राजधानी दिल्ली का हृदय स्थल सोमवार को अचानक संग्राम क्षेत्र में तब्दील हो गया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान फैली भीषण अराजकता और हिंसा के बाद अब दिल्ली पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने दंगा फैलाने, सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने, कर्तव्य पर तैनात पुलिसकर्मियों पर प्राणघातक हमला करने और निषेधाज्ञा (धारा 144/निषेधात्मक आदेशों) का खुलेआम उल्लंघन करने के आरोप में अलग-अलग धाराओं में कई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं।
इस हिंसक झड़प में विशेष आयुक्त (Special CP), संयुक्त आयुक्त (Joint CP), अतिरिक्त आयुक्त (Addl. CP), पुलिस उपायुक्त (DCP) और सहायक आयुक्त (ACP) स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों समेत 118 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों में कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। वहीं, पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की और हाथापाई में लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की खबर है।
कानूनी चेतावनियों को हवा में उड़ाया: बैरिकेड तोड़े, पुलिस पर बरसाए पत्थर
पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान भीड़ की मंशा शुरुआत से ही उग्र नजर आ रही थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने बार-बार लाउडस्पीकर के माध्यम से कानूनी निर्देशों का पालन करने और क्षेत्र खाली करने की सख्त चेतावनी दी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने सभी कानूनी अपीलों को दरकिनार करते हुए जानबूझकर लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया।
देखते ही देखते भीड़ अनियंत्रित और आक्रामक हो गई। उपद्रवियों ने सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के बैरिकेड्स को जबरन उखाड़कर फेंकने की कोशिश की और ड्यूटी पर तैनात जवानों पर पत्थरों तथा अन्य भारी वस्तुओं से हमला बोल दिया। इस अचानक हुए पथराव और हिंसक हमले ने मौके पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।
“सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हिंसा और कानून तोड़ने में शामिल हर एक चेहरे की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
— दिल्ली पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक बयान
सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान: 15 से 20 वाहनों में तोड़फोड़
प्रदर्शनकारियों की हिंसा केवल पुलिसकर्मियों पर हमले तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को भी निशाना बनाया। उपद्रवियों ने इलाके में खड़ी लगभग 15 से 20 सरकारी गाड़ियों, पुलिस वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों में जमकर तोड़फोड़ की। गाड़ियों के शीशे चकनाचूर कर दिए गए और कई वाहनों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
हिंसा की इस चौतरफा लपटों से निपटने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका।
वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर महिला जवानों तक की MLC जारी
सोमवार को हुई यह हिंसा इस मायने में बेहद गंभीर मानी जा रही है कि इसमें जमीनी स्तर के सिपाहियों से लेकर अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व कर रहे शीर्ष आईपीएस अधिकारी तक घायल हुए हैं। विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, एडिशनल सीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारियों को भी उपद्रवियों की आक्रामकता का सामना करना पड़ा।
घायल 118 से अधिक पुलिसकर्मियों का पास के विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराया गया है, जहां उनकी मेडिको-लीगल केस (MLC) रिपोर्ट तैयार की जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह एमएलसी रिपोर्ट अदालत में उपद्रवियों के खिलाफ एक मजबूत कानूनी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की जाएगी।
70 प्रदर्शनकारी हिरासत में, BNS की कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज
घटना के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने मौके से लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अब आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज, ड्रोन फुटेज और मीडिया कवरेज की जांच कर रही है ताकि हिंसा भड़काने वाले मुख्य षड्यंत्रकारियों और पथराव करने वाले अन्य असामाजिक तत्वों की पहचान की जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने नए आपराधिक कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) और ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम’ की प्रासंगिक धाराओं के तहत कई एफआईआर दर्ज की हैं। इसमें शामिल प्रमुख धाराएं हैं:
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दंगा करना और उपद्रव फैलाना (Rioting)
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सरकारी कर्मचारी पर जानलेवा हमला व चोट पहुंचाना
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सरकारी कार्य में बाधा डालना
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सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध
इस घटनाक्रम के बाद पूरे नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील चौराहों और सरकारी इमारतों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात की गई हैं।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में हिंसा, पथराव और कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी भी समूह या संगठन को नहीं दी जाएगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि उपद्रवियों के खिलाफ सख्त मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की जाएगी।
