By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: पंतनगर विश्वविद्यालय अतिक्रमण विवाद: आशियाने बचाने की जंग, सड़कों पर उतरा जनसैलाब; मशाल जुलूस से गरमाई उत्तराखंड की सियासत
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > पंतनगर विश्वविद्यालय अतिक्रमण विवाद: आशियाने बचाने की जंग, सड़कों पर उतरा जनसैलाब; मशाल जुलूस से गरमाई उत्तराखंड की सियासत
उत्तराखंडफीचर्ड

पंतनगर विश्वविद्यालय अतिक्रमण विवाद: आशियाने बचाने की जंग, सड़कों पर उतरा जनसैलाब; मशाल जुलूस से गरमाई उत्तराखंड की सियासत

The Hill India News
Last updated: April 18, 2026 1:56 am
The Hill India News
Published: April 18, 2026
Share
File Photo
SHARE

रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर): उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में स्थित पंतनगर इन दिनों अशांति और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। पंतनगर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बस्तियों को खाली करने के लिए जारी किए गए अतिक्रमण विरोधी नोटिस ने एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। संजय कॉलोनी, मस्जिद कॉलोनी और वाल्मीकि बस्ती जैसे क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों के सिर पर छत छिनने की तलवार लटक रही है। इस संवेदनशील मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग अख्तियार कर लिया है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता जनता के समर्थन में आमने-सामने आ गए हैं।

Contents
बस्तियों में खौफ का साया और बढ़ता जनाक्रोशपूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कलेक्ट्रेट में दी दस्तकविधायक तिलक राज बेहड़ का आक्रामक रुख: निकाला मशाल जुलूससियासी पारा चढ़ा: धामी सरकार पर विपक्ष के तीखे प्रहारप्रशासनिक रुख और विश्वविद्यालय का पक्षनिष्कर्ष: समाधान की तलाश या संघर्ष का आगाज?

बस्तियों में खौफ का साया और बढ़ता जनाक्रोश

पंतनगर विश्वविद्यालय की भूमि पर दशकों से बसे लोगों को जब प्रशासन की ओर से बेदखली के नोटिस थमाए गए, तो क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि वे यहाँ पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनके पास वैध पहचान दस्तावेज हैं। प्रशासन की इस अचानक कार्रवाई को लोग अपनी आजीविका और अस्तित्व पर हमला मान रहे हैं। पंतनगर अतिक्रमण विवाद के केंद्र में वे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार हैं, जिनके पास इस बस्तियों के अलावा सिर छुपाने की कोई दूसरी जगह नहीं है।

विरोध की आग तब और भड़क गई जब स्थानीय लोगों ने मांग की कि यदि उन्हें यहाँ से हटाया जाता है, तो पहले उनके उचित पुनर्वास (Rehabilitation) की व्यवस्था की जाए। “बिना छत दिए, छत छीनना अन्याय है”—यह नारा आज पंतनगर की गलियों में गूंज रहा है।


पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कलेक्ट्रेट में दी दस्तक

मामले की गंभीरता को देखते हुए किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने सबसे पहले मोर्चा संभाला। वे मस्जिद कॉलोनी और वाल्मीकि बस्ती के प्रतिनिधियों के साथ जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुँचे और अपर जिलाधिकारी (ADM) को ज्ञापन सौंपा। राजेश शुक्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि दशकों से बसी इन कॉलोनियों को एक झटके में उजाड़ना न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। उन्होंने मांग की कि जब तक सरकार इन लोगों के लिए कोई वैकल्पिक आवासीय योजना नहीं लाती, तब तक अतिक्रमण हटाने की किसी भी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।


विधायक तिलक राज बेहड़ का आक्रामक रुख: निकाला मशाल जुलूस

शाम होते-होते विरोध प्रदर्शन ने उस समय उग्र रूप ले लिया जब वर्तमान किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ खुद मैदान में उतरे। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को ‘गरीब विरोधी’ करार देते हुए धामी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। विधायक बेहड़ ने मस्जिद कॉलोनी से लेकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार तक एक विशाल मशाल जुलूस का नेतृत्व किया।

हाथों में जलती मशालें और सरकार विरोधी नारों के साथ हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। विश्वविद्यालय गेट पर धरने पर बैठे बेहड़ ने कहा:

“यह केवल अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि हजारों जिंदगियों को अंधेरे में धकेलने की साजिश है। विश्वविद्यालय प्रशासन को यह समझना होगा कि ये लोग कोई अपराधी नहीं हैं, बल्कि वे श्रमिक और कामगार हैं जिन्होंने इस क्षेत्र के विकास में योगदान दिया है।”


सियासी पारा चढ़ा: धामी सरकार पर विपक्ष के तीखे प्रहार

तिलक राज बेहड़ ने इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार आम जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ गरीबों के आशियाने उजाड़ने के लिए बुल्डोजर और नोटिस का सहारा ले रही है।

बेहड़ ने दो टूक चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने घोषणा की कि यदि प्रशासन ने जबरन बेदखली की कोशिश की, तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर ईंट से ईंट बजा देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंतनगर अतिक्रमण विवाद अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा जन-मुद्दा बन चुका है, जिसे विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।


प्रशासनिक रुख और विश्वविद्यालय का पक्ष

दूसरी ओर, पंतनगर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह भूमि विश्वविद्यालय के विस्तार और शोध कार्यों के लिए आरक्षित है। माननीय न्यायालयों के पिछले आदेशों का हवाला देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाना उनकी कानूनी बाध्यता है। हालांकि, मौजूदा विरोध प्रदर्शनों और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच प्रशासन के लिए इस कार्रवाई को अंजाम देना एक बड़ी चुनौती बन गया है।


निष्कर्ष: समाधान की तलाश या संघर्ष का आगाज?

पंतनगर का यह घटनाक्रम उत्तराखंड में भूमि कानूनों और अतिक्रमण की जटिल समस्या को एक बार फिर चर्चा में ले आया है। तकनीकी रूप से भले ही यह भूमि अतिक्रमण की श्रेणी में आती हो, लेकिन सामाजिक और मानवीय दृष्टि से यह हजारों लोगों के जीवन का प्रश्न है।

स्थानीय निवासियों की मांग जायज है कि उन्हें उजाड़ने से पहले बसाया जाए। आने वाले दिनों में यदि सरकार और प्रशासन ने कोई मध्यमार्ग (पुनर्वास नीति) नहीं निकाला, तो यह आंदोलन और भी हिंसक और व्यापक हो सकता है। पंतनगर अतिक्रमण विवाद अब राज्य सरकार की साख और विपक्ष की सक्रियता के बीच एक अग्निपरीक्षा बन गया है।

You Might Also Like

Uttarakhand: देश के 500 जिलों के बीच उत्तरकाशी ने खेती के लिए बेहतर प्रयासों हेतु जीता ईनाम, CM ने की सराहना
New Delhi: गृहमंत्री अमित शाह के बाद अब खेलमंत्री अनुराग ठाकुर से बातचीत को तैयार पहलवान : सूत्र
हरिद्वार भूमि घोटाले में जांच अंतिम चरण में, 24 अधिकारियों के बयान दर्ज, बड़े खुलासों की उम्मीद
पश्चिम बंगाल: मालदा कांड में बड़ा खुलासा, मास्टरमाइंड एडवोकेट मोफक्कारुल इस्लाम गिरफ्तार, NIA संभालेगी जांच की कमान
पटना और गोधरा में परीक्षा को लेकर बड़ी धांधली, NEET एग्जाम और रिजल्ट में खामियां ही खामियां
TAGGED:Dhami government vs opposition.Pantnagar University noticeRudrapur encroachment newsTilak Raj Behad torch processionUttarakhand rehabilitation policy
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडक्राइमफीचर्ड

देहरादून में ड्रग्स तस्करी पर बड़ा प्रहार: 30 लाख की MDMA और स्मैक बरामद, हाई-प्रोफाइल पार्टियों तक पहुंचने से पहले आरोपी गिरफ्तार

The Hill India News
The Hill India News
July 22, 2026
‘152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित’: शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, सरकार से मांगे जवाब और कार्रवाई
उत्तराखंड की एकल महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: मुख्यमंत्री धामी ने स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण में 488 महिलाओं को सौंपी ₹2.76 करोड़ से अधिक की सहायता राशि
ट्विशा शर्मा केस में नया मोड़: दो महिला जजों ने सुनवाई से किया इनकार, गिरीबाला की जमानत याचिका CBI कोर्ट ट्रांसफर
CJP प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज मामले में दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस; सबूत सुरक्षित रखने के दिए निर्देश
INS मालवन से बढ़ी भारतीय नौसेना की ताकत, समुद्र में दुश्मनों पर रखेगा पैनी नजर; आत्मनिर्भर भारत को मिला नया सुरक्षा कवच
उत्तराखंड के स्कूलों में मिड-डे मील की होगी रियल टाइम निगरानी, हर विद्यालय का सोशल ऑडिट अनिवार्य; शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं पर सरकार का बड़ा फोकस
लोकसभा में बड़ा एक्शन: महिला सांसदों पर कथित अभद्र टिप्पणी के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी निलंबित, संसद में मचा सियासी तूफान
INDIA गठबंधन में दरार के संकेत? नीट मुद्दे पर संसद के भीतर आमने-सामने दिखे अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल
मैं जो देखकर लौटा, उसे कभी नहीं भूलूंगा’: जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल हुए अभिनेता अमोल पराशर, छात्रों की उम्मीद और संघर्ष की सुनाई आंखोंदेखी
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?