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दिल्लीपर्यावरणफीचर्ड

दिल्ली–NCR में प्रदुषण का कहर: गाज़ियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर, राजधानी की हवा शिमला से चार गुना ज्यादा जहरीली

The Hill India News
Last updated: November 22, 2025 1:37 am
The Hill India News
Published: November 22, 2025
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नई दिल्ली, 21 नवंबर। दिल्ली–एनसीआर में प्रदूषण का कहर एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। देश की राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार बिगड़ता जा रहा है। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि गाज़ियाबाद इस समय पूरे देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहर बनकर उभरा है, जहां AQI 548 दर्ज किया गया — जो वायु गुणवत्ता की ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति का संकेत देता है।

Contents
गाज़ियाबाद 548 AQI के साथ शीर्ष पर, बाकी NCR भी ‘लाल जोन’ मेंदिल्ली की हवा पहाड़ों की तुलना में कई गुना अधिक जहरीलीविशेषज्ञों का चेतावनी— “यह हवा जहर है, घर में रहें”सरकार और एजेंसियों की तैयारी— GRAP-4 की कार्रवाई संभवप्रदूषण के कारण – पुराने पैटर्न, नई चुनौतियाँजनजीवन पर असर— स्कूल, दफ्तर और अस्पताल सतर्कदिल्ली–NCR के लिए खतरे की घंटी

वहीं, दिल्ली का औसत AQI 445 दर्ज हुआ है, जो ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी के बीच खतरनाक बढ़त दिखा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी की हवा इस समय शिमला की तुलना में चार गुना और देहरादून की तुलना में दो गुना अधिक प्रदूषित है। यह स्थिति न केवल वयस्कों के लिए बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।


गाज़ियाबाद 548 AQI के साथ शीर्ष पर, बाकी NCR भी ‘लाल जोन’ में

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, गाज़ियाबाद की वायु गुणवत्ता इस सीज़न में पहली बार 548 AQI के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। यह आंकड़ा सामान्य मानकों से कई गुना अधिक है और यह दर्शाता है कि इलाके की हवा में महीन कण (PM 2.5 और PM 10) खतरनाक स्तर पर मौजूद हैं।

NCR के कई अन्य शहर भी समान रूप से संकट का सामना कर रहे हैं:

  • नोएडा – 468 (गंभीर)
  • मेरठ – 376 (बहुत खराब)
  • मुज़फ्फरनगर – 375 (बहुत खराब)
  • हापुड़ – 373 (बहुत खराब)
  • दिल्ली – 445 (गंभीर)

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि NCR के अधिकांश शहर इस समय ‘रेड ज़ोन’ में हैं, जहां वायु गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक मानी जाती है और जहां सामान्य व्यक्ति भी सांस लेने में दिक्कत महसूस कर सकता है।


दिल्ली की हवा पहाड़ों की तुलना में कई गुना अधिक जहरीली

हर साल सर्दियों के आते ही दिल्ली और उसके आसपास प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ जाता है। तापमान के गिरने, हवा की रफ्तार कम होने और प्रदूषक कणों के धरातल पर जमा होने से हालात और बिगड़ जाते हैं।

इस समय दिल्ली की हवा की तुलना जब पहाड़ी क्षेत्रों से की गई, तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए —

  • दिल्ली की हवा शिमला से 4 गुना ज्यादा प्रदूषित
  • दिल्ली की हवा देहरादून से 2 गुना अधिक जहरीली

शिमला और देहरादून में जहाँ AQI ‘मॉडरेट’ से ‘संतोषजनक’ के बीच रहता है, वहीं दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है।


विशेषज्ञों का चेतावनी— “यह हवा जहर है, घर में रहें”

प्रदूषण विशेषज्ञों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और फेफड़ों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉक्टरों के अनुसार:

  • प्रदूषण का यह स्तर स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
  • अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, दिल के मरीज और छोटे बच्चे अत्यधिक जोखिम में हैं।
  • सुबह और रात के समय प्रदूषण सबसे अधिक घना होता है, ऐसे में सुबह की वॉक और खुले में व्यायाम को पूरी तरह से टालने की सलाह दी गई है।
  • घर में एयर प्यूरीफायर, N95 मास्क और पर्याप्त पानी का सेवन विशेष रूप से जरूरी बताया गया है।

एम्स दिल्ली के फेफड़ा रोग विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, “AQI 400 से ऊपर होने पर हवा जहरीली हो जाती है। AQI 500 के पार जाने का मतलब है कि हर सांस के साथ इंसान अपने फेफड़ों में नुकसानदेह कण भर रहा है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।”


सरकार और एजेंसियों की तैयारी— GRAP-4 की कार्रवाई संभव

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के अधीन विभिन्न एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए लागू GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के तहत पहले ही कई कदम उठाए जा चुके हैं।

यदि AQI का स्तर इसी तरह गंभीर बना रहा तो GRAP-4 लागू किया जा सकता है, जिसके तहत:

  • दिल्ली में सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक
  • ट्रकों और भारी वाहनों की एंट्री बंद
  • डीज़ल वाहनों पर कठोर प्रतिबंध
  • स्कूल बंद करने पर विचार
  • अधिकतम औद्योगिक इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना

हालांकि अभी तक GRAP-3 लागू है, लेकिन हवा की स्थिति को देखते हुए GRAP-4 किसी भी समय एक्टिव किया जा सकता है।


प्रदूषण के कारण – पुराने पैटर्न, नई चुनौतियाँ

विशेषज्ञों ने इस बार प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए:

  1. वाहनों की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक जाम
  2. निर्माण गतिविधियों से उठने वाली धूल
  3. ठंडी हवाएं और कम हवा की रफ्तार
  4. पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं
  5. औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं

दिल्ली सरकार ने कहा है कि पराली प्रदूषण का हिस्सा है, लेकिन स्थानीय स्रोत भी उतने ही जिम्मेदार हैं। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सभी एजेंसियों को मिलकर एक व्यापक समाधान की दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए।


जनजीवन पर असर— स्कूल, दफ्तर और अस्पताल सतर्क

दिल्ली और एनसीआर के अस्पतालों में प्रदूषण से संबंधित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। कई स्कूलों ने बच्चों के लिए खेलकूद गतिविधियाँ कम कर दी हैं और कुछ ने ऑनलाइन कक्षाओं पर विचार शुरू कर दिया है।

ऑफिस जाने वाले लोग भी सुबह के समय धुंध और स्मॉग की मोटी परत के बीच आवाजाही को लेकर परेशान हैं।


दिल्ली–NCR के लिए खतरे की घंटी

प्रदूषण का यह स्तर न केवल तत्काल चिंता का विषय है, बल्कि भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। यदि दिल्ली–NCR में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस, दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति नहीं बनाई गई, तो आने वाले वर्षों में इन शहरों में रहना और अधिक कठिन हो जाएगा।

फिलहाल, विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग गैर-जरूरी यात्रा से बचें, मास्क पहनें, बच्चों और बुजुर्गों को बाहर न ले जाएं और प्रदूषण के चरम समय में घर के अंदर ही रहें।

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