पश्चिमी गोदावरी: आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक दंपती कथित तौर पर आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों से इस कदर घिर गया कि उसने अपने महज तीन साल के मासूम बच्चे को रात के अंधेरे में अकेला छोड़कर उफनती गोदावरी नदी में छलांग लगा दी। माता-पिता के नदी में कूदने के बाद मासूम काफी देर तक पुल पर खड़े स्कूटर से चिपका हुआ रोता रहा और अपनी मां-पिता को पुकारता रहा। राहगीरों की नजर जब बच्चे पर पड़ी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद बच्चे को सुरक्षित उसके परिवार के हवाले किया गया।
यह घटना पश्चिमी गोदावरी जिले में चिंचिनाडा वशिष्ठ पुल पर गुरुवार देर रात की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, दंपती की पहचान 29 वर्षीय डोडा साई और 28 वर्षीय शिरीषा के रूप में हुई है। दोनों तनुकु मंडल के वेलपुरु गांव के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस और बचाव दल नदी में उनकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक दोनों का कोई पता नहीं चल पाया है।
रात करीब 10 बजे बच्चे के साथ पुल पर पहुंचे थे दंपती
प्रारंभिक जांच के अनुसार, पति-पत्नी गुरुवार रात करीब 10 बजे अपने तीन साल के बच्चे के साथ स्कूटर से चिंचिनाडा वशिष्ठ पुल पर पहुंचे थे। रात के समय गोदावरी नदी उफान पर थी। बताया जा रहा है कि नदी में छलांग लगाने से पहले दंपती ने अपने बच्चे को स्कूटर पर ही छोड़ दिया और फिर दोनों नदी में कूद गए।
माता-पिता के इस कदम के बाद मासूम पुल पर अकेला रह गया। आसपास अंधेरा और ठंड थी। बच्चा अपने माता-पिता को खोजते हुए रोता रहा। वह बार-बार उन्हें आवाज लगाता रहा। इस दौरान वहां से गुजर रहे कुछ लोगों ने बच्चे को अकेले रोते हुए देखा। जब उन्हें स्थिति संदिग्ध लगी तो उन्होंने तत्काल पुलिस को इसकी जानकारी दी।
पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद बच्चे को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया गया। इसके बाद बच्चे के परिजनों से संपर्क किया गया और उसे परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया।
‘अम्मा… नाना’ पुकारता रहा मासूम
घटना का सबसे भावुक और झकझोर देने वाला पहलू यह है कि तीन साल का मासूम अंधेरी रात में अपने माता-पिता को लगातार पुकारता रहा। राहगीरों के मुताबिक, बच्चा ‘अम्मा’ और ‘नाना’ कहकर रो रहा था। उसे शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके माता-पिता उसे पुल पर अकेला छोड़कर नदी में चले गए हैं।
कुछ ही समय पहले जो बच्चा अपने माता-पिता के साथ स्कूटर पर बैठकर आया था, वह अचानक खुद को अकेला पाकर बुरी तरह डर गया। पुलिस के पहुंचने तक वह स्कूटर से चिपका हुआ रोता रहा। इस दृश्य ने मौके पर मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित निकालने के बाद उसके परिवार को सौंप दिया। फिलहाल बच्चा अपने परिजनों के साथ है, लेकिन इतनी कम उम्र में उसके जीवन से माता-पिता के चले जाने की घटना का गहरा असर होना स्वाभाविक है।
नदी में दोनों की तलाश जारी
पुलिस को जैसे ही दंपती के नदी में कूदने की जानकारी मिली, दोनों की तलाश के लिए बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। गोदावरी में पानी का बहाव तेज होने के कारण तलाशी अभियान में कठिनाइयां आ रही हैं। बचाव दल नदी के आसपास के संभावित क्षेत्रों में तलाश कर रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, अभी तक दंपती का कोई सुराग नहीं मिला है। नदी में उनकी तलाश लगातार जारी है। पुलिस घटना से पहले की परिस्थितियों और दंपती की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर उन्होंने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।
ड्राइवर का काम करता था बच्चे का पिता
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चे का पिता डोडा साई ड्राइवर का काम करता था। बताया जा रहा है कि आंध्र प्रदेश लौटने से पहले वह खाड़ी देशों में भी काम कर चुका था। पुलिस को जानकारी मिली है कि वह कथित तौर पर कर्ज और आर्थिक दबाव से परेशान था।
परिवार से जुड़ी जानकारी के आधार पर आर्थिक संकट को घटना की संभावित वजहों में से एक माना जा रहा है। बताया गया है कि परिवार ने अपना घर भी बेच दिया था और इसके पीछे आर्थिक परेशानी होने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि पुलिस ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि आर्थिक तंगी ही दंपती के इस कदम की एकमात्र वजह थी। जांच एजेंसियां आर्थिक स्थिति के साथ-साथ पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही हैं।
सिर्फ आर्थिक परेशानी नहीं, दूसरे पहलुओं की भी जांच
पुलिस मामले को केवल कर्ज या आर्थिक तंगी से जोड़कर नहीं देख रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि घटना के पीछे अन्य पारिवारिक या व्यक्तिगत परिस्थितियां भी हो सकती हैं। पुलिस दंपती के परिचितों, रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों से जानकारी जुटा सकती है, ताकि उनके हाल के हालात का पता लगाया जा सके।
यह भी जांच का हिस्सा है कि नदी में कूदने से पहले दंपती ने किसी को फोन किया था या किसी व्यक्ति से बातचीत की थी या नहीं। उनकी आर्थिक स्थिति, कर्ज और घर बेचने से जुड़ी परिस्थितियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दंपती ने इतना कठोर कदम क्यों उठाया।
मासूम की जिंदगी पर छा गया बड़ा संकट
इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल उस तीन साल के बच्चे को लेकर खड़ा किया है, जिसे उसके माता-पिता ने रात में पुल पर अकेला छोड़ दिया। जिस उम्र में बच्चे को माता-पिता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र में उसने अपने माता-पिता को खो दिया।
राहगीरों की सतर्कता और समय पर पुलिस को सूचना मिलने से बच्चा सुरक्षित बच गया। यदि राहगीरों की नजर उस पर नहीं पड़ती तो रात के अंधेरे में उसके साथ क्या होता, यह सोचकर ही लोगों की चिंता बढ़ जाती है।
पुलिस अब एक तरफ नदी में दंपती की तलाश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ घटना के हर पहलू की जांच में जुटी है। बच्चे को उसके परिवार के पास सुरक्षित पहुंचा दिया गया है और परिवार के सदस्य उसकी देखभाल कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि आर्थिक और पारिवारिक संकट में घिरे लोगों के लिए समय पर मदद और भावनात्मक सहारा कितना जरूरी है। किसी भी कठिन परिस्थिति में आत्मघाती कदम समस्या का समाधान नहीं है। संकट की स्थिति में परिवार, मित्रों, स्थानीय प्रशासन या मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवाओं से मदद लेना बेहद जरूरी है।
फिलहाल पश्चिमी गोदावरी की गोदावरी नदी में दंपती की तलाश जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिन्होंने एक दंपती को अपने तीन साल के मासूम को अकेला छोड़कर इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
