देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने सरकारी विद्यालयों में संचालित प्रधानमंत्री पोषण (मिड-डे मील) और समग्र शिक्षा कार्यक्रम को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी विद्यालयों में मिड-डे मील व्यवस्था का नियमित सोशल ऑडिट कराया जाए और इसके साथ ही रियल टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म विकसित किया जाए। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्यालय में यदि किसी दिन भोजन तैयार नहीं होता है या वितरण में कोई बाधा आती है, तो उसकी जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचे और उसी दिन आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाला पोषण केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। यदि किसी कारणवश किसी स्कूल में भोजन नहीं बनता है तो उसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की उपस्थिति, स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता पर पड़ता है। इसलिए भोजन की गुणवत्ता, समय पर वितरण और निर्धारित पोषण मानकों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सोशल ऑडिट के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भी योजना की निगरानी की जाए, जिससे पारदर्शिता बढ़े और समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित हो।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मिड-डे मील से जुड़ी प्रत्येक घटना की निगरानी राज्य स्तरीय विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन की जाएगी। यदि किसी विद्यालय में भोजन नहीं बनने या वितरण में किसी प्रकार की समस्या सामने आती है, तो उसकी रिपोर्ट तत्काल राज्य परियोजना निदेशक, संबंधित जिलाधिकारी तथा मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद संबंधित कारणों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कर उनके स्थायी समाधान के लिए शासन स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में स्किल डेवलपमेंट और रोजगारोन्मुख शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विद्यालयों में स्किल-बेस्ड और वोकेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रमों को तेजी से लागू किया जाए। इससे छात्र-छात्राएं स्थानीय उद्योगों, स्वरोजगार और भविष्य के रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में विद्यालयों की आधारभूत संरचना, नए दाखिलों, शैक्षिक गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में सुधार को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यालय में मूलभूत सुविधाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी न रहने दी जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था तभी मजबूत होगी जब विद्यालयों में बेहतर वातावरण, प्रशिक्षित शिक्षक और पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हों।
विद्यालयों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि सभी स्कूलों में निर्धारित हेल्थ चेकअप रोस्टर का शत-प्रतिशत पालन किया जाए। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण, पोषण संबंधी निगरानी और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ विद्यार्थी ही बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। खेलकूद और शारीरिक शिक्षा को भी विद्यार्थियों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इन्हें प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में विशेष रूप से बालिकाओं की सुरक्षा और स्वच्छता पर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक विद्यालय में बालिकाओं के लिए अलग, सुरक्षित और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। केवल शौचालयों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनकी नियमित सफाई और रखरखाव के लिए भी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण बालिकाओं की नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विद्यालयों के विद्युतीकरण को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को निर्देश दिए कि राज्य के प्रत्येक विद्यालय में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिन विद्यालयों में अभी तक विद्युत कनेक्शन उपलब्ध नहीं है, उनकी कारण सहित सूची तैयार कर शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर आधारित शिक्षण और आधुनिक सुविधाओं के प्रभावी संचालन के लिए विद्यालयों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है।
बैठक के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि उत्तराखंड सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मिड-डे मील का सोशल ऑडिट, रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी, स्किल डेवलपमेंट, बालिकाओं की सुरक्षा और सभी विद्यालयों के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण जैसे फैसले राज्य की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और पोषण मिलेगा, बल्कि सरकारी विद्यालयों के प्रति अभिभावकों का विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।
