रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा स्थित गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसव के दौरान एक 25 वर्षीय महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और अस्पताल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठकर कार्रवाई की मांग की। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस वीडियो को लेकर हो रही है, जिसमें महिला मौत से कुछ समय पहले अस्पताल के डिलीवरी वार्ड में परेशान और घबराई हुई नजर आ रही है। वीडियो में वह अपने परिजनों से मदद की गुहार लगाती दिखाई दे रही है।
मृतका की पहचान कल्पना मिश्रा (25) के रूप में हुई है, जो बैकुंठपुर के हटवा की रहने वाली थीं। परिजन उन्हें प्रसव के लिए गांधी मेमोरियल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिवार के मुताबिक, महिला को मंगलवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और गुरुवार को इलाज के दौरान उसकी और उसके बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया और अस्पताल में काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।
मौत से पहले सामने आया दिल दहला देने वाला वीडियो
इस मामले में सामने आए वीडियो ने घटना को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में कल्पना डिलीवरी वार्ड के भीतर परेशान नजर आ रही हैं और बाहर जाने की बात कहती दिखाई देती हैं। वह कथित तौर पर अपने परिजनों से कहती सुनाई दे रही हैं कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें बचाया जाए।
वीडियो में महिला कथित तौर पर कहती है, “मां, ये लोग मुझे मार डालेंगे… इस तरह इलाज जारी रहा तो ये मार देंगे।” महिला की इस गुहार के बाद परिवार ने अस्पताल में इलाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं। वीडियो में नर्सिंग स्टाफ द्वारा महिला को रोकने और उससे बातचीत करने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली परिस्थितियों और महिला की मौत के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध अभी जांच का विषय है। वीडियो को पुलिस और संबंधित अधिकारियों की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा जा सकता है।
परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप
कल्पना की मौत के बाद उनके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिवार के सदस्यों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने डॉक्टरों से बार-बार महिला की जांच करने और उसकी हालत पर ध्यान देने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
मृतका के पिता रामशरण मिश्रा ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार डॉक्टरों से अपनी बेटी का चेकअप करने के लिए कहा था। परिवार का दावा है कि यदि समय रहते महिला की स्थिति को गंभीरता से लिया जाता तो शायद उसकी और बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
परिजनों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। परिवार की मांग है कि केवल नर्सिंग स्टाफ ही नहीं, बल्कि इलाज से जुड़े डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
नर्सिंग स्टाफ निलंबित, डॉक्टर पर भी कार्रवाई की मांग
मामले में परिजनों की नाराजगी और लगाए गए आरोपों के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से नर्सिंग स्टाफ की दो कर्मचारियों साधना वर्मा और सीमा मुजालदे को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई इलाज में कथित लापरवाही के आरोपों को लेकर की गई है।
हालांकि, मृतका के परिजन इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। परिवार की ओर से ड्यूटी डॉक्टर सोनल अग्रवाल की भूमिका की भी जांच और उन्हें निलंबित करने की मांग की जा रही है। परिजनों का कहना है कि यदि इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
एनेस्थीसिया के ओवरडोज की आशंका, लेकिन पुष्टि नहीं
इस मामले में एक और गंभीर बात सामने आ रही है। आशंका जताई जा रही है कि महिला और उसके बच्चे की मौत एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा दिए जाने से हुई हो सकती है। हालांकि, यह फिलहाल केवल आशंका है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मौत की वास्तविक वजह जानने के लिए शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत की वास्तविक वजह क्या थी। यदि जांच में एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा या किसी अन्य चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
मृतका के चाचा ने बताई घटना की जानकारी
कल्पना के चाचा धर्मेंद्र मिश्रा के मुताबिक, महिला को मंगलवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि प्रसव के बाद मां और बच्चा स्वस्थ घर लौटेंगे, लेकिन गुरुवार को अचानक दोनों की मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
परिवार के मुताबिक, मौत से पहले महिला की स्थिति को लेकर चिंता थी और उसने खुद भी परेशानी जाहिर की थी। इसके बाद सामने आए वीडियो ने परिजनों की चिंता और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि वीडियो में महिला जिस तरह मदद की गुहार लगा रही है, उसकी भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही से किया इनकार
वहीं दूसरी ओर, गांधी मेमोरियल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने डॉक्टरों की ओर से किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। उनका कहना है कि महिला का इलाज चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया था।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। अस्पताल की ओर से यह भी कहा गया है कि मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद ही चल सकेगा।
इस तरह इस मामले में फिलहाल दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। परिवार जहां चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन इलाज में किसी तरह की लापरवाही से इनकार कर रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
मामले की सबसे अहम कड़ी अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के नतीजे होंगे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। पुलिस और प्रशासन को यह पता लगाना होगा कि महिला और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
जांच में महिला के इलाज से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, दवाओं की जानकारी, एनेस्थीसिया से संबंधित रिकॉर्ड, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका तथा वायरल वीडियो की परिस्थितियों को देखा जा सकता है। साथ ही अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों और परिजनों के बयान भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
फिलहाल रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में हुई इस घटना ने चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ परिवार अपनी बेटी और नवजात को खोने के गम में है, तो दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार कर रहा है। अब सभी की नजर जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर प्रसव के दौरान ऐसा क्या हुआ कि एक मां और उसके नवजात बच्चे की जान चली गई।
