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महाराष्ट्र की राजनीति में ‘भूचाल’: रूपाली चाकंकर का महिला आयोग के बाद पार्टी पद से भी इस्तीफा, बलात्कारी धर्मगुरु अशोक खरात से रिश्तों पर घिरीं

The Hill India News
Last updated: March 28, 2026 3:41 am
The Hill India News
Published: March 28, 2026
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मुंबई/नासिक: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘महिला अस्मिता’ और ‘नैतिकता’ को लेकर छिड़ी बहस ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की कद्दावर नेता और महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकंकर ने शुक्रवार को पार्टी की महिला शाखा के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। स्वयंभू धर्मगुरु और बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के साथ कथित संबंधों और सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के बाद चाकंकर चौतरफा घिरी हुई थीं।

Contents
‘सुनेत्रा पवार की कॉल और पद का त्याग’क्या है पूरा ‘अशोक खरात’ विवाद?विपक्ष का तीखा हमला: ‘एपस्टीन कांड’ से हुई तुलनाचाकंकर की सफाई: “मेरा कोई सीधा संबंध नहीं”महाराष्ट्र की राजनीति पर असर

यह इस्तीफा उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की पत्नी और एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के साथ हुई एक महत्वपूर्ण फोन कॉल के बाद आया है, जिसे पार्टी के भीतर ‘डैमेज कंट्रोल’ की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

‘सुनेत्रा पवार की कॉल और पद का त्याग’

रूपाली चाकंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए लिखा, “आज सुबह एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार से फोन पर हुई विस्तृत बातचीत के बाद, मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की महिला शाखा के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रही हूं।” गौरतलब है कि इससे कुछ ही समय पहले चाकंकर ने महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से भी त्यागपत्र दे दिया था। एक ही सप्ताह के भीतर दो महत्वपूर्ण पदों से हटना यह दर्शाता है कि विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव और जनता के आक्रोश के बीच महायुति सरकार और एनसीपी किसी भी प्रकार का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

क्या है पूरा ‘अशोक खरात’ विवाद?

इस पूरे सियासी बवाल की जड़ में नासिक का रहने वाला एक स्वयंभू ज्योतिषी और अंकशास्त्री अशोक खरात है। खरात को हाल ही में एक 28 वर्षीय महिला की शिकायत पर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। महिला का आरोप है कि खरात ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया और उसे ब्लैकमेल भी किया।

विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर रूपाली चाकंकर और अशोक खरात की कई तस्वीरें और वीडियो वायरल होने लगे। इन दृश्यों में चाकंकर को खरात द्वारा आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों और कार्यक्रमों में प्रमुखता से शामिल होते देखा गया। चूंकि चाकंकर उस संस्था (महिला आयोग) की प्रमुख थीं जिसका काम महिलाओं को न्याय दिलाना और अपराधियों को सजा दिलवाना है, इसलिए आरोपी के साथ उनकी निकटता ने एक बड़ा नैतिक संकट पैदा कर दिया।

विपक्ष का तीखा हमला: ‘एपस्टीन कांड’ से हुई तुलना

रूपाली चाकंकर के बचाव के बावजूद विपक्ष ने इसे हाथ से जाने नहीं दिया। शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता संजय राउत ने इस प्रकरण की तुलना वैश्विक स्तर पर चर्चित ‘जेफ्री एपस्टीन’ कांड से करते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया। राउत ने सवाल उठाया कि “जब रक्षक ही भक्षक के साथ खड़ा दिखेगा, तो पीड़िता न्याय की उम्मीद किससे करेगी?”

वहीं, शिवसेना (UBT) की ही नेता सुषमा अंधारे ने चाकंकर के नैतिक अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आयोग जैसे संवेदनशील पद पर बैठे व्यक्ति की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आने के बाद इस्तीफा ही एकमात्र विकल्प था। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि यह साफ हो सके कि क्या खरात को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।

चाकंकर की सफाई: “मेरा कोई सीधा संबंध नहीं”

अपने ऊपर लगे आरोपों पर रूपाली चाकंकर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ जानबूझकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक किए गए अपने पत्र में स्पष्ट किया कि एक सार्वजनिक जीवन में होने के नाते वह कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी के व्यक्तिगत कदाचार में शामिल हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा, “खरात के वित्तीय लेन-देन या उसके द्वारा किए गए कथित अपराधों से मेरा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने पहले दिन से ही जांच में सहयोग करने और सत्य के साथ खड़े होने की बात कही है।“

महाराष्ट्र की राजनीति पर असर

रूपाली चाकंकर का इस्तीफा आगामी चुनावों से पहले एनसीपी और महायुति गठबंधन के लिए एक झटका माना जा रहा है। चाकंकर पार्टी का एक प्रमुख महिला चेहरा रही हैं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रखरता से अपनी बात रखती आई हैं। अब विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे सत्ता पक्ष के लिए बचाव करना मुश्किल हो रहा है। जानकारों का मानना है कि सुनेत्रा पवार के हस्तक्षेप का मतलब है कि पार्टी अपनी छवि को साफ-सुथरा रखने के लिए कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।

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