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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में UCC का एक वर्ष: समानता की दहलीज पर खड़ा प्रदेश, 5 लाख आवेदनों ने रचा इतिहास

The Hill India News
Last updated: January 27, 2026 10:32 am
The Hill India News
Published: January 27, 2026
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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के इतिहास में 27 जनवरी का दिन एक ‘स्वर्णिम अध्याय’ के रूप में दर्ज हो गया है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हुए एक वर्ष का समय सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस अवसर पर राज्य सरकार ने ‘यूसीसी दिवस’ का भव्य आयोजन किया, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस क्रांतिकारी कानून की सफलता के आंकड़े साझा किए और इसे सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा आधार बताया।

Contents
UCC दिवस: उपलब्धियों का उत्सव और सम्मानएक साल के आंकड़े: जनता का अटूट विश्वाससंकल्प से सिद्धि तक: UCC का सफरनामामहिला सशक्तिकरण और कुरीतियों पर प्रहारUCC के तहत मिलने वाली प्रमुख सुविधाएंदेश के लिए मॉडल बना उत्तराखंड

UCC दिवस: उपलब्धियों का उत्सव और सम्मान

राजधानी देहरादून में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने उन सभी चेहरों को सम्मानित किया, जिन्होंने इस कानून को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति के सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी और ज़मीनी स्तर पर पंजीकरण में मदद करने वाले वीएलसी (VLC) शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि UCC केवल एक कानून नहीं, बल्कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के उन सपनों को साकार करने की दिशा में एक साहसिक कदम है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत ‘नीति निदेशक सिद्धांतों’ में शामिल किया गया था।

एक साल के आंकड़े: जनता का अटूट विश्वास

UCC पोर्टल पर प्राप्त हुए आवेदनों की संख्या यह दर्शाती है कि प्रदेश की जनता ने इस कानून को खुले मन से स्वीकार किया है। पिछले एक वर्ष के भीतर प्राप्त आंकड़ों का विवरण इस प्रकार है:

श्रेणी प्राप्त आवेदन स्वीकृत आवेदन
कुल पंजीकरण आवेदन 5,00,000+ 4,80,000
विवाह पंजीकरण 4,20,000+ 4,00,000
रजिस्टर्ड विवाह की स्वीकृति 86,000+ 83,000+
वसीयत पंजीकरण 5,000+ 4,000+

ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि विवाह और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील मामलों में अब एक पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था लागू हो चुकी है।

संकल्प से सिद्धि तक: UCC का सफरनामा

उत्तराखंड में UCC का सफर किसी चुनौती से कम नहीं था। 12 फरवरी 2022 को जब मुख्यमंत्री धामी ने इसका संकल्प लिया था, तब से लेकर 27 जनवरी 2025 के कार्यान्वयन तक की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

  • 27 मई 2022: रंजना देसाई की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित।

  • 2 फरवरी 2024: समिति ने राज्य सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।

  • 6-7 फरवरी 2024: विधानसभा में ऐतिहासिक चर्चा के बाद विधेयक पारित।

  • 11 मार्च 2024: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से ऐतिहासिक मंजूरी मिली।

  • 18 अक्टूबर 2024: नियमावली (Rules) तैयार कर सरकार को सौंपी गई।

  • 27 जनवरी 2025: पूरे प्रदेश में आधिकारिक तौर पर UCC लागू।

महिला सशक्तिकरण और कुरीतियों पर प्रहार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में विशेष रूप से मुस्लिम समाज की महिलाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि UCC लागू होने के बाद प्रदेश की बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह और बाल विवाह जैसी सदियों पुरानी कुरीतियों से कानूनी सुरक्षा मिली है।

“अब कानून की नज़र में हर बेटी समान है। चाहे वो उत्तराधिकार का मामला हो या विवाह विच्छेद का, भेदभाव की दीवारें अब ढह चुकी हैं।” – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

UCC के तहत मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं

समान नागरिक संहिता ने आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाने के लिए कई डिजिटल सेवाएं शुरू की हैं:

  1. विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण: अब हर विवाह को पंजीकृत करना अनिवार्य है, जिससे भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना कम होगी।

  2. लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण: सुरक्षा और पारदर्शिता के दृष्टिगत लिव-इन संबंधों का पंजीकरण और उसके खत्म होने की सूचना देना अनिवार्य किया गया है।

  3. उत्तराधिकार और वसीयत: बिना वसीयत वाले उत्तराधिकार के मामलों में कानूनी वारिसों की स्पष्ट घोषणा और वसीयत पंजीकरण को सरल बनाया गया है।

  4. कोडिसिल (Codicil): वसीयत में किसी भी प्रकार के संशोधन या सुधार के लिए ‘कोडिसिल’ पंजीकरण की सुविधा भी दी गई है।

देश के लिए मॉडल बना उत्तराखंड

उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने आज़ादी के बाद UCC को लागू किया। एक साल के इस सफल सफर ने उन आशंकाओं को निराधार साबित कर दिया है, जो इसके लागू होने के समय जताई जा रही थीं। आज उत्तराखंड का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक मार्गदर्शिका का कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सनातन संस्कृति सदैव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और समानता की पक्षधर रही है, और UCC इसी विचारधारा का आधुनिक कानूनी स्वरूप है।

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