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काशीपुर में डिजिटल डकैती: फर्जी बैंक अधिकारी बन वृद्ध को भेजा ‘व्हाट्सएप लिंक’, दो दिन में 9 ट्रांजेक्शन कर उड़ाए ₹29 लाख, रुद्रपुर साइबर सेल में मुकदमा दर्ज

रुद्रपुर/काशीपुर: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले से साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। काशीपुर में सक्रिय शातिर साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग व्यक्ति की जीवन भर की जमा पूंजी पर डाका डाल दिया। शातिरों ने खुद को प्रतिष्ठित बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर वृद्ध को अपने झांसे में लिया और व्हाट्सएप (WhatsApp) के माध्यम से एक संदिग्ध व फर्जी बैंक एप्लीकेशन की फाइल भेजकर उनके खाते की अत्यंत गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद अपराधियों ने तकनीकी कड़ियों का फायदा उठाते हुए महज 48 घंटों के भीतर 9 अलग-अलग ट्रांजेक्शनों के जरिए खाते से 29 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि पार कर दी। पीड़ित बुजुर्ग की लिखित शिकायत पर कुमाऊं परिक्षेत्र की रुद्रपुर साइबर क्राइम पुलिस ने संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।

विश्वास का जाल: शाम के वक्त आई एक ‘फर्जी’ कॉल और बदल गई जिंदगी

यह पूरा मामला उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर अंतर्गत जसपुर खुर्द स्थित गढ़वाल सभा इलाके का है। यहां के मूल निवासी सुधेश कुमार (एक वृद्ध नागरिक) का स्थानीय एक मुख्य बैंक शाखा में अपनी पत्नी या परिवार के सदस्य के साथ एक संयुक्त खाता (Joint Account) संचालित होता है। घटना की शुरुआत 6 जून की शाम को हुई, जब सुधेश कुमार अपने घर पर मौजूद थे।

करीब साढ़े चार बजे उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने बेहद पेशेवर और सधे हुए लहजे में बात करते हुए खुद को उनके बैंक का मुख्य अधिकारी बताया। ठग ने सुधेश कुमार को झांसे में लेते हुए कहा कि उनके खाते की डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं को सुचारू रूप से चालू रखने के लिए बैंक की नई ई-बैंकिंग एप्लीकेशन (E-Banking App) को अपडेट और उपयोग करना बेहद अनिवार्य है, अन्यथा उनका खाता ब्लॉक किया जा सकता है।

व्हाट्सएप पर आया ‘डेथ ट्रैप’: फर्जी एप डाउनलोड करते ही उड़ा डेटा

वृद्ध सुधेश कुमार कॉल करने वाले की पेशेवर आवाज और बैंक का नाम सुनकर उसके झांसे में आ गए। इसके तुरंत बाद, कथित बैंक अधिकारी ने उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक अज्ञात फाइल (APK File या लिंक) भेजी और सुधेश कुमार से कहा कि वे इस फाइल को डाउनलोड करें और इसके भीतर खुलने वाले ऑनलाइन फॉर्म में अपनी बैंकिंग जानकारियां दर्ज करें।

सुधेश कुमार ने जैसे ही उस फाइल को खोला, उनके मोबाइल में एक अज्ञात फॉर्म खुला, जिसमें उन्होंने बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारियां दर्ज कर दीं। हालांकि, फॉर्म भरने के बाद भी वह एप्लीकेशन ठीक से काम नहीं कर रही थी। सुधेश कुमार को कुछ अजीब लगा और अनहोनी का संदेह होने पर उन्होंने तुरंत उस फर्जी बैंक एप को बंद कर दिया और फोन काट दिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और शातिर हैकर्स ‘स्क्रीन शेयरिंग’ या ‘डेटा मैलवेयर’ के जरिए उनके मोबाइल का पूरा एक्सेस हासिल कर चुके थे।

48 घंटे में 9 बार प्रहार: जब मोबाइल स्क्रीन पर दिखे ‘डेबिट’ के मैसेज

असली खौफनाक मंजर अगले दिन सामने आया। 7 जून को जब सुधेश कुमार ने सामान्य रूप से अपने मोबाइल को चेक किया और बैंक से आए टेक्स्ट मैसेजेस (SMS) को देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। 6 जून की शाम से लेकर 7 जून के भीतर उनके संयुक्त खाते पर बैक-टू-बैक प्रहार किए गए थे।

अपराधियों ने दो दिनों के भीतर उनके खाते से कुल 9 अलग-अलग अवैध ट्रांजेक्शन किए थे। इन नौ ट्रांजेक्शनों के जरिए शातिरों ने सुधेश कुमार के खाते से कुल 29,00,022 रुपये (इक्कीस लाख बाइस रुपये) की विशाल धनराशि अलग-अलग फर्जी खातों में ट्रांसफर कर ली थी। बुजुर्ग का खाता पूरी तरह खाली हो चुका था और उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई अपराधियों की जेब में जा चुकी थी।

पीड़ित ने दिखाई सूझबूझ: तुरंत कराया खाता सीज, पुलिस आई एक्शन में

इतनी बड़ी ठगी का अहसास होते ही सुधेश कुमार ने घबराने के बजाय तत्काल सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन (1930) पर कॉल करके मामले की प्रारंभिक शिकायत दर्ज कराई, ताकि शुरुआती स्तर पर पैसों के ट्रांजेक्शन को होल्ड किया जा सके।

इसके तुरंत बाद, वे सीधे संबंधित बैंक शाखा पहुंचे और अधिकारियों को पूरी आपबीती बताते हुए अपने खाते को पूरी तरह फ्रीज (सीज) करवा दिया, ताकि बची हुई कोई राशि या अन्य ट्रांजेक्शन न हो सकें। इसके बाद पीड़ित ने कुमाऊं परिक्षेत्र की प्राधिकृत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, रुद्रपुर में आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी।

कुमाऊं साइबर सेल ने संभाला मोर्चा: जांच में जुटे तकनीकी एक्सपर्ट्स

मामले की संवेदनशीलता और 29 लाख रुपये से अधिक की बड़ी रकम की ठगी को देखते हुए रुद्रपुर साइबर पुलिस तुरंत एक्टिव मोड में आ गई है। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन कुमाऊं परिक्षेत्र रुद्रपुर में अज्ञात ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।

साइबर इंस्पेक्टर धीरेंद्र पंत का आधिकारिक बयान: “मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की एक विशेष तकनीकी टीम का गठन किया गया है। सुधेश कुमार द्वारा जिन नंबरों और व्हाट्सएप लिंक्स की जानकारी दी गई है, उन्हें सर्विलांस पर ले लिया गया है। जिन 9 बैंक खातों में ठगी की यह रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी चेन को खंगाला जा रहा है ताकि उन बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कराकर धनराशि की रिकवरी की जा सके। आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने और उनकी पहचान स्थापित करने के लिए आवश्यक विधिक कार्रवाई तेज कर दी गई है।”

राष्ट्रीय मीडिया की चेतावनी: अनजान लिंक्स और APK फाइल्स से रहें दूर

यह घटना एक बार फिर देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और विशेष रूप से बुजुर्ग नागरिकों को निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति को रेखांकित करती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बैंक का अधिकारी कभी भी व्हाट्सएप पर कोई ऐप या फाइल डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता है। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक कर्मी बताकर आपके मोबाइल पर एपीके (APK) फाइल भेजता है, तो वह शत-प्रतिशत फ्रॉड है। ऐसे मामलों में सतर्कता ही एकमात्र बचाव है।

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