नई दिल्ली: देशभर के करोड़ों छात्रों और अभिभावकों की उथल-पुथल भरी रातों के बीच आखिरकार राहत और उम्मीद की एक नई किरण नजर आई है। केंद्र सरकार ने NEET पेपर लीक (NEET paper leak) से उपजे राष्ट्रव्यापी असंतोष को शांत करने की दिशा में बेहद संवेदनशील और कड़ा रुख अपनाया है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात देश के युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक माफियाओं पर अब तक का सबसे सख्त कानून लाने का भरोसा दिया, वहीं दूसरी तरफ गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती प्रख्यात पर्यावरणविद व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपना 28 दिनों से चला आ रहा अनशन समाप्त कर दिया।
सरकार के इस सकारात्मक और मानवीय दृष्टिकोण से न केवल सड़कों पर उतरे लाखों छात्रों की न्याय की उम्मीद जगी है, बल्कि यह भी साफ हो गया है कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्था में बड़े शैक्षिक सुधारों (educational reforms) की बुनियाद रखी जा रही है।
आधी रात PM मोदी का संदेश: ‘छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
पेपर लीक की घटनाओं से निराश और हताश लाखों परीक्षार्थियों के दिलों में भरोसा जगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधी रात को एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया। अपने इस संदेश में पीएम ने बेहद संवेदनशील लहजे में छात्रों के दर्द को साझा किया और कहा कि सरकार इस समस्या की गंभीरता को भली-भांति समझती है।
“देश के होनहार युवाओं का भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। पेपर लीक जैसी कुप्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पेपर लीक (paper leak) की रोकथाम के लिए एक विशेष और बेहद कठोर कानून का मसौदा तैयार कर चुकी है। इस विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगामी संसद सत्र में पेश कर पास कराने की तैयारी पूरी है। इस नए कानून में नकल माफिया और साजिशकर्ताओं के खिलाफ ऐसी नजीर पेश करने वाली सजा का प्रावधान होगा जो भविष्य में किसी को ऐसी हिमाकत न करने दे।
सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह रहे मौजूद
पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक भरोसे और सरकार की सकारात्मक पहल के बाद लद्दाख से लेकर दिल्ली तक छात्रों की आवाज उठा रहे सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली है। वांगचुक 28 जून से अनशन पर थे और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार उनकी सभी जायज और गंभीर मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। वांगचुक ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह केवल वादे तक सीमित नहीं रहेगा और देश की शिक्षा प्रणाली में एक पारदर्शी युग की शुरुआत होगी।
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज नहीं होंगे केस, पीड़ित परिवारों के मुआवजे पर भी विचार
केंद्र सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम में दंडात्मक रवैया अपनाने के बजाय बेहद संवेदनशील और अभिभावक जैसा रुख दिखाया है। जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने वाले छात्रों और 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल हुए युवाओं के प्रति सरकार पूरी तरह सकारात्मक नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल परीक्षार्थियों और युवाओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने या नए केस दर्ज न करने को लेकर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि किसी भी होनहार छात्र का करियर किसी कानूनी पचड़े की वजह से बर्बाद न हो।
इससे भी बढ़कर, NEET पेपर लीक के कारण पैदा हुए मानसिक तनाव से टूटकर आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति भी सरकार ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। केंद्र सरकार उन पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा और संबल देने पर भी सकारात्मक रूप से विचार कर रही है। संसद में पहले ही इस विषय पर एक विस्तृत और पारदर्शी चर्चा का आश्वासन दिया जा चुका है, जिसमें परीक्षा प्रणाली की कमियों को दूर करने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ढांचे में सुधार पर फोकस रहेगा।
भविष्य की राह: क्या खत्म होगी छात्रों की अनिश्चितता?
NEET पेपर लीक मामले ने पूरे देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद जब युवाओं को पेपर आउट होने की खबरें मिलती हैं, तो उनका व्यवस्था से विश्वास उठने लगता है। लेकिन जिस तरह से केंद्र सरकार ने इस बार त्वरित कदम उठाते हुए संसद में कड़े कानून की घोषणा की है, सोनम वांगचुक के अनशन को संवाद से समाप्त कराया है और पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना दिखाई है—उससे एक बात तो साफ है कि सरकार रक्षात्मक होने के बजाय समाधान की मुद्रा में है।
अब सबकी निगाहें संसद के आगामी सत्र पर टिकी हैं, जहां इस कड़े कानून का मसौदा पटल पर रखा जाएगा। अगर यह कानून उम्मीदों के मुताबिक सख्त और असरदार साबित होता है, तो यह देश के करोड़ों युवाओं के सपनों को सुरक्षा की गारंटी देने वाला एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
