हैदराबाद: एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हिजाब और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। हैदराबाद के दारुस्सलाम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब से जुड़े फैसले पर अपनी असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह अदालत के इस फैसले से सहमत नहीं हैं और उनके अनुसार यह संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों के अनुरूप नहीं है। इसी कार्यक्रम में उन्होंने तेलंगाना में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी लोगों को जागरूक किया और मतदाताओं से अपने नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जांचने की अपील की।
ओवैसी ने हिजाब के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि स्कूल जाने वाली छात्रा के हिजाब पहनने के मामले में आए फैसले को लेकर उनका दृष्टिकोण अलग है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वास और उसके पालन से जुड़े मामलों में संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में इस फैसले को इस्लाम पर हमला तक बताया और कहा कि वह अदालत के निर्णय से सहमत नहीं हैं।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और अपनी बात रखने की संवैधानिक स्वतंत्रता हासिल है। ओवैसी का कहना था कि हिजाब पहनना किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय हो सकता है और इस मामले में अदालत के फैसले पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ओवैसी का बयान उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत दृष्टिकोण को दर्शाता है, जबकि किसी न्यायिक फैसले की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित अदालत के आदेश और उसके आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
हिजाब विवाद पर क्या बोले ओवैसी?
कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने कहा कि हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से हिजाब पहनकर स्कूल जाने से संबंधित मामले में फैसला दिया गया। उन्होंने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इससे सहमत नहीं हैं। उनका तर्क था कि धार्मिक पहचान और आस्था से जुड़े मामलों में संविधान के तहत प्राप्त अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि इस्लाम में क्या जरूरी है और क्या नहीं, इसका निर्धारण करने का अधिकार किसे है, यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। उन्होंने अपने संबोधन में इसे धार्मिक स्वतंत्रता के नजरिए से देखने की जरूरत बताई। उनके बयान के बाद हिजाब से जुड़ा यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है।
हिजाब को लेकर भारत में पहले भी कई मौकों पर कानूनी और राजनीतिक बहस होती रही है। स्कूलों और कॉलेजों में ड्रेस कोड, धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थानों के नियमों के बीच संतुलन का सवाल इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे मामलों में अदालतें संवैधानिक प्रावधानों, संस्थागत नियमों और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय देती हैं। इसी वजह से ओवैसी का बयान इस व्यापक बहस के राजनीतिक पक्ष को सामने रखता है।
SIR को लेकर लोगों को किया जागरूक
हिजाब के मुद्दे के अलावा ओवैसी ने तेलंगाना में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में अपना नाम जांचना प्रत्येक मतदाता के लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की ओर से 17 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई है और दावे तथा आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 17 सितंबर तक का समय दिया गया है।
ओवैसी ने लोगों से कहा कि उन्हें चुनाव आयोग की प्रक्रिया को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि किसी मतदाता को ईआरओ यानी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी की ओर से नोटिस मिलता है, तो उसमें सुनवाई की तारीख और समय की जानकारी होगी। उन्होंने संबंधित लोगों से निर्धारित तारीख पर उपस्थित होने की अपील की। यदि किसी कारण से व्यक्ति स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता, तो उन्होंने प्रक्रिया के तहत किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से अपनी बात रखने की संभावना का भी उल्लेख किया।
उनका कहना था कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपने नाम से संबंधित जानकारी की अनदेखी नहीं करनी चाहिए और समय सीमा के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें?
ओवैसी ने उन लोगों को भी संदेश दिया जिनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से अपना दावा प्रस्तुत किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया है और जिनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं दिखाई दे रहा, वे फॉर्म-6 भरकर उसे संबंधित बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ के पास जमा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं मिला था, उनके लिए भी फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन करना महत्वपूर्ण है।
ओवैसी ने इस प्रक्रिया में सहायता के लिए दारुस्सलाम स्थित मजलिस कार्यालय के खुले रहने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी लंबे समय से लोगों को एसआईआर से संबंधित जानकारी और सहायता उपलब्ध करा रही है। उनका कहना था कि पार्टी कार्यालय में बड़ी संख्या में लोगों को मार्गदर्शन दिया गया है और एसआईआर से संबंधित काम के लिए कार्यालय का एक बड़ा हिस्सा समर्पित किया गया है।
दस्तावेजों को लेकर भी दी जानकारी
ओवैसी ने अपने संबोधन में दस्तावेजों से संबंधित आवश्यकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम 2002 के रिकॉर्ड या संबंधित पोर्टल में उपलब्ध नहीं है, लेकिन उसने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किया है, तो दस्तावेजों की आवश्यकता व्यक्ति की जन्मतिथि के आधार पर निर्धारित हो सकती है।
उनके अनुसार, 30 जून 1987 से पहले जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए निर्धारित दस्तावेजों की सूची में से कोई एक दस्तावेज मांगा जा सकता है। वहीं, 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म लेने वाले व्यक्ति के मामले में स्वयं का एक दस्तावेज और माता या पिता में से किसी एक का दस्तावेज आवश्यक हो सकता है।
उन्होंने अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए अलग-अलग दस्तावेजी जरूरतों का भी उल्लेख किया। ओवैसी ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए अपने आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें और चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया तथा समयसीमा का पालन करें।
SIR को लेकर ओवैसी ने बताए आंकड़े
ओवैसी ने तेलंगाना की ड्राफ्ट मतदाता सूची से जुड़े कुछ आंकड़े भी सामने रखे। उनके अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 2,64,87,213 मतदाता दर्ज हैं। इनमें से 60,50,918 मतदाताओं को ‘अनॉमली’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि 73,29,235 मतदाताओं को एएसडीडी यानी Absent, Shifted, Dead and Duplicate श्रेणी में चिह्नित किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम ‘अनॉमली’ श्रेणी में हैं, उन्हें ईआरओ की ओर से नोटिस मिल सकता है। ऐसे लोगों को नोटिस में दी गई जानकारी के अनुसार अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित दस्तावेज या जवाब प्रस्तुत करना होगा।
ओवैसी ने कहा कि मतदाताओं के पास दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 17 सितंबर तक का समय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें, बल्कि जल्द से जल्द ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम और उससे संबंधित विवरण जांच लें।
SIR पर राजनीतिक बहस भी तेज
तेलंगाना में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज होती जा रही है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सही मतदाता सूची तैयार करने के उद्देश्य से किया जाता है, लेकिन इसमें नाम हटने, स्थान परिवर्तन, मृत्यु या दोहरे पंजीकरण जैसी स्थितियों को लेकर राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी चिंताएं और दावे हैं।
ओवैसी ने अपने संबोधन में लोगों से विशेष रूप से सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल कर सकता है। वहीं, यदि किसी व्यक्ति को अनॉमली श्रेणी में रखा गया है, तो उसे ईआरओ की ओर से मिलने वाले नोटिस का जवाब देना चाहिए।
उनका संदेश मुख्य रूप से यही रहा कि मतदाताओं को प्रक्रिया से दूर नहीं रहना चाहिए और अपने अधिकारों तथा आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी भी भ्रम की स्थिति में संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेनी चाहिए और तय समयसीमा के भीतर अपनी आपत्ति या दावा दर्ज कराना चाहिए।
ओवैसी ने कहा- पार्टी लगातार कर रही है मदद
एआईएमआईएम प्रमुख ने दावा किया कि उनकी पार्टी पिछले करीब ढाई महीने से एसआईआर के मुद्दे पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दारुस्सलाम स्थित मजलिस कार्यालय में हजारों लोगों को इस प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कार्यालय में आने वाले लोगों को मतदाता सूची, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उनका कहना था कि पार्टी ने एसआईआर से जुड़े मामलों में लोगों की सहायता के लिए कार्यालय का एक बड़ा हिस्सा विशेष रूप से निर्धारित किया है।
मतदाताओं के लिए क्या है सबसे जरूरी?
ओवैसी के बयान के बाद एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि मतदाता अपने नाम और विवरण की जांच करें। यदि नाम ड्राफ्ट सूची में मौजूद है, तो भी उसमें किसी प्रकार की गलती होने पर उसे समय रहते ठीक कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। वहीं, यदि नाम सूची में नहीं है, तो संबंधित प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल करना जरूरी होगा।
जिन लोगों को ईआरओ की ओर से नोटिस मिलता है, उन्हें उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नोटिस में दी गई तारीख और समय के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करना महत्वपूर्ण होगा। इसी तरह, दस्तावेजों से संबंधित जरूरतों को पहले से समझ लेना भी लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
कुल मिलाकर, हैदराबाद के दारुस्सलाम में ओवैसी का संबोधन दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहा। एक तरफ उन्होंने हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी तीखी असहमति जाहिर करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में दिए अधिकारों के संदर्भ में उठाया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने तेलंगाना की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं को जागरूक किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जांचें, किसी भी गलती या नाम गायब होने की स्थिति में निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज कराएं और ईआरओ की ओर से मिलने वाले नोटिस का समय पर जवाब दें।
हिजाब के मुद्दे पर ओवैसी की टिप्पणी जहां राजनीतिक और संवैधानिक बहस को आगे बढ़ाने वाली है, वहीं एसआईआर को लेकर उनकी अपील सीधे तौर पर मतदाताओं को अपनी मतदाता सूची की स्थिति जांचने और चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रहने का संदेश देती है। आने वाले दिनों में दोनों मुद्दों पर राजनीतिक और कानूनी चर्चा और तेज होने की संभावना है।
