यश की वापसी, इसलिए बढ़ी उम्मीदें
‘टॉक्सिक’ से यश की वापसी को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह था। ‘केजीएफ’ के बाद यश ने अपने अगले प्रोजेक्ट के चयन में काफी समय लिया। करीब चार साल तक बड़े पर्दे पर उनकी कोई नई फिल्म रिलीज नहीं हुई। इस लंबे अंतराल ने उनकी अगली फिल्म को लेकर उम्मीदों को और ऊंचा कर दिया।
यश के प्रशंसक उनसे एक ऐसी फिल्म की उम्मीद कर रहे थे, जो उनके पिछले काम से भी बड़ी और प्रभावशाली हो। ‘टॉक्सिक’ के बड़े बजट और भव्य स्तर ने इन उम्मीदों को और मजबूत किया। फिल्म को लेकर शुरुआती प्रचार में भी बड़े पैमाने की प्रस्तुति दिखाई गई।
लेकिन अब रिलीज के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फिल्म की कहानी उस विशाल पैमाने के साथ न्याय कर पाती है?
500 करोड़ के दांव का दबाव
इतने बड़े बजट वाली फिल्म के लिए केवल स्टार पावर पर्याप्त नहीं होती। दर्शक टिकट की कीमत और फिल्म से जुड़ी भारी-भरकम उम्मीदों के बदले एक संपूर्ण सिनेमाई अनुभव चाहते हैं। ‘टॉक्सिक’ में यश जैसे बड़े स्टार की मौजूदगी पहले से ही दर्शकों को आकर्षित करने के लिए काफी है, लेकिन फिल्म की लंबी अवधि की सफलता उसकी कहानी और दर्शकों की प्रतिक्रिया पर भी निर्भर करेगी।
यश ने ‘केजीएफ’ के जरिए एक बड़े एक्शन स्टार के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में उनकी अगली फिल्म से तुलना होना स्वाभाविक है। ‘टॉक्सिक’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती भी यही है कि वह दर्शकों को कुछ नया और यादगार कितना दे पाती है।
कहानी पर यश और गीतू दोनों ने किया काम
‘टॉक्सिक’ की कहानी पर यश और गीतू मोहनदास दोनों के काम करने की बात सामने आई है। ऐसे में फिल्म की मूल कहानी को लेकर दोनों की रचनात्मक भूमिका महत्वपूर्ण रही। हालांकि बतौर निर्देशक फिल्म को अंतिम सिनेमाई रूप देने की जिम्मेदारी गीतू मोहनदास की रही।
यही कारण है कि फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर होने वाली चर्चा में निर्देशक की भूमिका भी स्वाभाविक रूप से सामने आ रही है। एक निर्देशक की जिम्मेदारी केवल कलाकारों से अभिनय करवाने या कैमरा सेट करने तक सीमित नहीं होती। उसे कहानी के हर हिस्से को जोड़कर ऐसा सिनेमाई अनुभव तैयार करना होता है, जो दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रख सके।
क्या पुराना बयान ही असली वजह है?
फिल्म की रिलीज के बाद गीतू मोहनदास का पुराना इंटरव्यू चर्चा में जरूर है, लेकिन केवल उस बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि ‘टॉक्सिक’ की कहानी कमजोर होने का कारण स्क्रिप्ट में बदलाव ही है।
फिल्म निर्माण में बदलाव होना एक सामान्य रचनात्मक प्रक्रिया हो सकती है। शूटिंग के दौरान किसी दृश्य को बदलना, संवादों को संशोधित करना या एडिटिंग में कहानी की गति को बेहतर करना कई फिल्मों का हिस्सा रहा है। समस्या तभी पैदा होती है जब बदलावों के बाद फिल्म का मूल कथानक बिखरा हुआ महसूस होने लगे या कहानी और किरदारों के बीच संतुलन कमजोर हो जाए।
‘टॉक्सिक’ के मामले में दर्शकों की प्रतिक्रियाएं आने वाले दिनों में ज्यादा स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगी।
अब असली परीक्षा बॉक्स ऑफिस पर
यश की लोकप्रियता, फिल्म का विशाल बजट और रिलीज से पहले बना माहौल ‘टॉक्सिक’ को बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत दिलाने में मदद कर सकता है। लेकिन किसी फिल्म की वास्तविक सफलता केवल शुरुआती कमाई से तय नहीं होती। दर्शकों की प्रतिक्रिया, वर्ड ऑफ माउथ और लगातार होने वाली कमाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
अगर दर्शकों को फिल्म की कहानी और किरदार पसंद आते हैं तो शुरुआती आलोचनाओं के बावजूद फिल्म लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकती है। वहीं अगर कहानी को लेकर असंतोष व्यापक हुआ, तो बड़े बजट और स्टार पावर के बावजूद फिल्म को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
यश के लिए ‘टॉक्सिक’ क्यों है बेहद अहम?
यश के करियर में ‘टॉक्सिक’ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘केजीएफ’ के बाद उनसे उम्मीदों का स्तर काफी बढ़ गया है। अब उनके हर नए प्रोजेक्ट की तुलना उनकी पिछली सफल फिल्मों से होना तय है।
चार साल के लंबे इंतजार के बाद दर्शकों को जिस फिल्म का इंतजार था, वह आखिरकार सामने आ चुकी है। अब सवाल यह नहीं है कि ‘टॉक्सिक’ कितनी बड़ी फिल्म है, बल्कि सवाल यह है कि क्या यह दर्शकों के लिए उतनी ही बड़ी कहानी साबित होती है।
फिलहाल फिल्म की रिलीज के बाद कहानी और निर्देशन को लेकर बहस तेज है और इसी बहस के बीच गीतू मोहनदास का पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है। एक तरफ फिल्म का विशाल पैमाना और यश की दमदार मौजूदगी है, तो दूसरी तरफ कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर उठते सवाल हैं। अब आने वाले दिनों में दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन ही यह तय करेगा कि यश का 500 करोड़ से अधिक का यह बड़ा दांव कितना सफल साबित होता है।
