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बांग्लादेश में खसरे का बढ़ता कहर: साधारण रैशेज बन रहे जानलेवा, समय पर टीकाकरण ही सबसे बड़ा बचाव

The Hill India News
Last updated: April 8, 2026 6:53 am
The Hill India News
Published: April 8, 2026
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बांग्लादेश इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है, जहां खसरा (मीजल्स) तेजी से फैल रहा है और अब तक 118 लोगों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, देशभर में लगभग 2000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या छोटे बच्चों की है। अस्पतालों में मरीजों का इलाज जारी है, लेकिन इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए रोकथाम और जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है।

Contents
क्या है खसरा और क्यों है खतरनाक?खसरे के लक्षण: शुरुआत में साधारण, बाद में गंभीरक्यों बढ़ रहा है खतरा?बचाव ही सबसे बड़ा उपायसंक्रमित व्यक्ति से दूरी जरूरीसमय पर डॉक्टर से संपर्क करें

खसरा एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसे अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों में साधारण रैश या सामान्य सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं। यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर पहचान और उपचार न किया जाए, तो यह बीमारी निमोनिया, डायरिया और यहां तक कि दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

क्या है खसरा और क्यों है खतरनाक?

खसरा एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है, जो मुख्य रूप से हवा के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो वायरस के कण हवा में फैल जाते हैं और आसपास मौजूद लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। यह वायरस हवा में या सतहों पर लगभग 2 घंटे तक सक्रिय रह सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।

यह बीमारी खासतौर पर उन बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक होती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है या जिन्हें समय पर टीकाकरण नहीं मिला होता। विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, खसरा दुनिया की सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक है।

खसरे के लक्षण: शुरुआत में साधारण, बाद में गंभीर

खसरे के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के लगभग 10 से 14 दिनों बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में यह बीमारी सामान्य फ्लू जैसी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे इसके लक्षण गंभीर रूप ले लेते हैं।

सबसे पहले तेज बुखार आता है, जो 104°F तक पहुंच सकता है। इसके साथ सूखी खांसी, नाक बहना और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मरीज की आंखें लाल हो जाती हैं और उनमें जलन या पानी आने लगता है।

इस बीमारी की एक खास पहचान है “कोप्लिक स्पॉट्स”, जो मुंह के अंदर गालों की भीतरी सतह पर छोटे-छोटे सफेद केंद्र वाले लाल धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। इसके बाद शरीर पर लाल रंग के चकत्ते निकलने लगते हैं, जो आमतौर पर चेहरे से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाते हैं।

इसके अलावा थकान, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं, जो मरीज की हालत को और बिगाड़ सकती हैं।

क्यों बढ़ रहा है खतरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि खसरे के मामलों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण टीकाकरण की कमी और जागरूकता का अभाव है। कई क्षेत्रों में बच्चों को समय पर MMR (Measles, Mumps, Rubella) वैक्सीन नहीं मिल पाती, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है।

इसके अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों, खराब स्वच्छता और कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं वाले क्षेत्रों में यह बीमारी ज्यादा तेजी से फैलती है। बांग्लादेश में हालात इसी वजह से गंभीर होते जा रहे हैं।

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

खसरे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। डॉक्टरों के अनुसार, MMR वैक्सीन की दो खुराकें इस बीमारी से सुरक्षा प्रदान करती हैं। पहली खुराक 12 से 15 महीने की उम्र में और दूसरी 4 से 6 साल की उम्र में दी जाती है। अगर किसी व्यक्ति को बचपन में यह टीका नहीं लगा है, तो वह वयस्क अवस्था में भी डॉक्टर की सलाह से इसे लगवा सकता है।

टीकाकरण के अलावा कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर भी इस बीमारी से बचा जा सकता है। जैसे—हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोना, खांसते या छींकते समय मुंह को ढकना और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत फेंक देना।

संक्रमित व्यक्ति से दूरी जरूरी

यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति खसरे से संक्रमित है, तो उससे दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति को कम से कम 4 दिन तक आइसोलेट रहना चाहिए, ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, खासकर जब वहां वेंटिलेशन सही न हो। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से ऐसे वातावरण से दूर रखना चाहिए।

समय पर डॉक्टर से संपर्क करें

अगर किसी व्यक्ति को खसरे के लक्षण दिखाई देते हैं या वह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, संपर्क में आने के 72 घंटों के भीतर वैक्सीन लगवाने से गंभीर संक्रमण को रोका जा सकता है।

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