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उत्तराखंडफीचर्ड

बजट सत्र 2026: संसद में वित्त मंत्री ने पेश किया Economic Survey, अगले वित्तीय वर्ष तक 7.2% GDP का अनुमान

The Hill India News
Last updated: January 29, 2026 7:30 am
The Hill India News
Published: January 29, 2026
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नई दिल्ली। देश की राजनीति और आर्थिक दिशा तय करने वाला बजट सत्र 2026 संसद में शुरू हो चुका है। यह सत्र कई अहम विधेयकों, व्यापक आर्थिक बहसों और सरकार-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का गवाह बनने वाला है। सत्र के केंद्र में 1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट और उससे ठीक पहले आज संसद में प्रस्तुत किया गया आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 है, जिसने बजट से पहले सरकार की आर्थिक सोच और प्राथमिकताओं के संकेत दे दिए हैं।

Contents
संसद परिसर में पीएम मोदी का संदेशसंसद में पेश हुआ आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रखा सर्वेबजट से पहले अहम संकेतनिर्णायक मोड़ पर बजट सत्र

बजट सत्र के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित किया। उनके बयान को सत्र की दिशा तय करने वाला अहम संदेश माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के वक्तव्य और आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि सरकार आने वाले वर्षों में तेज़ आर्थिक वृद्धि, स्थिरता और दीर्घकालिक सुधारों पर फोकस बनाए रखने के मूड में है।

संसद परिसर में पीएम मोदी का संदेश

सत्र की शुरुआत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वर्ष 2026 के आरंभ में राष्ट्रपति द्वारा संसद सदस्यों के सामने रखी गई अपेक्षाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी सांसदों ने इन अपेक्षाओं को गंभीरता से लिया होगा और उसी भावना के साथ सदन की कार्यवाही में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि बजट सत्र केवल राजनीतिक टकराव का मंच नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्रीय हित और विकास से जुड़े ठोस फैसलों का जरिया बनना चाहिए। उनके अनुसार, आज भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है और यही आत्मविश्वास वैश्विक मंच पर देश को “आशा की किरण” के रूप में स्थापित करता है। संसद में होने वाली चर्चा और निर्णय इस विश्वास को और मजबूत करेंगे।

संसद में पेश हुआ आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27

सरकार ने आज संसद में Economic Survey 2026-27 टेबल कर दिया। यह दस्तावेज हर साल केंद्रीय बजट से पहले पेश किया जाता है और इसे अर्थव्यवस्था का “रिपोर्ट कार्ड” माना जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, भविष्य के अनुमान और विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है।

सर्वे के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने बीते वर्षों में मजबूती दिखाई है। घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे में निवेश और संरचनात्मक सुधारों को आर्थिक मजबूती के प्रमुख आधार के रूप में रेखांकित किया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रखा सर्वे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 पेश किया। सर्वे में भारत की संभावित वृद्धि दर (Potential Growth Rate) को बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत आंका गया है। तीन वर्ष पहले यह अनुमान 6.5 प्रतिशत था।

इस बढ़ोतरी को भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती क्षमता और मजबूती का संकेत माना जा रहा है। सर्वे के अनुसार, सुधारों की निरंतरता, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश से भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित वृद्धि दर में यह बढ़ोतरी सरकार के लिए सकारात्मक संकेत है और इसका असर आगामी केंद्रीय बजट की नीतियों में भी देखने को मिल सकता है।

बजट से पहले अहम संकेत

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सरकार रोजगार सृजन, निवेश बढ़ाने और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने पर जोर दे सकती है। साथ ही कृषि, एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र जैसे अहम सेक्टरों पर बजट में विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026 न केवल आगामी वित्त वर्ष की आय-व्यय योजनाओं को तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि सरकार भारत को तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में कैसे आगे ले जाना चाहती है।

निर्णायक मोड़ पर बजट सत्र

कुल मिलाकर, बजट सत्र 2026 एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री के संदेश और आर्थिक सर्वेक्षण के निष्कर्षों ने यह साफ कर दिया है कि सरकार विकास, सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर फोकस बनाए रखने के इरादे से आगे बढ़ रही है। अब संसद की बहसों और बजट की घोषणाओं पर देश की नजर टिकी है, जो आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय

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