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नई दिल्ली : जस्टिस कांत ने कहा कि पूरा सिस्टम पीड़ित है. बैंकों से लेकर बिल्डर तक पर बरसा सुप्रीम कोर्ट

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बिल्डरों के बड़े-बड़े वादे और दावों के चक्कर में आकर लाखों लोग अपने जीवन की गाढ़ी कमाई उन्हें एक अदद फ्लैट खरीदने के लिए दे दिए और फिर इंतजार करते-करते बरसों-बरस बीत गए. कइयों ने लोन लेकर फ्लैट खरीदे और सालों से EMI के साथ-साथ किराये वाले मकान का रेंट भी भर रहे हैं. वादा था कि साल-दो-साल में फ्लैट मिल जाएगा. इससे उम्मीद थी कि दो साल ना सही, कम से कम चार-पांच सालों में तो फ्लैट मिल ही जाएगा. मगर, इंतजार बढ़ता गया और दस से पंद्रह साल बीत गए. पर फ्लैट नहीं मिला. जो खुशकिस्मत रहे, उन्हें भी आधी-अधूरी सुविधाओं के साथ फ्लैट मिला. मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने अब बिल्डर को अलग से बिल भर रहे हैं, लेकिन सुविधाएं न के बराबर. एनसीआर में होम बायर्स का ये दर्द यूं तो सभी को पता है, लेकिन उस पर मरहम अब तक किसी ने नहीं लगाया. हालांकि, आज सुप्रीम कोर्ट ने जो सख्त रूप दिखाया है, अगर ये जारी रहा तो लाखों होम बायर्स को न्याय मिल सकेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों और बिल्डरों के बीच कथित सांठगांठ पर चिंता व्यक्त की है और आश्वासन दिया है कि मकान मालिकों की शिकायतों की जांच सीबीआई से कराई जाएगी. मकान मालिकों के एक ग्रुप ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें दावा किया गया है कि बिल्डरों और डेवलपर्स की देरी के कारण उन्हें फ्लैटों का कब्ज़ा नहीं मिला है, लेकिन बैंक उन्हें ईएमआई का भुगतान करने के लिए मजबूर कर रहे हैं.

मामले की सुनवाई कर रही दो जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हम किसी भी संस्थान को बुरा या अच्छा नहीं मानेंगे.हम निश्चित रूप से सीबीआई जांच करवाएंगे. यह स्पष्ट है. हजारों लोग रो रहे हैं. हम उनके आंसू नहीं पोंछ सकते, लेकिन हम उनके मुद्दों पर फैसला कर सकते हैं. समयबद्ध तरीके से कुछ बहुत प्रभावी किया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर हमारा जीरो टॉलरेंस है. जो दोषी है, वो धरती के नीचे भी जा छिपे तो ढूंढ निकालेंगे.” 

जस्टिस कांत ने कहा, “हम एक भी बैंक को संदेह से मुक्त नहीं मान सकते…हमने उनकी कार्यप्रणाली देखी है…आप सार्वजनिक संस्थाओं का आचरण देख सकते हैं!” फाइनेंसरों की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यदि कोई विशेष बिल्डर दिवालिया हो जाता है, तो यह मेरी गलती नहीं है.” न्यायमूर्ति कांत ने पलटवार करते हुए कहा, “आपकी गलती यह है कि यह जानते हुए कि साइट पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है, आपने 60 प्रतिशत जारी कर दिया! यह बिना किसी लेन-देन के कैसे हो सकता है!?”

सिंघवी ने सुझाव दिया कि बैंक कब्जा दिए जाने तक ब्याज वसूलने से परहेज कर सकते हैं, लेकिन न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया. जस्टिस कांत ने कहा, “इससे बड़े मुद्दे का समाधान नहीं होगा. इससे उस बीमारी का समाधान नहीं होगा, जिससे पूरा सिस्टम पीड़ित है. लाखों-लाखों लोग… सुप्रीम कोर्ट हर दिन गरीब लोगों की दुर्दशा को देख रहा है. हम मामले की जड़ तक जाना चाहते हैं…हम बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे.

पिछले 10 साल में डूबी रियल एस्टेट कंपनियों की लिस्ट
पिछले एक दशक में कई रियल एस्टेट कंपनियां डूब चुकी हैं या दिवालिया घोषित हो चुकी हैं.

  • आम्रपाली ग्रुप- 2019 में RERA रजिस्ट्रेशन रद्द, एनबीसीसी को सौंपे गए प्रोजेक्ट्स. 
  • अंसल एपीआई – कर्ज और कानूनी विवादों में फंस गई कंपनी, कई प्रोजेक्ट्स अधूरे.
  • यूनिटेक – 2017 में एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया की शुरुआत हुई, होम बायर्स का पैसा अटक गया. 
  • जेपी इन्फ्राटेक –  2017 में दिवालिया घोषित हो गई कंपनी यमुना एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ. 
  • सुपरटेक – 2022 में एनसीएलटी ने दिवालिया प्रक्रिया शुरू की, 40,000 से ज्यादा फ्लैट्स अटके हैं.
  • 3सी कंपनी-  कई प्रोजेक्ट्स में देरी हुई है वित्तीय संकट में फंसी है कंपनी
  • पार्श्वनाथ डेवलपर्स- कर्ज में डूबी है कंपनी कई प्रोजेक्ट्स रुके हैं.
  • एचडीआईएल- 2019 में दिवालिया घोषित हो गई कंपनी पीएमसी बैंक घोटाले से जुड़ा नाम. 

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को जमकर फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि अथॉरिटी को सिर्फ अपने बकाए पैसे की चिंता है, उन हजारों फ्लैट बायर्स से कोई लेना-देना नहीं है, जो घर खरीदने के बावजूद किराए के घर में रहने को मजबूर हैं. कोर्ट ने सोमवार को नोएडा अथॉरिटी द्वारा अपीलीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के उस फैसले के खिलाफ अपील करने पर आपत्ति जताई, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (NBCC) को दिवालिया रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक (Supertech) की 16 अधूरे रेजिडेंशियल प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करने की इजाजत दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित कर सकता है.

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