By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की टिप्पणी: “नेपाल और बांग्लादेश को देखें…, हमें अपने संविधान पर गर्व है”
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की टिप्पणी: “नेपाल और बांग्लादेश को देखें…, हमें अपने संविधान पर गर्व है”
देशफीचर्ड

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की टिप्पणी: “नेपाल और बांग्लादेश को देखें…, हमें अपने संविधान पर गर्व है”

The Hill India News
Last updated: September 10, 2025 2:02 pm
The Hill India News
Published: September 10, 2025
Share
SHARE

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को राष्ट्रपति के संदर्भ पर चल रही सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व है और यह दुनिया के सबसे मज़बूत लोकतांत्रिक ढाँचों में से एक है। उन्होंने पड़ोसी देशों की स्थिति का हवाला देते हुए कहा – “देखिए हमारे पड़ोसी राज्यों में क्या हो रहा है, नेपाल में भी हमने देखा।”

Contents
राज्यपालों की शक्तियों पर दलीलेंसीजेआई ने आंकड़ों पर जताई आपत्ति“हमारा संविधान 75 सालों से मज़बूत” – जस्टिस विक्रम नाथनेपाल और बांग्लादेश का जिक्र क्यों?SG की दलील: हर बिल की स्थिति अलगकोर्ट की साफ़ टिप्पणी: “आंकड़ों में नहीं जाएंगे”सुनवाई का अगला चरण

जस्टिस विक्रम नाथ ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि “बांग्लादेश में भी ऐसा ही हुआ।”


राज्यपालों की शक्तियों पर दलीलें

यह पूरा मामला संविधान में राज्यपालों की शक्तियों से जुड़ा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि राज्यपाल द्वारा विधेयकों को लंबे समय तक रोके रखने का मामला बेहद दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि उनके पास अनुभवजन्य आंकड़े (Empirical Data) हैं, जो यह साबित करते हैं।

एसजी मेहता ने कोर्ट को बताया:

  • 1970 से 2025 तक राज्यपालों के पास करीब 17,000 बिल भेजे गए।
  • इनमें से 90% बिल एक महीने के भीतर पास कर दिए गए।
  • अब तक केवल 20 विधेयक ऐसे हैं जिन्हें लंबित रखा गया या रोक दिया गया।

सीजेआई ने आंकड़ों पर जताई आपत्ति

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश गवई ने स्पष्ट कहा कि अदालत आंकड़ों में नहीं जाएगी। उन्होंने एसजी से कहा:

“हम आंकड़े नहीं ले सकते। यह उनके साथ न्याय नहीं होगा। आपने याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए आंकड़ों पर आपत्ति जताई थी। ऐसे में हम आपके आंकड़े कैसे ले सकते हैं?”

सीजेआई ने साफ कर दिया कि कोर्ट का फोकस संविधान की व्याख्या और सिद्धांतों पर रहेगा, न कि केवल आंकड़ों पर।


“हमारा संविधान 75 सालों से मज़बूत” – जस्टिस विक्रम नाथ

जस्टिस विक्रम नाथ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत का संविधान पिछले 75 सालों से पूरी तरह संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से चलता आ रहा है। उन्होंने कहा:

“इस दौरान चाहे 50 प्रतिशत बिल पास हुए हों या 90 प्रतिशत, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। असली मायने यह है कि हमारा संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है।”


नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र क्यों?

सीजेआई गवई ने हाल ही में नेपाल यात्रा भी की थी। वहां उन्होंने नेपाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश मानसिंह राउत से मुलाकात की थी और भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी जाकर दर्शन किए थे। शायद इसी संदर्भ में उन्होंने नेपाल की संवैधानिक परिस्थितियों की ओर इशारा किया।

नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बताने की कोशिश की कि पड़ोसी देशों में संविधानिक स्थिरता पर सवाल उठते रहे हैं, जबकि भारत का संविधान लगातार मज़बूत होता गया है।


SG की दलील: हर बिल की स्थिति अलग

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि कुछ ही विधेयक ऐसे होते हैं जो “अत्यंत आपत्तिजनक” या संविधान की भावना के खिलाफ होते हैं। ऐसे मामलों में राज्यपाल निर्णय लेने में अधिक समय लेते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हर बिल की स्थिति अलग होती है और उसी के आधार पर राज्यपाल अपना रुख तय करते हैं।


कोर्ट की साफ़ टिप्पणी: “आंकड़ों में नहीं जाएंगे”

कोर्ट ने दोहराया कि मामला केवल प्रतिशत या आंकड़ों पर आधारित नहीं है। सीजेआई गवई ने कहा कि यदि अदालत आंकड़ों के आधार पर फैसला देगी तो यह संविधान की मूल भावना के साथ न्याय नहीं होगा।


सुनवाई का अगला चरण

आज प्रेसिडेंशियल रेफरेंस का विरोध करने वाले राज्यों की दलीलें पूरी हुईं। कल से केंद्र सरकार की ओर से बहस जारी रहेगी। माना जा रहा है कि यह सुनवाई आगे भी कई संवैधानिक पहलुओं को स्पष्ट करेगी।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न केवल मौजूदा मामले से जुड़ी है बल्कि यह भारतीय संविधान की ताकत और उसकी स्थिरता पर भी एक बड़ा बयान है। नेपाल और बांग्लादेश का हवाला देते हुए कोर्ट ने यह संदेश दिया कि भारत का लोकतंत्र और संविधान विश्वसनीयता की मिसाल हैं.

You Might Also Like

उत्तराखंड: CM धामी ने ‘राज्य पशुधन मिशन योजनान्तर्गत’ लाभार्थियों को किए चेक वितरित, कहा- भराड़ीसैंण में खोला जायेगा बद्री गाय ट्रेनिंग सेण्टर
देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक में डीएम सविन बंसल सख्त
हिजाब पर हाईकोर्ट के फैसले से असहमत ओवैसी, बोले- ‘यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के खिलाफ’; SIR को लेकर मतदाताओं से की बड़ी अपील
Uttarakhand: “तीर्थाटन और पर्यटन मार्गों पर पार्किंग की हो समुचित व्यवस्था”- धामी, कैंची धाम के लिए शटल बस सेवा शुरू करने के निर्देश
Uttarakhand: ‘योजनाओं को धरातल पर उतारे अधिकारी, लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई’ CM धामी
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद कांग्रेस पर कार्रवाई से सियासत गरमाई, मुकदमों और वाहन जब्ती के आरोप पर कांग्रेस का बड़ा ऐलान—“अन्याय के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे”

The Hill India News
The Hill India News
September 5, 2026
450 साल पुराने वर्ल्ड मैप को बदलने की तैयारी, UN में ‘Correct the Map’ प्रस्ताव पास; अब नक्शे पर असली आकार में दिखेगा अफ्रीका
हल्द्वानी के कथित ‘शुद्धिकरण’ पर बेंगलुरु में जीरो एफआईआर, खड़गे के आरोपों से गरमाई सियासत; राहुल गांधी पर भी दर्ज है मामला
श्रीकृष्ण के रंग में रंगा उत्तराखंड, मंदिरों में गूंजे जयकारे और शंखनाद; लक्सर से नैनीताल और टिहरी तक दिखी आस्था की अद्भुत छटा
नौ साल से खाली लोकायुक्त का पद, कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा; बीजेपी बोली- भ्रष्टाचार के खिलाफ धामी सरकार की कार्रवाई जारी
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर कार्रवाई से मचा सियासी घमासान, इकरा हसन को रोका गया; भारी पुलिस फोर्स तैनात
पेंशन लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत! CM धामी ने एक क्लिक में जारी किए ₹147 करोड़, करीब 10 लाख लोगों के खातों में पहुंची अगस्त की पेंशन
देश की पहली ऑल-इन-वन किसान एप ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया शुभारंभ
क्या बदल जाएगा दुनिया का नक्शा? संयुक्त राष्ट्र में आज ऐतिहासिक वोटिंग, अफ्रीका के असली आकार को लेकर उठी बड़ी बहस
रानीपोखरी में गूंजी मातृशक्ति की आवाज, कांग्रेस के संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने खुलकर उठाए सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा के मुद्दे
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?