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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > रुद्रप्रयाग में बारिश का रौद्र रूप: उफनाईं अलकनंदा-मंदाकिनी, हाईवे बंद, भूस्खलन से बढ़ा खतरा; प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट
उत्तराखंडफीचर्ड

रुद्रप्रयाग में बारिश का रौद्र रूप: उफनाईं अलकनंदा-मंदाकिनी, हाईवे बंद, भूस्खलन से बढ़ा खतरा; प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट

The Hill India News
Last updated: July 20, 2026 6:33 am
The Hill India News
Published: July 20, 2026
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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। रविवार रात से शुरू हुई तेज बारिश ने सोमवार तक विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बह रही हैं, जिससे नदी किनारे बसे क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। लगातार बढ़ते जलस्तर और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है तथा राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर दिया गया है।

बारिश का सबसे अधिक असर चारधाम यात्रा मार्गों और सड़क संपर्क पर देखने को मिल रहा है। श्रीनगर–रुद्रप्रयाग के बीच सिरोबगड़ क्षेत्र में भारी भूस्खलन होने के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें आने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। यात्रियों को घंटों तक सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग को खोलने के लिए मशीनों की सहायता से मलबा हटाने का कार्य जारी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रही है।

वहीं केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के बांसबाड़ा क्षेत्र में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। यहां पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिर रहा है, जिससे मार्ग पर आवागमन जोखिम भरा हो गया है। प्रशासन ने यात्रियों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर रुकने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही तो भूस्खलन की घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है।

रुद्रप्रयाग के बेलनी क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न हो गई है। यह दृश्य नदी के बढ़ते जलस्तर की गंभीरता को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ते हुए कम ही देखा गया है। नदी के तेज बहाव के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

जिला प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) तथा अन्य राहत एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और संभावित खतरे वाले इलाकों में टीमों की तैनाती की गई है। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करना है ताकि जनहानि और नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने आम नागरिकों और चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है कि वे नदी-नालों के किनारे जाने से बचें और बिना आवश्यक कारण यात्रा न करें। विशेष रूप से बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी लेने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने भी उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में अगले कुछ समय तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों, स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को लगातार स्थिति की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क अवरोध और नदी-नालों के उफान पर आने का खतरा बना हुआ है। यदि मौसम में जल्द सुधार नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में स्थानीय निवासियों और यात्रियों से अपील की गई है कि वे पूरी सतर्कता बरतें, अनावश्यक यात्रा से बचें तथा प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। फिलहाल पूरा प्रशासनिक अमला हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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