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Reading: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 2883 करोड़ की लूट का ‘सिंडिकेट’ बेनकाब; ED की चार्जशीट में कवासी लखमा और चैतन्य बघेल समेत 81 नामजद
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 2883 करोड़ की लूट का ‘सिंडिकेट’ बेनकाब; ED की चार्जशीट में कवासी लखमा और चैतन्य बघेल समेत 81 नामजद

The Hill India News
Last updated: December 30, 2025 1:03 pm
The Hill India News
Published: December 30, 2025
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रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले (Liquor Scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। जांच एजेंसी ने एक नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें भ्रष्टाचार के उस मकड़जाल की परतें खोली गई हैं, जिसने साल 2019 से 2023 के बीच सरकारी खजाने को 2883 करोड़ रुपये की चपत लगाई।

Contents
चार रास्तों से हुई 2883 करोड़ की ‘काली कमाई’81 आरोपी: पूर्व मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक आंचसिंडिकेट का ‘फील्ड नेटवर्क’382 करोड़ की संपत्ति कुर्क, जांच अभी भी जारीभ्रष्टाचार का मॉडल: एक नजर में

ED की इस चार्जशीट में न केवल नौकरशाहों बल्कि राज्य के बड़े राजनीतिक चेहरों और उनके परिजनों को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है। इस सनसनीखेज खुलासे ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

चार रास्तों से हुई 2883 करोड़ की ‘काली कमाई’

ED की जांच में सामने आया है कि इस संगठित सिंडिकेट ने अवैध कमाई के लिए चार अलग-अलग तरीके (Modus Operandi) अपनाए थे:

  1. कमीशन का खेल: शराब सप्लायरों से सरकारी बिक्री पर मोटा कमीशन वसूला गया। इसके लिए शराब की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया।

  2. बिना रिकॉर्ड की देसी शराब: सरकारी दुकानों से बिना किसी सरकारी रिकॉर्ड के देसी शराब बेची गई। इसमें नकली होलोग्राम और बोतलों का इस्तेमाल किया गया ताकि कोई टैक्स न देना पड़े।

  3. लाइसेंस कार्टेल: शराब कंपनियों से भारी भरकम ‘कार्टेल कमीशन’ लिया गया ताकि उन्हें बाजार में हिस्सेदारी और लाइसेंस मिलता रहे।

  4. विदेशी शराब पर कब्जा: FL-10A लाइसेंस के जरिए विदेशी शराब कंपनियों से होने वाले मुनाफे का 60% हिस्सा सिंडिकेट की जेब में भेजा गया।

81 आरोपी: पूर्व मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक आंच

ED ने इस चार्जशीट में 59 नए आरोपियों को शामिल किया है, जिसके बाद इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या अब 81 हो गई है।

  • राजनीतिक दिग्गज: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की तत्कालीन डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया को आरोपी बनाया गया है।

  • टॉप ब्यूरोक्रेट्स: पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और CSMCL के एमडी अरुण पति त्रिपाठी सिंडिकेट के अहम मोहरे बताए गए हैं।

  • किंगपिन: इस पूरे काले कारोबार की अगुवाई अनवर ढेबर और उसके सहयोगी अरविंद सिंह कर रहे थे।

सिंडिकेट का ‘फील्ड नेटवर्क’

जांच में यह भी पाया गया कि जिला स्तर पर करीब 30 फील्ड आबकारी अधिकारी इस भ्रष्टाचार में सीधे तौर पर शामिल थे। ये अधिकारी तय कमीशन के बदले सरकारी दुकानों से अवैध और बिना हिसाब वाली शराब बिकवाने में सिंडिकेट की मदद करते थे।

382 करोड़ की संपत्ति कुर्क, जांच अभी भी जारी

ED अब तक इस मामले में कड़ी कार्रवाई कर चुकी है:

  • 9 बड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कई अभी भी सलाखों के पीछे हैं।

  • 1041 चल-अचल संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं, जिनकी कुल कीमत 382 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें रायपुर का एक लग्जरी होटल और नेताओं की बेनामी संपत्तियां शामिल हैं।

भ्रष्टाचार का मॉडल: एक नजर में

श्रेणी मुख्य विवरण
घोटाले की कुल राशि ₹2883 करोड़
कुल आरोपी 81 (59 नए शामिल)
मुख्य राजनीतिक नाम कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, सौम्या चौरसिया
मुख्य प्रशासनिक नाम अनिल टुटेजा, निरंजन दास, ए.पी. त्रिपाठी
जब्त संपत्ति ₹382 करोड़ (1041 संपत्तियां)
घोटाले का कालखंड 2019 – 2023

ED के सूत्रों का कहना है कि यह जांच अभी खत्म नहीं हुई है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में अभी कई और कड़ियां जुड़नी बाकी हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्तियों की कुर्की संभव है। इस चार्जशीट के बाद अब कानूनी लड़ाई और तेज होने की उम्मीद है।

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